रक्षाबंधन विशेष : भाई-बहिनी के प्रेम के प्रतीक आय : राखी तिहार


रक्षाबंधन विशेष : भाई-बहिनी के प्रेम के प्रतीक आय : राखी तिहार
  03/08/2020  


केशव पाल रायपुर। रक्षाबंधन जेला राखी तिहार घलो कहे जाथे। येला हर बछर सावन महिना के पूर्णिमा के दिन मनाय जाथे। रक्षाबंधन म राखी या रक्षासूत्र के अधिक महत्त्व रहिथे। राखी कच्चा सूत जैसे सस्ता वस्तु ले लेके रंगीन कलाव,रेशमी धागा अउ सोना या चाँदी जैसे महंगा वस्तु तक के हो सकत हे। रक्षाबंधन भाई बहिनी के रिश्ता के प्रसिद्ध तिहार आय। रक्षा के मतलब सुरक्षा अउ बंधन के मतलब बाध्य होथे। रक्षाबंधन के दिन बहिनी मन अपन भाई मन के तरक्की बर भगवान ले प्रार्थना करथे। ये दिन बहिनी मन अपन भाई मन ल राखी बाँधथे। येकर बदला म भाई मन बहिनी मन ल कुछ उपहार देथे अउ एक-दूसर ल मिठाई खवाके अपन प्यार ल साझा करथे। यानि कि भाई-बहिनी के बीच के रिश्ता ल अउ मजबूत करे के पर्व आय रक्षाबंधन।

●प्रचलित किवदंती अउ मान्यता●

■ राजपूत जब लड़ाई म जावय तब महिला मन वोकर माथ म कुमकुम तिलक लगाके वोकर हाथ म रेशमी धागा बाँधय। इही विश्वास के साथ कि ये धागा वोला विजयश्री के साथ वापस ले आही।

■ राखी के संग एक अउ प्रसिद्ध कहानी जुड़े हवय कि कहे जाथे कि मेवाड़ के रानी कर्मावती ल बहादुर शाह द्वारा मेवाड़ म हमला करे के पूर्व सूचना मिलिस। रानी लड़े म असमर्थ रहिस इही पाय के वोहा मुगल बादशाह हुमाँयू ल राखी भेज के रक्षा के याचना करिस। हुमाँयू ह मुसलमान होते हुए भी राखी के लाज रखिस अउ मेवाड़ पहुँच के बहादुरशाह के विरूद्ध मेवाड़ के डहर ले लड़त हुए कर्मावती अउ वोकर राज्य के रक्षा करिस।

■ एक अन्य प्रसंगानुसार सिकंदर के पत्नि ह अपन पति के हिन्दू शत्रु पुरूवास ल राखी बाँधके अपन मुँहबोला भाई बनाइस अउ युद्ध के समय सिकन्दर ल नइ मारे के वचन लिस पुरूवास ह युद्ध के दौरान हाथ म बँधे राखी अउ अपन बहिनी ल दिये हुए वचन के सम्मान करत हुए सिकन्दर ल जीवन-दान दिस।

■ महाभारत म घलो ये बात के उल्लेख हे कि जब ज्येष्ठ पांडव युधिष्ठिर ह भगवान कृष्ण ले पूछिस कि मैं ह सबो संकट ल कैसे पार कर सकत हँव। तब भगवान कृष्ण ह वोकर अउ वोकर सेना के रक्षा बर राखी के तिहार मनाय के सलाह दिस। वोकर कहना रहिस कि राखी के ये रेशमी धागा म वो शक्ति हे जेकर ले आप हर आपत्ति ले मुक्ति पा सकत हव। ये समय द्रौपदी द्वारा कृष्ण ल अउ कुंती द्वारा अभिमन्यु ल राखी बाँधे के कई उल्लेख मिलथे। महाभारत म ही रक्षाबंधन ले संबंधित कृष्ण अउ द्रौपदी के एक अउ वृत्तान्त घलो मिलथे। जब कृष्ण ह सुदर्शन चक्र ले शिशुपाल के वध करिस तब वोकर तर्जनी म चोट आगे रहिस। द्रौपदी ह वो समय अपन साड़ी ल फाड़के वोकर उँगली म पट्टी बाँधे रहिस। ये श्रावण मास के पूर्णिमा के दिन रहिस। कृष्ण ह ये उपकार के बदला बाद म चीरहरण के समय वोकर साड़ी ल बढ़ाके चुकाय रहिस। अइसन कहे जाथे कि परस्पर एक दूसर के रक्षा अउ सहयोग के भावना के पर्व रक्षाबंधन इही मेर ले प्रारंभ होय रहिस।

 


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