जयंती विशेष : छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के प्रथम स्वप्नदृष्टा : डां. खूबचंद बघेल


जयंती विशेष : छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के प्रथम स्वप्नदृष्टा : डां. खूबचंद बघेल
  19/07/2020  


केशव पाल

रायपुर : भारत के आजादी के आंदोलन म सक्रिय योगदान देके तात्कालीन भारत म चलत सामाजिक,राजनीतिक परिवर्तन अउ आर्थिक मुक्ति आंदोलन म भाग लेके जेमन एक नवा इतिहास बनाइन वोमा स्व.डा.खूबचंद बघेल घलो रहिन। बघेल जी ल छत्तीसगढ़ राज्य निर्माण के प्रथम स्वप्नदृष्टा घलो कहे जाथे। छत्तीसगढ़ के कोरा मा बिराजे गांव पथरी(बोहरही) जेन सिलयारी ले पांच किलोमीटर के दूरिहा मा हवय। जिहां के पबरित माटी म उन्नीस जुलाई सन् उन्नीस सौ म जनम लिस अमर स्वर छत्तीसगढ़ के परसिद्ध साहित्यकार,नाटककार अउ स्वतंत्रता संगराम सेनानी स्व.डां. खूबचंद बघेल जी। जेन स्वतंत्रता के लड़ई म जी जान ले भाग लिस अउ हमर खुसी खातिर कई बार जेल घलो गिस। रइपुर म सिक्छा गरहन करिस अउ सरकारी डाँक्टर के रूप म नउंकरी करिस। जब सन् उन्नीस सौ तीस म महात्मा गांधी के आंदोलन चलिस तब ये हमर माटी के रतन हा नउंकरी ल छोड़ दिस,अउ वो आंदोलन म कूद पड़िस। अउ सबले बिलक्छन बात तो ये हरे कि वोकर माता केतकी बाई घलो स्वतंत्रता संगराम सेनानी रहिस। जेन ला कई घंव ले जेल घलो जाए बर परिस। डां.बघेल जी जब उन्नीस सौ तयतीस म जेल ले छुटिस तब हरिजन सेवा समिति के मंतरी निरवाचित होइस। जब महात्मा गांधी जी हरिजन मन के उद्धार बर छत्तीसगढ़ के दउंरा करिस।तब बघेल जी घलो वोला सफल बनाय बर अब्बड़ मेहनत करिस। अउ गांव-गांव के दउंरा करिस।उही समे बघेल जी हरिजन मन के समसिया ल लेके ऊंच-नीच नाम के नाटक लिखिस।जेला गांव-गांव म खेले गिस। अउ सफलता घलो मिलिस। सिलयारी म ग्रामोद्योग संघ के इसथापना करिस अउ धान कुटई,साबुन उदयोग जइसे कुटीर उदयोग के संचालन करिस।बघेल जी राज्यसभा के सदस्य घलो रहिस अउ प्रांतीय विधानसभा के सदस्य घलो बनिस। बघेल जी ऊंच-नीच,करमछड़हा,जनरैल सिंह,लेड़गा सुजान के गोठ जइसे अउ बहुत अकन नाटक लिखिस। दिनांक बाईस फरवरी सन् उन्नीस सौ उनहत्तर के दिल्ली म हमर ये अमर सपूत दुनिया ल छोड़ दिस। बघेल जी अपन जीवन भर किसान मन के हित म लड़िस। अउ दीन-दुखिया के मान-सम्मान बर जिस।अपन आखिरी सांस तक रनभूमि म डटे रहिस अउ छत्तीसगढ़ राज्य आंदोलन मे निरनायक भूमिका निभइस। जेकर भासा बोली म गांव ह झलकय अउ जेकर मुहावरेदार सब्द अउ छत्तीसगढ़ी हाना मा जेन सुदंरता रहिस वो अब बिरले साहित्यकार मा देखे ला मिलथे। वोकर परसिद्ध छत्तीसगढ़ी नाटक करमछड़हा जेमा गांव अउ सहर के संस्कीरीति अउ सभ्यता ले पयदा होवइया समसिया ला देखाय गेहे। जेला उच्च सिक्छा के पाठ्यकरम मा घलो सम्मिलित करे गेहे,अउ वोकर कई नाटक के मंचन घलो करे जा चुके हे। आज भले ही हमर ये माटी के पुजारी हा हमर बीच नइ हे फेर सुरता मा आज घलो जिंदा हे अउ आघू घलो जिंदा रइही।


अऊ खबर

img not found

06/09/2020 अपराध

img not found

21/11/2019 धान

Top