भारतीय डाक के उतरिस रंग, धूल खावत हे लाल डिब्बा


भारतीय डाक के उतरिस रंग, धूल खावत हे लाल डिब्बा
  11/10/2020  


केशव पाल तिल्दा-नेवरा। मशहूर गीत 'चिठ्ठी आई है,वतन से चिठ्ठी आई है' एक जमाना रहिस जब ए गाना ह न सिर्फ हर भारतीय के जुबान म रहिस। बल्कि भारतीय डाक विभाग घलो इही गाना ले अपन पहिचान बनाय रहिस। सीमा म जवान,घर म दाई-ददा,दूरिहा म पढ़ई करत लइका अउ ससुरार म बेटी के हाल जाने बर पहिली सिर्फ एक चिट्ठी ही काफी रहिस। जेकर अगोरा सब ल राहय। जैसे ही डाकिया साइकिल के घंटी बजावय मन म खुशी छा जवय। संदेश पहुंचाय म भारतीय डाक पूरा ईमानदारी ले बहुत अच्छा काम करिस। जेकर सब प्रशंसा घलो करथे। पर आज डाक विभाग अपन अस्तित्व ल सुरता करत रोवत नजर आवत हे। अउ खुद ल बचाय रखे के जद्दोजहद म लगे हुए हे। समय के संग बहुत बदलाव होइस आज ए मशीनी,तकनीकी अउ विज्ञान के दुनिया म कई नवा-नवा खोज अउ आविष्कार होवत हे। जब ले टेलीफोन,मोबाइल आइस तब ले डाक के महत्व घलो ह कम होय ल धर लेहे। अब लोगन मन अपन साथी,परिजन ल न तो चिठ्ठी लिखत हे अउ न ही चिठ्ठी भेजत हे। लिहाजा गाँव-शहर म चिठ्ठी डारे बर रखे लाल बाक्स धूल खावत नजर आवत हे। न तो वोमा कोनो चिठ्ठी डारय अउ न ही वोला कोनो खोले बर आवय। कहूं-कहूं तो वोमा तारा घलो नइ लगे राहय।जेन खुल्ला बदहाल स्थिति म लटके रहिथे। अवइया-जवइया लोगन म बेमतलब के वोकर ले छेड़खानी करत धूल,कूरा-करकट,पथरा ल वोमा डार देथे। आज डाक विभाग नवा पीढ़ी के अनुसार काम करे म शायद अपन आप ल कमजोर महसूस करत हे। कई नवा तकनीक मन ले जुड़े के बाद भी युवा मन ए कोती आकर्षित नइ हो पावत हे। अब शासन-प्रशासन अउ संबंधित विभाग ल येकर बर ध्यान देय के जरूरत हे,तभे ये चिठ्ठी डिब्बा अउ डाक के अस्तित्व ह बरकरार रहि पाही।

चिठ्ठी म झलकय मानवीय संवेदना

आज भले ही संदेश भेजे बर टेलीफोन,मोबाइल सहित कई तकनीक आ गेहे। पर ये सब म चिठ्ठी अतका अपनापन देखे ल नइ मिलय। चिठ्ठी म मनखे के दुख,दर्द ह दिखय। मानवीय संवेदना,मन के भाव अउ जिनगी के पीरा चिठ्ठी म शब्द के रूप म तऊंरत राहय। अउ पढ़-पढ़ के आँखी म आँसू घलो आ जवय। आज के आधुनिक संदेश माध्यम ले अपनत्व के भाव बिल्कुल गायब होगे हे।

डाक के महत्व आज घलो हे बरकरार

भले ही डाक विभाग के प्रासंगिकता कम होवत जात हे लेकिन अभी घलो कई मायनें म येकर प्रासंगिकता बरकरार हवय। आज घलो जब कोई अधिकारिक आदेश भेजे जाथे त येकर बर डाक के ही उपयोग करे जाथे। यदि कोई सामान अपन प्रियजन करा कहूं दूर पहुंचाना हे तभो डाक के ही सुरता करे जाथे। अइसे नइहे कि डाक के अस्तित्व ही मिट चुके हे बस येकर अस्तित्व कमजोर होवत जात हे।

 


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