विश्व के एकमात्र कौशल्या मंदिर चंदखुरी,बनत हे पर्यटन तीर्थ स्थल


विश्व के एकमात्र कौशल्या मंदिर चंदखुरी,बनत हे पर्यटन तीर्थ स्थल
  02/09/2020  


चंदखुरी से लौटकर केशव पाल तिल्दा-नेवरा। जेन प्रकार ले पूरा विश्व म पुष्कर म ब्रम्हा अउ कोणार्क म सूर्यदेव के एकमात्र मंदिर हे। ठीक उही किसम ले छत्तीसगढ़ के चंदखुरी म विश्व के एकमात्र प्राचीन कौशल्या मंदिर स्थापित हावय। जी हाँ उही चंदखुरी जेला माता कौशल्या के जन्मस्थली वोकर मइके अउ भगवान राम के ननिहाल यानी ममा गांव कहे जाथे। ये दिनों छत्तीसगढ़ सरकार राम वनगमन पथ विकास परियोजना के तहत इँहा ल पर्यटन तीर्थ स्थल के रूप म विकसित करत हे अउ येकर सौदर्यीकरण कर नागरिक सुविधा के विकास करत हे।
छत्तीसगढ़ के राजधानी रायपुर ले महज 25 किलोमीटर के दूरिहा म पूर्व दिशा म स्थित शस्य श्यामला पावन भूमि गांव चंदखुरी। चंदखुरी यानी धर्म,अध्यात्म अउ आस्था के प्राचीन नगरी। जेन प्राचीनकालीन अनेक गौरव गाथा खुद म सहेजे अउ समेटे हुए हे। चंदखुरी जेकर प्राचीन नाम चंद्रपुरी रहिस। इँहा लगभग बीस एकड़ म फैले जलसेन नाम के तालाब के बीचों-बीच टापू प्राचीन द्वीप म भारतवर्ष म एकमात्र माता कौशल्या के प्राचीन अउ दुर्लभ मंदिर स्थापित हावय। ये मंदिर के गर्भगृह म माता कौशल्या अउ वोकर गोद म भगवान राम बाल रूप म विराजमान हावय।

■ आठवीं शताब्दी म होय रहिस मंदिर के निर्माण

अइसन किवदंती हावय कि ये मंदिर के निर्माण आठवीं शताब्दी म सोमवंशी राजा मन करे रहिन। अउ इही सोमवंशी राजा मन सपना आय म जलसेन तालाब के खुदाई करवाय रहिस जिहां ले माता कौशल्या के दुर्लभ प्रतिमा मिले रहिस जेमा भगवान राम बाल रूप म विराजमान रहिस। जेला सात तालाब के बीच टीला म मंदिर बनाके स्थापित करे गे रहिस। मंदिर तक जाय बर पुल के निर्माण करे गेहे जेला पार कर बीच टापू म पहुंचे जा सकथे। तालाब म उगे कमल पत्र अउ कमल पुष्प इँहा के सुंदरता म चार चांद लगाथे त उंहे परिसर अउ तालाब के बीच म स्थापित छोटे-बड़े प्रतिमा लोगन मन ल बरबस ही आकर्षित कर लेथे। दशरथ जी के दरबार,मुख्य द्वार म बने हनुमान अउ परिसर म शिव नंदी के प्रतिमा पर्यटक मन के मन मोह लेथे।

■ राजा भानुमंत के बेटी कौशल्या

छत्तीसगढ़ ल माता कौशल्या के जन्मभूमि होय के कारण कौशल प्रदेश कहे जाथे। इँहा के लोगन कौशल्या ल बहिनी अउ राम ल भांचा बरोबर मानथे। इही कारण इँहा भांचा के पाँव घलो परे जाथे। अइसन कहे जाथे कि चंदखुरी दक्षिण कौशल राज्य के हिस्सा रहिस। अउ राजा भानुमंत दक्षिण कौशल के राजा रहिस। राजा भानुमंत के बेटी कौशल्या के बिहाव अयोध्या नरेश दशरथ के संग होय रहिस। बिहाव म भेंट स्वरूप राजा भानुमंत ह कौशल्या ल दस हजार गांव दे रहिस। जेमा ये चंदखुरी घलो शामिल रहिस। अइसन मान्यता हावय कि जब भगवान राम वनवास ले अइस त वोकर राज्याभिषेक करे गइस। वोकर बाद राम के तीनों माता कौशल्या,सुमित्रा अउ कैकयी तपस्या करे बर चंदखुरी पहुंचिन। अउ तीनों माता तालाब के बीच विराजमान होइन। तपस्या के बाद सुमित्रा अउ कैकयी दूसर जघा चल दिस पर माता कौशल्या आज घलो इँहे विराजमान हावय। त्रेतायुगीन छत्तीसगढ़ के प्राचीन नाम दक्षिण कौशल रहिस जेन ह दण्डकारण्य के रूप म विख्यात रहिस। ये क्षेत्र ल दक्षिणा पथ घलो कहे जाथे। येहा राम वनगमन पथ के अंतर्गत आथे। इही कारण भगवान राम के वनवास काल म इँहा आय के जनश्रुति मिलथे। अउ वोकर माँ के जन्मस्थली होय के कारण ये क्षेत्र म वोकर आगमन वोकर ननिहाल होय के पुष्टि करथे।

■ ए हरे इँहा के इतिहास

बाल्मिकी रामायण के अनुसार यह कहे जाथे कि जब लक्ष्मण मेघनाद के बाण ले घायल होय रहिस तब विभीषण के कहे म हनुमानजी लंका के प्रसिद्ध वैद्य सुषेण ल लेके आय रहिस। अउ वैद्य ह हनुमानजी ल द्रोणागिरी पर्वत ले संजीवनी लाय बर कहिस। जेकर बाद वैद्य सुषेण ह संजीवनी ले मूर्छित लक्ष्मण के उपचार करिस। ये वैद्य सुषेण के समाधी माता कौशल्या मंदिर के पास ही मौजूद हे। मान्यता हवय कि सुषेण इँहे अपन प्राण त्यागे रहिस। लोगन मन के अनुसार इँहा सीताफल के एक खास पेड़ घलो लगे हे। जेला मन्नत के पेड़ कहे जाथे। मान्यता हे कि ये पेड़ म पर्ची म अपन नाम लिख के श्रीफल के संग बाँधे म मुराद पूरा हो जथे। लोककथा मन के मुताबिक कौशल नरेश भानुमंत के पुत्री के नाम राजकुमारी भानुमती रहिस। राजा दशरथ ले बिहाव होय के बाद कौशल के बेटी होय के कारण भानुमति के नाम कौशल्या पड़िस। जानकार मन के बताय अनुसार इँहा के पौराणिक कथा अउ प्राचीन वैभव के उल्लेख बाल्मिकी रामायण अउ रामचरित मानस म घलो अंकित हावय।

■ बनत हे पर्यटन तीर्थ स्थल

राज्य सरकार ये मंदिर ल पर्यटन तीर्थ स्थल के रूप म संवारत हे जेकर काम घलो चालू होगे हे। इँहा ल प्राचीन स्थापत्य कला के रूप म अइसे विकसित करे जात हे कि अवइया भक्त मन ल दक्षिण कौशल के वैभव के अहसास हो सकय। सौदर्यीकरण म प्राचीन स्थापत्य कला के अनुरूप मूल मंदिर बनाय जाही। मुख्य द्वार ल बड़े करे जाही। त उंहे तालाब के चारो ओर घाट अउ वाकिंग ट्रैक के निर्माण घलो करे जाही ताकि पर्यटक मन मंदिर के परिक्रमा कर सकय। मंदिर तक पहुंचे बर हाइटेक पुल के निर्माण करे जाही। जेन ह वियतनाम के हैंड ब्रिज के तर्ज म रइही। जेन दिखे म अइसे लगही कि कोनो ह अपन हाथ ले पानी ले ये पुल ल उठाय हे। मंदिर परिसर के सौदर्यीकरण के संगे-संग इँहा अउ कई प्रकार के सौदर्यीकरण के कार्य करे जाही। त अवइया दिन म जब ये पूर्ण रूप ले विकसित हो जही त कहीं न कहीं लोगन मन के आस्था तो बड़बे करही,छत्तीसगढ़ के मान-सम्मान म वृद्धि तो होबे करही संगे-संग इँहा ल अंतर्राष्ट्रीय स्तर म एक नवा पहचान घलो मिलही।


अऊ खबर

img not found

06/09/2020 अपराध

img not found

05/12/2019 this is test news22

img not found

21/11/2019 धान