SEX CD कांड का नया चैप्टर : भूपेश को राहत या CBI की आफत ?…क्या छत्तीसगढ़ की राजनीति फिर लेगी यू-टर्न?

छत्तीसगढ़ की राजनीति में ‘मुरदे’ कभी नहीं दफन होते, वो बस सही वक्त का इंतज़ार करते हैं। 2017 का वो सेक्स सीडी कांड, जिसने 15 साल छत्तीसगढ़ की कुर्सी पर काबिज रमन सिंह की सत्ता हिला दी थी और भूपेश बघेल को ‘जननायक’ बना दिया था… वो जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर आ गया है।
मार्च 2025 में जिस भूपेश बघेल को CBI कोर्ट ने क्लीन चिट दे दी थी, अब उसी राहत के खिलाफ CBI ने रायपुर सेशन कोर्ट में दोबारा दस्तक दी है। लेकिन कांग्रेस भी चुप बैठने वालों में से नहीं है। अब यह जंग छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट की दहलीज तक पहुँच चुकी है।
रायपुर सेशन कोर्ट ने 24 जनवरी को CBI की लोअर कोर्ट के फैसले को निरस्त कर रिव्यू पिटिशन मंजूर कर लिया है। केस की पहली सुनवाई 23 फरवरी 2026 को होगी। रायपुर सेशन कोर्ट ने भूपेश बघेल को नियमित कोर्ट में पेश होने के निर्देश दिए हैं। वहीं सेशन कोर्ट के फैसले के बाद भूपेश बघेल ने कहा कि यह राजनीतिक प्रतिशोध है। अदालत में सच्चाई सामने आएगी। हम लड़ेंगे और जीतेंगे।
कहानी शुरू हुई थी अक्टूबर 2017 में। एक कथित अश्लील सीडी, एक भाजपा नेता की शिकायत और दिल्ली से पत्रकार विनोद वर्मा की गिरफ्तारी। पुलिस का दावा था कि सीडी ब्लैकमेलिंग के लिए बनाई गई। तब के प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल जेल गए, जमानत लेने से मना कर दिया और नारा गूंजा— “मैं भी भूपेश हूँ।” इसी कांड ने 15 साल की भाजपा सरकार के खिलाफ वो माहौल बनाया कि 2018 में कांग्रेस ने 68 सीटों के साथ ऐतिहासिक जीत दर्ज की। लेकिन आज, करीब 8 साल बाद… कानूनी पेंच फिर से कस रहे हैं।
सितंबर 2018 में, तत्कालीन कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष भूपेश बघेल और विनोद वर्मा को एक CD स्कैंडल के सिलसिले में पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया था। इससे राज्य की राजनीति में हलचल मच गई थी, क्योंकि विधानसभा चुनाव सिर्फ 3 महीने दूर थे। भूपेश बघेल ने जमानत लेने से इनकार कर दिया था। यह उनके राजनीतिक करियर में एक टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने BJP के खिलाफ सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया, जो पिछले 15 सालों से लगातार चुनाव जीत रही थी।
हर पोस्टर पर यह नारा लिखा था कि मैं भी भूपेश हूं। पूरे राज्य के गांवों और शहरों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। कुछ दिनों बाद, भूपेश जेल से रिहा हो गए। इसके बाद, कांग्रेस पार्टी ने विधानसभा चुनावों में शानदार जीत हासिल की और 68 सीटें जीतीं। कहा जाता है कि भूपेश बघेल के नेतृत्व में कांग्रेस बीजेपी विरोधी माहौल बनाने में सफल रही। CD स्कैंडल में भूपेश के खिलाफ की गई कार्रवाई को राज्य की राजनीति में एक टर्निंग पॉइंट माना जाता है।
सवाल उठता है कि जब विशेष अदालत ने कह दिया कि मुकदमा चलाने का कोई ठोस आधार नहीं है, तो CBI इसे दोबारा क्यों कुरेद रही है? कांग्रेस इसे ‘न्यायिक दुरुपयोग’ कह रही है, जबकि CBI का कहना है कि जांच के कुछ बिंदु अभी भी अधूरे हैं।
इस केस में सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि कई दर्दनाक मोड़ भी आए। आरोपी रिंकू खनूजा की खुदकुशी ने इस मामले को और भी रहस्यमयी बना दिया था। अब जबकि विनोद वर्मा और कैलाश मुरारका की डिस्चार्ज याचिका खारिज हो चुकी है, भूपेश बघेल के लिए हाईकोर्ट का रास्ता ही आखिरी उम्मीद है।
क्या 2026 की दहलीज पर खड़ा छत्तीसगढ़ फिर से उसी पुरानी सीडी के शोर में डूबेगा? क्या भूपेश बघेल को हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिलेगी, या CBI के नए वार से कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ेंगी? न्याय और राजनीति के इस खेल पर हमारी नजर बनी रहेगी। बने रहिए news36 के साथ






