छत्तीसगढ़ म कोन बड़े... मंत्री या कलेक्टर ?...का कोरोना ल लेके शासन प्रशासन के बीच हे तालमेल के कमी ?


छत्तीसगढ़ म कोन बड़े... मंत्री या कलेक्टर ?...का कोरोना ल लेके शासन प्रशासन के बीच हे तालमेल के कमी ?
  20/09/2020  


नवीन देवांगन

पाछू कई दिन ले छत्तीसगढ़ म कोरोना के प्रकोप लगातार बाढ़त जात हे तेकर आंकड़ा कोनो से छुपे नई हे, कई जिला म प्रकोप से बचे अऊ कोरोना वायरस के चैन ल तोड़े बर पहली ले लॉकडाऊन लगे हुए हे, मरीज के आंकड़ा म गौर करिन त राजधानी म रोज सबले ज्यादा मरीज मिलत रहिस अऊ ओई अनुसार कोरोना से मौत के आंकड़ा भी ज्यादा ही रहत रहिस, अईसे म सवाल उठना लाजमी हो जाथे कि कम कोरोना मरीज वाला जिला जईसे मुंगेली, बेमेतरा, दुर्ग, राजनांदगांव म एहतियान पहली ले लॉक़डाउन के घोषणा कर देहे गए रहिस फेर सबले ज्यादा मरीज मिले वाला राजधानी रायपुर म अतेक देर काबर ? जेकर जवाब शायद सरकार के कद्दावर मंत्री के बयान से थोड़ा बहुत आसानी से समझे सा सकत हे ठीक एक दिन पहली सरकार के कद्दावर अऊ सरकार कति ले अधिकृत प्रवक्ता मंत्री रविन्द्र चौबे के बयान आईस कि सरकार कना राजधानी म लॉकडाउन ल लेके न कोनो चर्चा हे न लॉकडाउन ल लेके कोनो प्रस्ताव विचाराधीन हे बयान अऊ मंत्री के किरकिरी जब होए ल शुरु होईस कि ओही शासन प्रशासन रात होत होत लॉकडाउन लगाए म चर्चा करे ल शुरु कर दिहिस, अंतत: कल बिहनिया कलेक्टर ह राजधानी म एक हफ्ता के संपूर्ण लॉकडाउन के आदेश जारी कर दिहिस, बता दिन कि राज्य सरकार ह कलेक्टर मन ल अपन अपन जिला म परिस्थिति अनुसार लॉकडाउन लगाए या अनलॉक करे के पूरा पूरा अधिकार दिए हावय,  मात्र चौबिंस घंटा म मंत्री के बयान के उलट राजधानी म लॉकडाउन के घोषणा क देहे गईस।

 

ए सब के बीच एला लेके सवाल खड़े होए लगिस कि प्रदेश म कलेक्टर बड़े हे कि मंत्री ?..का अफसरशाही प्रदेश म फेर हावी हो गए हे ? समय समय म अईसे भी आरोप लगत ही रहिथे कि अफसरशाही सरकार के इतर अपन पैरलर सरकार चलाथे अऊ जेन करना रहिथे ओही करथे, प्रदेश म कोरोना नियंत्रण बर का मुख्यमंत्री का स्वास्थमंत्री का कैबिनट जम्मों झन कोरोना संकट से प्रदेश ल उबारे बर दिन रात एक कर देहे हे मुख्यमंत्री खुद रोज कोरोना ल लेके प्रदेश भर ले फीडबैक लेथे, अईसे म सरकार अऊ केलक्टर मन के बीच सामंजस्य के कमी साफ साफ नज़र आथे।

 

छत्तीसगढ़ सरकार कोरोना संकट म पाछू कई महिना ले चौथरफा दबाव झेलत हे, चाहे व्यापारी वर्ग के बात करिन, चाहे उद्योग धंधा के चाहे आम लोगन के रोजी रोटी के या फेर अभी के सबसे बड़े चुनौती स्वास्थ्य सेवा ल लेके होवय, सरकार ल प्रदेश ल चलाए बर पईसा भी चाही, नवा योजना, नवा रोजगार सृजन, किसान , उद्योग समेत तमाम जनकल्याणकारी योजना बिन पईसा के लागू कर पाना सरकार बर बड़का चुनौती बन के आघू आवत हे, ये सब दवाब के बीच सरकार कोरोना से निपटे बर रात दिन लगे हुए हे, का कारण हे कि एक समय कोरोना नियंत्रण म सरकार कई प्रदेश ल पाछू छोड़त हुए नं वन रहिस तेन आज जाके देश भर म कई पायदान नीचे चले गए हे, कारण का हे सरकार के इच्छाशक्ति म कमी या फेर ओला अफसर मन से ठीक ठंग से लागू करवाए म चूक ?

 

अस्पताल मन म डॉक्टर गायब अऊ फील्ड़ ले अफसर मन गायब कोरोना संकट म अईसे आरोप लगना अब आम हो गए हे, प्रशासनिक अमला कोरोना के विष्फोटख स्थिति ल देख मुंह फार के खड़े हे, का ए स्थिति एके दिन म बनिस होही ?… शायद नहीं…त फेर ए चूक ल काकर मथ्थे फोड़े जाए सरकार के या प्रदेश के प्रशासनिक अमला के, अईसे नई हे कि कोरोना ल लेके छत्तीसगढ़ सरकार कोनो भी प्रकार से कही सुस्ती दिखाईस होही, चाहे बजट के मामला म हो चाहे नागरिक सुविधा के मामला सरकार कोरोना संकट के बेरा हर समय एक्टिव दिखिस फेर का अईसे माने जाए के अफसरशाही के “चलता है यार , ये सब होते रहता है”  रवैया ए विस्फोटख स्थिति बर जिम्मेदार हे ?  का अईसे माने जाए कि शासन अऊ प्रशासन के बीच आपसी तालमेल के कमी म जनता त बीच म भोगे ल पड़त हे, समय रहत प्रशासन अगर एसी चैंबर ले निकल के जाग जाए रहितिस त का आज प्रदेश म ए भयावह मंजर देखे ल मिलतीस

 

प्रदेश के कई जिला म लॉकडाऊन के घोषणा कर देहे गए हे भयावह स्थिति ल लेके जेकर मांग पाछू कई दिन ले विपक्ष अऊ आम लोगन गाहे बगाहे करत रहिन, ए बीच स्वास्थ्य सेवा ल सुचारु रुप से चलाना अऊ कठिन हो गए हे जब प्रदेश के हजारों संविदा स्वास्थ्यकर्मी हड़ताल म चले गए हे स्वास्थ्यमंत्री के भावूक अपील के कोनो असर संविदा स्वास्थ्यकर्मी उपर नई पड़िस, चुनाव के बखत धोषणा पत्र म करे गए वादा कब सरकार ल भारी पड़ जाही एकर अंदाजा चुनाव के बेरा नई रहय बाद म ओही गला के फांस बन जाथे ए बात शायद अब समझ म आ जाही, स्वास्थ्यकर्मी के हड़ताल म जाए के बाद लॉकडाउन लगा कोरोना संकट से निपटना कोनो आसान काम नई होही, प्रशासनिक अमला बर ए भारी बड़े चुनौती बन के आघू आही, जब सब सुविधा रहिस, जब समय रहिस , जब सब कुछ अपने पाला म रहिस त प्रशासन हाथ म हाथ धरे “चलता है” वाला सेनेटाईजर लगात रहिस अऊ मुंह नाक कान आंखी सब ल तोपे रहिस, प्रदेश म कोरोना के विस्फोटख स्थिति ल देखत हुए अब देखना ए हे कि का अब भी शासन प्रशासन तालमेल से काम करही, खास कर प्रशासन चुस्त होही या ओईसन्हें सुस्त रईही, ए त अक्टूबर महिना के कोरोना के आंकड़ा खुद बयां कर देही ।


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