Premanand Maharaj: जीवन में सुख-शांति चाहते हैं तो इन 4 बातों को रखें सीक्रेट, प्रेमानंद महाराज ने दी सलाह

Premanand Maharaj: लाइफ में सुख, शांति और सुरक्षा बनाए रखने के लिए समझदारी बहुत ज़रूरी होती है. जब भी हम अपने जीवन में नई ऊंचाइयों को हासिल करते हैं, तो उसे जल्द ही सबके सामने पेश करने लगते हैं, जो कि नुकसान पहुंचा सकता है. वहीं छोटी-सी गलती भी आपके प्रति जलन, नुकसान या रिश्तों में दूरियां पैदा कर सकती है. इसलिए कहा जाता है कि ज़िंदगी से जुड़ी कुछ अहम बातें प्राइवेट ही रखनी चाहिए और किसी के साथ शेयर करने से बचना चाहिए. इसी विषय पर एक भक्त ने भारी दरबार में प्रेमानंद महाराज से सवाल किया कि भजन, भोजन, खजाना और यारी को परदे में रखने की सीख क्यों दी जाती है.
प्रेमानंद महाराज क्या सलाह देते हैं?
प्रेमानंद महाराज बताते हैं कि ऐसी बातों को सबके सामने कहने से जीवन पर बुरी नजर लग जाती है.
नजर लगने के बाद नुकसान होने लगता है और चीजें हाथ से निकलने लगती हैं.
महाराज उदाहरण देते हुए कहते हैं कि अगर आपके पास इस समय 10 लाख रुपये हों और आप यह बात लोगों को बता दें, तो ज्यादा देर तक वह पैसा आपके पास टिक नहीं पाएगा.
कोई न कोई व्यक्ति किसी न किसी तरीके से वह धन आपसे छीनने की कोशिश करेगा.
इसके अलावा, वह आपसे ईर्ष्या भी करने लगेगा.
इन बातों का भी ध्यान रखें
इसके बाद प्रेमानंद महाराज कहते हैं कि भजन भी बिल्कुल उसी तरह होता है.
भजन हमारी निजी साधना है और उसकी एक मर्यादा होती है.
इसलिए उसे दिखावे का विषय नहीं बनाना चाहिए.
जिस तरह धन को छुपाकर रखा जाता है, उसी तरह अपने प्रेम को भी संभालकर रखना चाहिए.
अगर इन चीजों को खुलेआम दिखाया गया, तो ये धीरे-धीरे कमजोर हो जाती हैं.
अपने ईष्ट के प्रति प्रेम को हमेशा मन में ही संजोकर रखना चाहिए. किसी के सामने पेश नहीं करना चाहिए.
महाराज बताते हैं कि ज्ञान, अनुभव और समझ जितनी छुपाकर रखी जाए, उतनी ही बढ़ती है.
लेकिन अगर इन्हें हर जगह दिखा दिया जाए, तो सब कुछ नष्ट हो जाता है.
प्रेमानंद महाराज का अनुभव क्या कहता है?
प्रेमानंद महाराज आगे बताते हैं कि उनके अनुभव के अनुसार, अपनी साधना को हमेशा गुप्त रखना चाहिए. अपनी रोज़मर्रा की आध्यात्मिक दिनचर्या को भी सबके सामने प्रकट नहीं करना चाहिए. इसके अलावा, जो भजन आप करते हैं, उसके बारे में दूसरों को पता न चले तो वही भजन फल देता है. जब आपकी पवित्र दिनचर्या निजी रहती है, तभी साधना में स्थिरता और प्रभाव बना रहता है. महाराज कहते हैं कि जिस तरह हम अपने धन को संभालकर और छुपाकर रखते हैं, उसी तरह अपने भजन और साधना को भी गुप्त रखना ही सबसे सही मार्ग है.






