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बिलासपुर: साहित्यकार के अपमान के बाद कुलपति का बड़ा एक्शन, खुद को बचाने के लिए HOD डॉ. गौरी त्रिपाठी को पद से हटाया

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर स्थित गुरु घासीदास केंद्रीय विश्वविद्यालय (GGU) में साहित्यकार के अपमान का मामला अब और गहरा गया है। राष्ट्रीय परिसंवाद के दौरान हुए विवाद के बाद, कुलपति प्रोफेसर आलोक चक्रवाल ने सारा दोष विभाग पर मढ़ते हुए हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. गौरी त्रिपाठी को उनके पद से हटा दिया है। उनकी जगह असिस्टेंट प्रोफेसर रमेश गोहे को नया विभागाध्यक्ष (HOD) नियुक्त किया गया है।

जाने क्या हुआ था 7 जनवरी को ?
विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग द्वारा ‘समकालीन हिंदी कहानी’ विषय पर एक राष्ट्रीय परिसंवाद का आयोजन किया गया था। इस गरिमामय कार्यक्रम में मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और ओडिशा सहित देशभर के जाने-माने साहित्यकार और प्रोफेसर शामिल हुए थे।

संबोधन के दौरान कुलपति आलोक चक्रवाल विषय से भटककर अपने निजी जीवन, गुजराती और बनारसी अनुभवों तथा अपनी उपलब्धियों का बखान करने लगे। काफी समय तक व्यक्तिगत कहानियाँ सुनने के बाद वहां मौजूद साहित्यकार असहज होने लगे।

कुलपति ने जब वरिष्ठ साहित्यकार मनोज रूपड़ा से पूछा कि “क्या आप बोर हो रहे हैं?”, तो रूपड़ा ने सहज भाव से कहा, “मुद्दे की बात हो तो बेहतर होगा।” इस बात पर कुलपति भड़क गए और पद की गरिमा के विपरीत व्यवहार करते हुए कहा, “आप बहुत बड़े विद्वान बन रहे हो, आपको तमीज नहीं कि वाइस चांसलर से कैसे बात करते हैं?” इसके तुरंत बाद उन्होंने मनोज रूपड़ा को सभा से बाहर जाने का आदेश दे दिया।

सामूहिक बहिष्कार और विरोध
कुलपति के इस अलोकतांत्रिक रवैये को देखकर सभा में सन्नाटा पसर गया। जब अन्य प्रोफेसरों और साहित्यकारों ने इस व्यवहार का विरोध किया, तो कुलपति ने उन्हें भी बाहर जाने की चुनौती दे दी। इसके विरोध में सभा में मौजूद अधिकांश साहित्यकारों और बुद्धिजीवियों ने कार्यक्रम का बहिष्कार कर दिया और सभाकक्ष से बाहर निकल गए।

साहित्यकारों में आक्रोश: हटाने की मांग
इस घटना से देश भर के और स्थानीय साहित्यकार, कथाकार और लेखक बेहद नाराज हैं। इस घटना को लेकर व्यापक विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है लेखकों और बुद्धिजीवियों ने कलेक्टर के माध्यम से राष्ट्रपति और राज्यपाल को ज्ञापन भेजकर कुलपति को तत्काल पद से हटाने की मांग की है।

साहित्यकारों का कहना है कि कुलपति ने न केवल एक अतिथि का अपमान किया है, बल्कि एक राष्ट्रीय शैक्षणिक मंच की गरिमा को भी ठेस पहुँचाई है। यदि कुलपति पर कार्रवाई नहीं होती है, तो साहित्यकारों ने बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।

विभागाध्यक्ष पर गिरी गाज
इस पूरे मामले में जब कुलपति की चौतरफा आलोचना होने लगी, तो उन्होंने प्रशासनिक फेरबदल करते हुए डॉ. गौरी त्रिपाठी को हटा दिया। जानकारों का मानना है कि यह कार्रवाई अपनी छवि बचाने और विवाद का ठीकरा विभाग पर फोड़ने के उद्देश्य से की गई है।

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news36Desk

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