भिलाई निगम कंगाल, पार्षद के हाथ में कटोरा: डीजल के लिए मंदिर के सामने मांगनी पड़ी भीख!

भिलाई। छत्तीसगढ़ का भिलाई की नगर सरकार इन दिनों पाई-पाई को मोहताज है। हालात इतने बदतर हो चुके हैं कि निगम की गाड़ियों में डीजल डलवाने तक के लिए फंड नहीं बचा है। इस प्रशासनिक विफलता और जनता की परेशानी को देखते हुए पार्षदों ने विरोध का एक अनोखा और गांधीवादी रास्ता अख्तियार किया है।
मंदिर के बाहर ‘भीख’ मांगकर जताया विरोध
भिलाई नगर निगम के पार्षद संतोष मौर्या अपने समर्थकों के साथ मंदिर के सामने भीख मांगने बैठ गए। हाथ में कटोरा और चेहरे पर लाचारी लिए पार्षदों ने आने-जाने वाले श्रद्धालुओं से डीजल के लिए पैसे मांगे। उनका कहना है कि निगम प्रशासन हाथ खड़े कर चुका है, ऐसे में जनता की समस्याओं को हल करने के लिए अब ‘भीख’ ही आखिरी रास्ता बचा है।
शादी के घर में पसरा सन्नाटा: टैंकरों के पहिए थमे
इस फंड की कमी का सबसे मार्मिक असर उन परिवारों पर पड़ रहा है जिनके यहाँ मांगलिक कार्य हैं। डीजल न होने के कारण निगम के पानी टैंकर खड़े हो गए हैं। बताया जा रहा है कि एक शादी समारोह में पानी का टैंकर समय पर नहीं पहुंच सका, जिससे मेहमानों और मेजबानों को भारी किल्लत का सामना करना पड़ा। कचरा गाड़ियां और अन्य आवश्यक सेवाएं भी इस ‘डीजल संकट’ की वजह से धीरे-धीरे दम तोड़ रही हैं। पार्षद संतोष मौर्या ने चेतावनी दी है कि यह तो बस शुरुआत है। अगर प्रशासन ने जल्द ही डीजल के लिए राशि का इंतजाम नहीं किया, तो हम चुप नहीं बैठेंगे। हम शहर के हर घर में जाएंगे और जनता से एक-एक रुपया भीख मांगेंगे ताकि निगम की गाड़ियां चल सकें और लोगों को पानी मिल सके।
नगर निगम का पक्ष
निगम के गलियारों में चर्चा है कि बकाया भुगतानों और बजट की कमी के कारण वेंडर्स ने डीजल की सप्लाई रोक दी है। हालांकि, अधिकारी जल्द ही व्यवस्था सुधारने का दावा कर रहे हैं, लेकिन धरातल पर पार्षदों का यह ‘भीख आंदोलन’ प्रशासन की पोल खोल रहा है।






