विपक्ष ने कर दी ऐसी माँग मुख्यमंत्री समेत सभी मंत्री कैबिनेट की बैठक छोड़कर भागते हुए पहुंचे सदन


छत्तीसगढ़ विधानसभा में मंगलवार को डिप्टी सीएम विजय शर्मा के विभागों की अनुदान मांगों पर चर्चा की गई। चर्चा के बीच विपक्ष ने कटौती प्रस्ताव को लेकर मत विभाजन की मांग कर दी, जिसे आसंदी ने स्वीकार कर लिया। आसंदी की ओर से मत विभाजन की अनुमति दिए जाने के बाद सदन की गतिविधियां तेज हो गईं। मत विभाजन की सूचना मिलते ही मुख्यमंत्री समेत सभी मंत्री कैबिनेट की बैठक छोड़कर सदन में पहुंच गए। इस घटनाक्रम के बाद विधानसभा में राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई और अनुदान मांगों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।


भूपेश और महंत ने गृहमंत्री को घेरा
इससे पहले भी गृह विभाग की अनुदान मांगों पर चर्चा के दौरान सबसे ज्यादा नोक झोक होती रही। खासतौर पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल गृहमंत्री को घेरने का प्रयास करते रहे। उन्होंने इसी दौरान बलरामपुर में भी अफीम की खेती की बात रख दी। नेता प्रतिपक्ष महंत ने भी केंद्र द्वारा सुरक्षाबलों की तैनाती के बदले केंद्र की ओर से पैसों की मांग की बात उठा दी।
महंत ने केंद्र के पैसे मांगने की बात उठाई
नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत ने कहा- केंद्रीय गृह मंत्रालय में राज्य सरकार को पत्र भेज पैसा मांगा है। प्रदेश में अर्धसैनिक बलों की तैनाती के लिए पैसा माँगा गया है। केंद्र ने छत्तीसगढ़ से 21 हज़ार 530 करोड़ रुपये मांगे हैं। उनहोंने कहा कि, CM साय ने इस राशि को माफ करने के लिए केंद्र को पत्र भी लिखा है। गृह मंत्रालय ने 4 किस्तों में राशि देने की बात कही है। महंत ने पूछा कि, आख़िर राज्य सरकार यह राशि किस बजट से देगी? उन्होंने कहा कि, UPA सरकार में केंद्र से राशि नहीं माँगी जाती थी।
शून्यकाल में गूंजा धान खरीदी का मुद्दा
खरीदी केंद्रों में कथित चोरी और भ्रष्टाचार के आरोपों को लेकर जोरदार हंगामा देखने को मिला। विपक्ष ने शून्यकाल के दौरान इस मामले को उठाते हुए स्थगन प्रस्ताव पेश किया, लेकिन विधानसभा अध्यक्ष ने इसे अस्वीकार कर दिया। इसके बाद विपक्षी विधायक नाराज हो गए और सदन के भीतर नारेबाजी करते हुए जोरदार विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। विरोध करते हुए सदन के बेल तक पहुंच गए। लगातार शोर-शराबे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हो गई। सभापति ने लगभग 30 विपक्षी विधायकों को निलंबित कर दिया।
फिटनेस और ओवरलोडिंग के मुद्दे पर भी हंगामा
वहीं प्रश्नकाल के दौरान विधानसभा में वाहनों की फिटनेस और ओवरलोडिंग के मुद्दे पर भी बहस और हंगामा हुआ। विधायक ओंकार साहू ने बीते तीन सालों में व्यावसायिक वाहनों को जारी किए गए फिटनेस प्रमाणपत्रों की जिलेवार जानकारी मांगी। इस पर मंत्री केदार कश्यप ने जवाब देते हुए बताया कि-ओवरलोडिंग, बिना परमिट और बिना बीमा के संचालन के कुल 77 हजार 810 मामले दर्ज किए गए हैं। इन मामलों से लगभग 42 करोड़ रुपये की वसूली की गई है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बिना परीक्षण के किसी भी वाहन को फिटनेस प्रमाणपत्र जारी नहीं किया गया है। हालांकि मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्ष ने हंगामा किया।








