तीजा-पोला विशेष : पोरा म होथे बैला के पूजा,तीजा म तीजहारिन मन रहिथे उपास


तीजा-पोला विशेष : पोरा म होथे बैला के पूजा,तीजा म तीजहारिन मन रहिथे उपास
  18/08/2020  


 

केशव पाल / तिल्दा-नेवरा 

कोनो भी राज्य के पहचान वोकर संस्कृति अउ परंपरा ले होथे। जेमा छत्तीसगढ़ राज्य भारत देश के एक मात्र अइसन राज्य आय जौन पूर्णतः कृषि प्रधान राज्य आय। इँहा के निवासी पूरा वर्ष भर खेती कार्य म लगे रइथे। इँहा बारहों महिना कुछु न कुछु तिहार मनाय जाथे। इँहा के निवासी अपन सांस्कृतिक विरासत ल अइसन संजो के रखे हवय कि इँहा रूख राई,जीव-जंतु अउ प्रकृति ल घलो लोगन देवता बरोबर पूजथे। अउ लोकपर्व म अपन भाव ल अभिव्यक्त करत जनमानस ल एकता के संदेश देथे। तीजा-पोरा छत्तीसगढ़ के प्रमुख तीज-तिहार म एक प्रमुख तिहार आय। ये दिन बहु-बेटी मन अपन मइके जाथे अउ मइके म ही ये तिहार ल मनाथे। तीजा-पोरा के कुछ दिन पहिली मइके ले लेगे बर आथे। बहु-बेटी मन संगे म जाथे अउ पोरा के दिन पोरा पटक के त तीजा के दिन उपास रहिके ये तिहार ल मनाथे।

■ बैला मन के श्रृँगार अउ गर्भ पूजन के परब पोला ■

पोला पर्व के अवसर म तरह-तरह के व्यंजन बनाय जाथे। पोला ल छत्तीसगढी म पोरा घलो कहे जाथे। पोला पर्व म बैला मन के श्रृँगार अउ गर्भ पूजन करे जाथे। किसान मन अपन गौ-माता अउ बैला मन ल नहवाथे धोथे। वोकर सींग अउ खूर म पेन्ट या पालिस लगाके कई प्रकार ले वोला सजाथे। गला म घुघरूं,घंटी या कौडी़ ले बने आभूषण पहिनाथे। अउ पूजा करके आरती उतारथे। पोला पर्व के पूर्व रात्रि म गर्भ पूजन करे जाथे अइसन माने जाथे कि ये दिन अन्न माता गर्भ धारण करथे। अर्थात धान के पौधा म दूध भरथे।

■ घरो-घर बनथे छत्तीसगढ़ी पकवान ■

तीजा-पोरा के दिन घरो-घर गुरहा, चीला,भजिया,अइरसा,सोहारीं,चौसेला,ठेठरी,खुरमी,
बरा,मुरकू,मूठिया,गुजिया,तसमई,सुजी,सेवई आदि छत्तीसगढी पकवान बनाय जाथे। बहु-बेटी मन ये दिन अपन परिवार म एक-दूसर के घर खाय ल घलो जाथे।

             ■ पोरा तिहार ■

पोरा तिहार ल भादो महीना के अमावस्या के दिन मनाय जाथे। ये तिहार ह तको खेती किसानी ले जुड़े तिहार आय। ये दिन किसान मन अपन-अपन गाय बैला ल धो मांज के पूजा करथे। पोरा के दिन माटी के बैला,जाँता,पोरा के घलो पूजा पाठ करे जाथे। ये दिन नान-नान लइका मन माटी या लकड़ी के बने नंदिया बैला ल चलाथे अउ दौडा़थे। जघा-जघा बैल दौड़,मटका फोड़ सहित कई प्रकार के कार्यक्रम घलो आयोजित करे जाथे। संझा बेरा बहु-बेटी मन पोरा फोड़े ल जाथे।

              ■ तीजा-तिहार ■

तीजा तिहार भादो महीना म शुक्ल पक्ष के तीसरा दिन मनाय जाथे। हरतालिका तीज ल ही तीजा के नाँव ले घलो जाने जाथे। छत्तीसगढ़ म तीजा ह दीदी-बहिनी मन के तिहार आय। पोरा के तीन दिन के बाद तीजा तिहार मनाय जाथे। ये दिन सब दीदी-बहिनी,बहू-बेटी मन मइके आय रहिथे अउ मइके म आके अपन पति के लम्बा उमर खातिर उपास रखथें। भगवान शंकर के माटी के मूरति बनाके पूजा पाठ करथें अउ पति के लम्बा उमर बर भगवान ले बरदान मांगथे। पोरा के दू दिन बाद मतलब दूज के दिन बहु-बेटी मन रात म घर-घर जाके करेला साग के संग भात खाथे। जेला करू भात कहे जाथे। फेर वोकर बिहान दिन निर्जला उपास रहिथे अउ फेर तहान वोकर बिहान दिन घर म बने पकवान ले फरहार करथें। इँही दिन जघा-जघा भगवान गणेश के मूर्ति के स्थापना घलो करे जाथे।


 


 


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