खास बातचीत : फाइनल लिस्ट म नइ आइस नाम तभो ले हार नइ मानिस स्वाति, अब बने बर जात हे साइंटिस्ट


खास बातचीत : फाइनल लिस्ट म नइ आइस नाम तभो ले हार नइ मानिस स्वाति, अब बने बर जात हे साइंटिस्ट
  12/01/2021  


केशव पाल @ तिल्दा-नेवरा। कहे जाथे कि "जहां चाह है वहां राह है।" अउ ये उक्ति ल सच कर के देखाय हे तिल्दा ब्लॉक के ग्राम ईल्दा निवासी स्वाति साहू ह। स्वाति मुंबई के भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र यानी बार्क में साइंटिफिक ऑफिसर (वैज्ञानिक) पद बर चयनित होय हे। अउ वोला 17 जनवरीे ले ट्रेनिंग बर बलाय गेहे।

बहुत मेहनती हे मोर बेटी

बालोद म पदस्थ जेल प्रहरी स्वाति के पिता दिनेश कुमार साहू के कहना हे कि,मोर बेटी कोनो बड़का मुकाम तक पहुंचही येकर मोला पूरा यकीन रहिस। मैं ये बात ले काफी खुश हँव कि मोर बेटी शुरू ले ही बहुत मेहनती रहिस। अउ लगातार प्रयास करत रहिस। जेकर कारण आज वोला मेहनत के फल मिले हे।

लक्ष्य ले कभू भटकेंव नहीं

साइंटिस्ट बर चयनित स्वाति ह बताइस कि मै अपन लक्ष्य ले भटके के कभू नइ सोचेंव। एक लक्ष्य बनाके निरंतर कार्य करत रहेंव। शुरुआत ले ही मोर स्कोप इलेक्ट्रॉनिक रहिस। एक ही लक्ष्य बनाके निरंतर आगे बढ़े हँव।जेकर बाद मोला आज सफलता हासिल होय हे।

कलाम के विचार मोर सफलता के मूलमंत्र

स्वाति के कहना हे कि ओमन 'एपीजे अब्दुल कलाम' के विचार ले काफी प्रभावित हे। "एक विचार से आप अपना भविष्य नहीं बदल सकते पर अपनी आदत को बदल सकते हैं और आपके द्वारा बदली हुई आदतें आपकी भविष्य बदल देगी।" स्वाति इही उक्ति ल अपन सफलता के मूलमंत्र बनाइन अउ निरंतर आघू बढ़ते गिन। अतके नहीं स्वाति ह ये विचार ल अपन स्टडी रूम म लिखके चिपका के रखे रहिन अउ ओला रोज पढ़के मोटिवेट होवत रहिन।

अइसे रहिस शिक्षा के सफर

स्वाति के चयन जवाहर नवोदय साले बोरई दुर्ग में होय रहिस। अउ ग्रेजुएशन शासकीय इंजीयरिंग कॉलेज बिलासपुर म होइस। जिहां 80% अंक हासिल कर कॉलेज स्तर म प्रथम स्थान म रहिन। स्वाति के सपना रहिस कि एक दिन ओहा बड़े मुकाम म पहुंचय। साइंटिफिक ऑफिसर के ये सफर अतका आसान नइ रहिस। इंहा तक पहुंचे म ओला चार साल लग गे। 2017 ले ही वोहा गेट के तैयारी करत रहिन। इही दौरान ई.सी.आई.एल. के इंटरव्यू दोबारा दे चुके हे। अउ बाल्को कंपनी म घलो इंटरव्यू दे चुके हे। 2019 के गेट ले रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन डीआरडीओ के लिखित परीक्षा बर नाम आइस वो परीक्षा ल पास कर ओकर इंटरव्यू क्लियर करिन। पर फाइनल लिस्ट म नाम नइ आ पाइस। तभो ले स्वाति हिम्मत नइ हारिस। मेहनत अउ लगन ले निरंतर प्रयास करत रहिन। अंततः 2020 म बार्क म चयनित होइस। स्वाति बताथे कि बार्क म सबसे मुश्किल काम होथे इंटरव्यू के। इहाँ आपके ब्रांच के अनुसार ही आप ले कठिन विषय के बारे म गहराई ले सवाल पूछे जाथे।

अइसे हे ओकर परिवारिक बैकग्राउंड

तिल्दा के खरोरा ले लगे ईल्दा गांव म स्वाति के परिवार खेती किसानी के कार्य करथे। ओकर पिता दिनेश कुमार साहू बालोद जेल म प्रहरी हे। माता जी उतरा साहू गृहिणी हे। ओला बचपन ले ही ओकर मामा हेमलाल साहू अउ दीदी डॉक्टर नेहा साहू ह प्रेरित करत रहिन। ओकर दोस्त मन घलो संघर्ष के सफर म ओकर पूरा सपोर्ट करिन। बड़े पिताजी रमेश कुमार साहू गांव म खेती किसानी संभालथे। येकर संयुक्त परिवार हे। दीदी डॉ. नेहा साहू हे। भाई अमन साहू कॉलेज के पढ़ाई करथे। 


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