छत्तीसगढ़

Raipur News : अब कमिश्नर को अल्फा, एडिशनल सीपी को डेल्टा, डीसीपी को विक्टर, एडिशनल डीसीपी को माइक, एसीपी को चार्ली और थाना प्रभारी को कोड सिगमा

छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के लिए 23 जनवरी 2026 का दिन मील का पत्थर साबित होने जा रहा है। राज्य शासन द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, रायपुर में कल से ‘पुलिस कमिश्नरी सिस्टम’ (RDPCS) लागू कर दिया जाएगा। रायपुर इस प्रणाली को अपनाने वाला प्रदेश का पहला जिला बनेगा।

इस महत्वपूर्ण बदलाव और नई व्यवस्था की विस्तृत जानकारी नीचे दी गई है:

रायपुर में पुलिस कमिश्नरी सिस्टम: प्रशासनिक ढांचा और नई व्यवस्था

अब तक रायपुर में कानून व्यवस्था की कमान एसपी (SP) के हाथ में होती थी, लेकिन अब आईजी (IG) स्तर के अधिकारी ‘पुलिस आयुक्त’ (Police Commissioner) के रूप में जिले की कमान संभालेंगे। इस प्रणाली के तहत पुलिस को दंडाधिकारी (Magisterial) शक्तियां भी प्राप्त होंगी।

1. थानों का नया विभाजन

कमिश्नरी सिस्टम के तहत रायपुर को दो मुख्य हिस्सों—शहर और ग्रामीण में बांटा गया है:

  • RDPCS (शहर): कुल 21 थानों को सीधे पुलिस कमिश्नर के नियंत्रण में रखा गया है। इसमें सिविल लाइन, कोतवाली, तेलीबांधा, उरला (निगम क्षेत्र), और खमतराई जैसे प्रमुख थाने शामिल हैं।
  • ग्रामीण क्षेत्र: शेष 12 थानों (जैसे आरंग, अभनपुर, तिल्दा नेवरा, नवा रायपुर) की जिम्मेदारी ग्रामीण एसपी के पास रहेगी।

2. तीन जोन में बंटा शहर

बेहतर प्रबंधन के लिए शहर को तीन पुलिस क्षेत्रों में विभाजित किया गया है:

  1. रायपुर मध्य
  2. रायपुर उत्तर
  3. रायपुर पश्चिम

3. पदों के नाम में बदलाव

नई व्यवस्था के साथ ही पुलिस अधिकारियों के पदनाम भी बदल जाएंगे:

  • अब CSP (नगर पुलिस अधीक्षक) को ACP (असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस) कहा जाएगा।
  • ASP स्तर के अधिकारी अब एडिशनल डीसीपी (Addl. DCP) के रूप में पहचाने जाएंगे।

प्रशासनिक संरचना और अधिकारियों की तैनाती

रायपुर में सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए कुल 07 आईपीएस (IPS) अधिकारियों सहित बड़ा अमला तैनात होगा:

पदसंख्यास्तर
पुलिस कमिश्नर01IG स्तर
एडिशनल सीपी01DIG स्तर
डीसीपी (DCP)05SP स्तर
एडिशनल डीसीपी09ASP स्तर
एसीपी (ACP)21DSP स्तर

पहचान के लिए नए ‘रेडियो कोड’

कमिश्नरी सिस्टम में संवाद को प्रभावी बनाने के लिए अधिकारियों को विशेष कोड नेम दिए गए हैं:

  • कमिश्नर: अल्फा (Alpha)
  • एडिशनल सीपी: डेल्टा (Delta)
  • डीसीपी: विक्टर (Victor)
  • एडिशनल डीसीपी: माइक (Mike)
  • एसीपी: चार्ली (Charlie)
  • थाना प्रभारी (TI): सिगमा (Sigma)

महत्व: रायपुर का यह मॉडल भोपाल कमिश्नरी की तर्ज पर तैयार किया गया है। इससे न केवल अपराध नियंत्रण में तेजी आएगी, बल्कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस को त्वरित निर्णय लेने के अधिकार भी मिलेंगे।

क्या है पुलिस कमिश्नर प्रणाली कैसे काम करता है

बड़े महानगरों की तर्ज पर लागू की गई पुलिस कमिश्नर प्रणाली (Police Commissionerate System) कानून-व्यवस्था को सुधारने का एक सशक्त प्रशासनिक ढांचा है।

साधारण शब्दों में कहें तो, इस सिस्टम में पुलिस को निर्णय लेने के लिए कलेक्टर या एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट पर निर्भर नहीं रहना पड़ता। आइए समझते हैं कि यह कैसे काम करता है और सामान्य व्यवस्था से कितना अलग है:


1. कमिश्नर प्रणाली और सामान्य प्रणाली में अंतर

विशेषतासामान्य जिला व्यवस्था (SP System)कमिश्नर प्रणाली (RDPCS)
सर्वोच्च पदजिला मजिस्ट्रेट (DM/कलेक्टर) के पास मुख्य शक्तियां होती हैं।पुलिस कमिश्नर (CP) सर्वेसर्वा होता है।
निर्णय प्रक्रियालाठीचार्ज या धारा 144 लागू करने के लिए DM की अनुमति चाहिए।कमिश्नर खुद ये आदेश जारी कर सकता है।
शक्तियांपुलिस केवल जांच और गिरफ्तारी करती है।पुलिस के पास मजिस्ट्रियल पावर (न्यायिक शक्तियां) होती हैं।
अधिकारी का स्तरजिले का मुखिया SP (कैप्टन) होता है।जिले का मुखिया IG या उससे ऊपर का अधिकारी होता है।

2. यह कैसे काम करता है?

कमिश्नरी सिस्टम लागू होने के बाद पुलिस को ‘ड्युअल कमांड’ (दोहरा नियंत्रण) से मुक्ति मिल जाती है।

मजिस्ट्रियल शक्तियां (Magisterial Powers)

अब तक जो शक्तियां जिला कलेक्टर के पास होती थीं, वे अब पुलिस कमिश्नर और उनके अधीनस्थ अधिकारियों (DCP, ACP) को मिल जाती हैं:

  • धारा 144 लागू करना: अशांति की स्थिति में पुलिस तुरंत निषेधाज्ञा लागू कर सकती है।
  • निवारक नजरबंदी (Preventive Detention): शांति भंग करने की आशंका में किसी को हिरासत में लेने का अधिकार।
  • लाइसेंस जारी करना: हथियार (Arms License), होटल, बार और लाउडस्पीकर के उपयोग की अनुमति अब सीधे पुलिस विभाग देगा।
  • जिला बदर (Externment): अपराधियों को शहर से बाहर निकालने का आदेश पुलिस कमिश्नर दे सकेंगे।

त्वरित कार्रवाई (Quick Response)

चूंकि फाइलें मंजूरी के लिए कलेक्टर कार्यालय नहीं जातीं, इसलिए दंगे, विरोध प्रदर्शन या किसी भी आपातकालीन स्थिति में पुलिस मौके पर ही कानूनी आदेश जारी कर तुरंत एक्शन ले सकती है।


3. रायपुर में इसका ढांचा कैसा होगा?

रायपुर में अब अधिकारियों की एक पूरी चेन होगी जो शहर की सुरक्षा संभालेगी:

  1. पुलिस कमिश्नर (अल्फा): पूरी नीति और कानून-व्यवस्था के जिम्मेदार।
  2. डीसीपी (विक्टर): ये जिले के पुराने ‘एसपी’ की तरह अपने जोन (जैसे रायपुर उत्तर या पश्चिम) के इंचार्ज होंगे।
  3. एसीपी (चार्ली): ये फील्ड में थानों के काम की निगरानी करेंगे (पुराने CSP)।
  4. मजिस्ट्रियल कोर्ट: डीसीपी और एडिशनल डीसीपी स्तर के अधिकारी अपनी कोर्ट लगाकर प्रतिबंधात्मक मामलों (जैसे 151, 107/116) की सुनवाई भी कर सकेंगे।
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news36Desk

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