धान खरीदी की मियाद आगे बढ़ाने पर विचार कर सकती है सरकार – सीएम साय

छत्तीसगढ़ में धान खरीदी का सीजन खत्म होते ही सियासत का पारा चढ़ गया है। एक तरफ सरकार रिकॉर्ड तोड़ खरीदी का दावा कर रही है, तो दूसरी तरफ विपक्ष और किसानों ने मोर्चा खोल दिया है।
सरकार का दावा : 140 लाख मीट्रिक टन की ‘बंपर’ खरीदी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धान खरीदी प्रक्रिया संपन्न होने पर संतोष व्यक्त किया है। उन्होंने इसे सरकार की एक बड़ी उपलब्धि बताया है।सीएम ने बताया कि प्रदेश में लगभग 140 लाख मीट्रिक टन धान की खरीदी की जा चुकी है।सरकार का कहना है कि ढाई महीने तक चली इस प्रक्रिया में हर संभव कोशिश की गई कि कोई भी किसान वंचित न रहे।मुख्यमंत्री ने कहा कि जिन किसानों की समस्याएं सामने आ रही हैं, उनका डेटा जुटाया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर सरकार आगे उचित निर्णय लेगी।
धरातल पर घमासान: “धान बचा है, तारीख बढ़ाओ”
भले ही सरकारी पोर्टल बंद हो गए हों, लेकिन रायपुर, महासमुंद और कवर्धा जैसे इलाकों से विरोध की खबरें आ रही हैं। किसानों का आरोप है कि उनका धान अभी भी खलिहानों में पड़ा है।महासमुंद और कवर्धा में किसानों ने चक्काजाम कर प्रदर्शन किया। उनका कहना है कि वे अभी अपना पूरा धान नहीं बेच पाए हैं। किसान संगठनों और कांग्रेस ने धान खरीदी की अंतिम तिथि (Last Date) बढ़ाने की मांग की है।
लक्ष्य से कम खरीदी – दीपक बैज
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार के जश्न पर सवाल उठाते हुए तीखा हमला बोला है।बैज का आरोप है कि सरकार ने अपने लक्ष्य से करीब 25 लाख मीट्रिक टन कम धान खरीदा है।कांग्रेस का दावा है कि ‘एग्री स्टैक पोर्टल’ की जटिलताओं के कारण 5 लाख से ज्यादा किसान अपना रजिस्ट्रेशन ही नहीं करा पाए।विपक्ष ने कहा कि सरकार ने केवल 53 दिनों तक सक्रिय रूप से खरीदी की, जो किसानों के साथ भद्दा मजाक है।
कांग्रेस का भी धान हमने ही खरीदा – दयालदास बघेल
कांग्रेस के आरोपों पर खाद्य मंत्री दयालदास बघेल ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि”हमने 139 लाख मीट्रिक टन से अधिक की पारदर्शी खरीदी की है। बारदाना या पेमेंट की कोई समस्या नहीं आई। कांग्रेस नेताओं का धान भी इसी सरकार ने खरीदा है, वे सिर्फ राजनीति चमकाने के लिए बदनाम कर रहे हैं।
महासमुंद जिले में किसानों ने किया चक्काजाम
छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के तेन्दूकोना में किसानों ने चक्काजाम कर दिया है। सत्यापन के बाद भी धान नहीं बेच पाने से परेशान होकर आक्रोशित किसानों ने 30 ट्रैक्टर पर धान लेकर सड़क पर बैठ गए। पुलिस द्वारा रोके जाने पर किसान रास्ते में ही धरना पर बैठ गए। प्राथमिक कृषि साख समिति राजाडे़रा के सात गांव के लगभग 90 किसानो का धान नहीं बिका है।

मिली जानकारी के अनुसार, 7 गांवों के 90 किसानो का राजाडे़रा सहकारी समिति के किसानों का धान नहीं बिका। जिसके बाद वे ट्रैक्टरों का काफिला लेकर तहसील कार्यालय पहुंचे। रास्ते में पुलिस ने रोका तो बीच सड़क पर ही शुरू धरना हुआ। किसानों कहना है कि, यह आर-पार की जंग है। एक भी बार हमारी धान का टोकन नहीं कटा है और जब तक धान नहीं बिकेगा, तब तक घर नहीं जाएंगे।






