वक्त आ गया है... मुख्यमंत्री को अब अपने लोगो के लिए सौ प्रतिशत देना ही होगा


वक्त आ गया है... मुख्यमंत्री को अब अपने लोगो के लिए सौ प्रतिशत देना ही होगा
  02/05/2021  


नवीन देवांगन ।। रायपुर

चलो राहत कि बात यह है कि चुनाव खत्म हो गए हे, देश इस समय बेहद विपदा के दौर से गुजर रहा है सभी दो मई का ब्रेसब्री इंतजार या कहे जल्द गुजर जाने का इंतजार कर रहे थे लो कुछ घंटो में यह भी गुजर ही जाएगा, इस गुजरते लम्हें के साथ देश के सामने कई कठिनाईयां, जिम्मेदारियां और बढ़ती ही जाएगी, अब उम्मीद कर ही सकते है कि आक्सीजन के कमी से शायद किसी की मौत न हो विश्वगुरु गर इतना नहीं कर पाऐगा तो बाकि सब बाते फिर बेमानी ही है।
असम चुनाव और परिणामों के साथ ही छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी अब थोड़ा फ्री और हल्का महसूस कर रहे होगें यहां परिणाम जो भी हो हमेशा एक की हार होती है एक की जीत उस पर कभी और चर्चा की जा सकती है, भूपेश बघेल ने पूरे चुनाव के दौरान वहीं किया जो हर किसी पार्टी के बड़े चेहरे को मौका मिलने पर करना पड़ता है, इसमे कुछ भी अप्रत्याशित नहीं था, अब दाऊ को छत्तीसगढ़ के हालात में पूरी तरह क्रेंदित होना होगा क्योंकि यहां के जनता ने उन पर विश्वास करते हुए बहुमत के साथ प्रदेश की कमान सौंपी है, कोरोना काल से कराह रहे छत्तीसगढ़ के दू:खों पे अब मुख्यमंत्री को मरहम लगाना ही होगा, प्रदेश कि जनता अपने मुखिया कि ओर इस आपदा भरे समय में मुंह ताके लाचार खड़ी हुई देख रही है निश्चित तौर पर चुनाव के चलते मुख्यमंत्री इसमें चूक भी कर गए, पर अभी भी जनता डबडबी आंखों से उम्मीद की किरण जगाए रखी है, अब भी समय है प्रदेशवासीं के सामने आ खड़ा हुआ आपदा रुपी दुखों के पहाड़ को छत्तीसगढ़िया मुख्यमंत्री किसी न किसी तरह से ढ़हाए, अब समय है मुख्यमंत्री को प्रदेश के आवाम के लिए अपना सौ प्रतिशत देना ही होगा, जनता पिछले एक वर्षों से इस आपदा से आदिल आ चूकी है जनता का दम मॉस्क लगाने से ज्यादा विपदा से उपजे आर्थिक संकट से घुट रहा है ऐसे में चुनौतियां मुख्यमंत्री के लिए कमतर नहीं है वैक्सीनेशन, आक्सीजन, दवाईयां, केंद्र से टकराहट, कोविड सेंटरों की संख्या और वहां कि व्यव्स्था कई ऐसे चुनौतियां है जो प्रदेश के मुखिया के सामने मुंह बाये खड़ी है, इसका सामना कर मुखिया प्रदेश कि जनता को कितना राहत दे पाते है यह तो समय के गर्त में है।

विपदा के समय प्रदेश की जनता डरी हुई है खुब डरी हुई है ऐसे समय में उनकी बीमारी का इलाज अच्छी स्वास्थ्य सुविधाएं और दवाईयों से तो किया जा सकता है पर उनके जहन में गहरे बैठ चूके डर को निकालना फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती है जिसमें भी मुख्यमंत्री कही न कही चूक कर ही गए, कारण जनता से संवाद की कमी, कहा जाता है किसी मर्ज के इलाज में दवाई से ज्यादा दो मीठे बोल या सहानुभूति ज्यादा फायदा करती है, इस विपदा में मुख्यमंत्री को जनता से सतत संवाद बनाए रखना चाहिए, लोगो की समस्याएं सुननी चाहिए, उन्हें एक भाई, एक पिता, एक पुत्र ,चाचा, एक मित्र कि तरह संवाद कायम करना चाहिए, लोग डरे हुए है वे  इधर उधर नजर दौड़ा रहे है कि कोई तो हो जो उनकी बात सूने , उनसे दो मीठे बोल ही बोल दे ऐसे में मुख्यमंत्री को अपने प्रचार के तमाम तंत्र को विराम दे रोज जनता के लिए समय निकालना ही चाहिए, इस आपदा में रोज अपने आवाम से बातचीत करना चाहिए, सुझाव देना चाहिए समस्या का निराकरण करना चाहिए, प्यार के दो शब्द बोलने चाहिए,  जनता को अपने मुखिया से यह भी मिल जाए तो बहुत है, नए टेक्नालॉजी के माध्यम से  आजकल अवाम से संवाद करना बहुत ही सरल है इतना तो किया ही जा सकता है कि रोज निश्चित समय पर तमाम सोशल मीडिया के माध्यम से तकनीक का इस्तेमाल करके जनता से संवाद कर सके उनसें इस आपदा से निपटने को लेकर चर्चा, बातचीत कर सके लोगो का दर्द समझ सके, यकीन मानिए आपदा को लेकर बाकि दिगर व्यवस्थाएं को एक तरफ रखिए,  जनता से रोज का संवाद इस आपदा को मानसिक रुप से हराने में लाख गुना मददगार साबित होगा ।


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