आयोजन : रविशंकर विश्वविद्यालय मा ई-संगोष्ठी के होइस आयोजन, भाषाविद् मन रखिन अपन विचार


आयोजन : रविशंकर विश्वविद्यालय मा ई-संगोष्ठी के होइस आयोजन, भाषाविद् मन रखिन अपन विचार
  28/11/2020  


केशव पाल @ रायपुर। छत्तीसगढ़ी राजभाषा दिवस के अवसर मा साहित्य एवं भाषा अध्ययनशाला पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर मा राष्ट्रीय ई-संगोष्ठी के आयोजन करे गइस। "छत्तीसगढ़ी भाषा,साहित्य अउ संस्कृति" विषयक संगोष्ठी ला विश्वविद्यालय के कुलपति 'प्रो.के.एल.वर्मा' हा संबोधित करत हुए कहिस कि छत्तीसगढ़ी भाषा,साहित्य अउ संस्कृति के मान सम्मान हमर मान सम्मान हे। हमर इहाँ हर मौसम अउ हर तीज-तिहार के लोकगीत अलग-अलग हे। धान के कटोरा मा छत्तीसगढ़ी भाषा साहित्य के भंडार हे,ये हमर संस्कृति,अस्मिता,सुवाभिमान अउ चिन्हारी हरय। छत्तीसगढ़ी साहित्य के अध्ययन बर लइका मन ला प्रेरित करना हे। ताकि छत्तीसगढ़ी भाषा,संस्कृति समृद्ध हो सकय।
माई पहुना 'प्रो. चितरंजन कर' हा छत्तीसगढ़ी लोक भाषा : दशा अउ दिशा ऊपर व्याख्यान दिस। ओमन कहिन कि लोक कभू विलुप्त नइ होवय। शब्दकोश अउ व्याकरण भाषा के रीढ़ आय। 'भवानी प्रसाद मिश्र' के उद्घरण ला बतावत कहिन कि "शब्द हा कवि ला चुनथे।" जेला मातृभाषा नइ आवय ओला कोनो दूसर भाषा के सुव्यवस्थित ज्ञान नइ राहय। मानकीकरण के विषय मा कहिन कि दूसर भाषा ले छत्तीसगढ़ी मा शब्द लेय ले छत्तीसगढ़ी समृद्ध होही।

प्राचीन अउ अर्वाचीन स्वरूप ऊपर चर्चा

कार्यक्रम के पहुना 'डां.अनिल भतपहरी' हा प्रागैतिहासिक काल के कबरा पहाड़,जोगीमारा गुफा ले लेके आर्य,अनार्य,द्रविड़ संस्कृति के समागम के चर्चा करिन। साथ ही मौखिक गाथा के प्राचीन अउ अर्वाचीन स्वरूप ऊपर घलो विस्तार ले चर्चा करे गइस। छत्तीसगढ़ी ला पाली,प्राकृत,अपभ्रंश ले जोड़त हुए ओकर आधुनिक स्वरूप ला विस्तार ले बताइस।

छत्तीसगढ़ी उपन्यास लेखन के गोठ

खास पहुना 'रामनाथ साहू' हा छत्तीसगढ़ी मा उपन्यास लेखन परंपरा के विस्तृत चर्चा करत हीरू की कहानी के चर्चा करिस। चंदा अमरित बरसाइस,कहाँ बिलागे मोर धान के कटोरा,आवा,उढ़रिया,भुइँया आदि के कथानक अउ संस्कृति के विषय-वस्तु ला विस्तार ले बताइन।

निर्गुण अउ सगुण रूप के वर्णन

कार्यक्रम के खास पहुना 'प्रो. राजन यादव' हा छत्तीसगढ़ी लोक भाषा के ताकत अउ लोक गीत के विकास अउ समृद्धि ला उदाहरण सहित उल्लेख करिस। ओमन कहिन कि साहित्य मा गेयता ही हमर जीवन मा महत्व रखथे। गोरखनाथ के बानी ले लेके जन्म गीत,विवाह गीत,सुआ गीत,भोजली गीत,देवार गीत के शब्द मन ला व्याख्यायित करिन। निर्गुण अउ सगुण रूप के वर्णन करत हुए सस्वर कविता अउ गीत के प्रस्तुति दिस। जेन हा लोक साहित्य के प्रसिद्ध परंपरा ला अभिव्यक्त करथे। छत्तीसगढ़ के लोक उत्सवधर्मिता ले सब झन परिचित कराइन।

येकरो मन के रहिस योगदान

कार्यक्रम के संयोजक 'प्रो.शैल शर्मा' हा सबो झन के स्वागत कर विभाग अउ संगोष्ठी के परिचय दिस। कार्यक्रम के संचालन डां. स्मिता शर्मा अउ डां. गिरजा शंकर गौतम द्वारा करे गइस। विभाग के प्राध्यापक सहसंयोजक डां. मधुलता बारा हा धन्यवाद ज्ञापित करिस। कार्यक्रम मा दीपमाला शर्मा अउ ओकर सहयोगी मन के डहर ले राजगीत अउ संगीतमय लोकगीत प्रस्तुत करे गइस। तकनीकी सहयोग मा डां.कौस्तुभ मणि द्विवेदी,डां.आरती पाठक,डां.कुमुदिनी धृतलहरे,प्रीतम दास अउ हितेश तिवारी के मुख्य भूमिका रहिस। उक्त कार्यक्रम मा भारत के सबो प्रदेश ले भाषा प्रेमी,शोधार्थी अउ छात्र-छात्रा मन जुड़े रहिन।


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