छत्तीसगढ़रायपुर संभाग

अशोका बिरयानी के मालिक समेत चार लोगों पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज, देर रात तक धरने में बैठे रहे परिजन,डिप्टी सीएम के आश्वासन के बाद हुआ मामला शांत

राजधानी रायपुर के तेलीबांधा थाना क्षेत्र के अशोका बिरयानी में 2 कर्मचारियों की मौत का मामला 37 घंटे बाद सुलझ गया। होटल में लाश के साथ प्रदर्शन कर रहे मृतकों के परिजनों के बीच आधी रात को गृहमंत्री विजय शर्मा पहुंचे। उन्होंने परिजनों को होटल मालिक समेत प्रबंधन पर सख्त से सख्त कार्यवाई का आश्वासन दिया। पुलिस ने अशोका बिरयानी के मालिक समेत चार लोगों पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज किया है।

इसके अलावा प्रदर्शन खत्म करने की शर्तों के मुताबिक, अशोका बिरयानी प्रबंधन दोनों कर्मचारियों के परिजनों को 15-15 लाख रुपये मुआवजा समेत आजीवन 15-15 हजार रुपए महीने गुजारा भत्ता भी देगा। जिसके बाद परिजन शनिवार सुबह साढ़े 4 बजे के करीब लाश को लेकर अंतिम संस्कार के लिए अपने पैतृक गांव रवाना हो गए।

समझे पूरा मामला
18 अप्रैल के दोपहर 12 बजे के आसपास का है। तेलीबांधा पुलिस को सूचना मिली कि अशोका बिरयानी के मैग्नेटो मॉल के पास वाले ब्रांच में दो कर्मचारियों की मौत हो गई है। शुरुआत में बताया गया कि गटर की सफाई के दौरान कर्मचारी बेहोश हो गए। जब वे काफी देर तक बाहर नहीं आए, तो होटल में काम करने वाले दूसरे कर्मचारी गटर के पास गए। आवाज लगाने पर कोई जवाब नहीं आया। जिसके बाद कुछ अन्य कर्मचारियों को नीचे उतारा गया। उन्होंने गटर में उतरकर दोनों को रस्सी के सहारे बाहर निकाला।

पुलिस टीम मौके पर पहुंची और दोनों कर्मचारियों नीलकमल पटेल और डेविड साहू को तेलीबांधा के निजी हॉस्पिटल लाया गया। यहां जांच के बाद डॉक्टरों ने दोनों को मृत घोषित कर दिया। जिसके बाद शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया।

विधायक भी मृतकों के परिजनों के साथ धरने पर बैठे
मृतकों के परिजन और समाज के लोग न्याय की मांग करते हुए दोनों कर्मचारियों के शवों को रेस्टोरेंट के बाहर रखकर धरना प्रदर्शन कर रहे है. इस बीच मौके पर उनका समर्थन करने पहुंचे बीजेपी विधायक मोतीलाल साहू भी मृतकों के परिजनों के साथ धरने पर बैठ गए है. उन्होंने पुलिस को दो टूक कहा है कि ”जब तक प्रबंधक गिरफ़्तार नहीं होगा और मुआवजा नहीं मिलेगा, मैं यही पर बैठे रहूंगा.”

विधायक मोतीलाल साहू ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जाहिर की और कहा- पुलिस का कहना है कि प्रबंधक का फ़ोन बंद है इससे बड़ा और क्या दुर्भाग्य हो सकता है. मृतकों के पीड़ित परिजन 38 घंटे से लाश को लेकर यहां धरने पर बैठे हैं. अब तक तो पूरे परिसर में बुल्डोजर चल जानी थी. उन्होंने कहा कि जितने भी शहर में अशोका बिरियानी नाम से इनके ब्रांच चल रहे है उसको तत्काल सील किया जाए. मैं जब तक यहां से नहीं उठूंगा तब तक प्रबंधक को गिरफ़्तार नहीं किया जाता औऱ पीड़ितों को मुआवज़ा नहीं मिल जाता.

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