क्या कागजों से निकलकर जमीन पर उतरेगा ₹1.72 लाख करोड़ का सपना? ‘संकल्प’ की कसौटी पर साय सरकार का बजट


छत्तीसगढ़ की राजनीति में इन दिनों आंकड़ों की बाजीगरी और दावों के तीर हवा में तैर रहे हैं। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 1.72 लाख करोड़ रुपए का जो लेखा-जोखा पेश किया है, वह केवल एक वित्तीय दस्तावेज नहीं, बल्कि साय सरकार का विजन 2047′ की ओर बढ़ने का एक महत्वाकांक्षी दांव है। ‘ज्ञान’ और ‘गति’ के बाद अब सरकार ‘संकल्प’ के रथ पर सवार है, लेकिन सवाल वही पुराना है—क्या यह संकल्प जमीन पर उतरकर आम आदमी की जिंदगी में बदलाव लाएगा, या फिर यह भी सियासी शब्दकोश का एक नया ‘जुमला’ बनकर रह जाएगा?
बजट का ‘ब्लूप्रिंट’: उम्मीदों का अंबार
इस बजट की सबसे बड़ी खूबी इसका संतुलित होना दिखती है। एक तरफ जहाँ 22 हजार करोड़ रुपए के साथ शिक्षा को शीर्ष प्राथमिकता दी गई है, वहीं रेल प्रोजेक्ट्स के लिए 47 हजार करोड़ का भारी-भरकम प्रावधान राज्य की अधोसंरचना को बदलने की नीयत दर्शाता है। ‘स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट शाला योजना’ और बेटियों को 18 साल की उम्र में 1.5 लाख रुपए की सहायता जैसी घोषणाएं सीधे तौर पर मध्यम और गरीब वर्ग के दिलों में जगह बनाने की कोशिश हैं।
बजट की प्रमुख प्राथमिकताएं:
शिक्षा- स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट शाला योजना | ₹22,000 करोड़ (कुल विभाग
अधोसंरचना -रेल प्रोजेक्ट्स और द्रुतगामी सड़कें | ₹47,000 करोड़ (रेल)
महिला विकास -बालिकाओं को 18 वर्ष पर आर्थिक सहायता | ₹1.5 लाख प्रति बालिका
तकनीक -मुख्यमंत्री AI और स्टार्टअप मिशन | ₹100-100 करोड़करोड़)
शिक्षा विभाग को मिला सर्वाधिक आवंटन यह दर्शाता है कि सरकार ‘मानव पूंजी’ (Human Capital) पर बड़ा दांव लगा रही है।
स्वामी विवेकानंद उत्कृष्ट शाला योजना (₹100 करोड़): जिस तरह पिछली सरकार ने ‘आत्मानंद स्कूलों’ पर फोकस किया था, साय सरकार अब विवेकानंद के नाम पर स्कूलों को ‘अपग्रेड’ करने की तैयारी में है। यह प्रतिस्पर्धा शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए अच्छी है, बशर्ते यह केवल नाम बदलने तक सीमित न रहे।
उच्च शिक्षा और तकनीक : बजट में मुख्यमंत्री AI मिशन और स्टार्टअप मिशन के लिए जो ₹100-100 करोड़ रखे गए हैं, वे शिक्षा को आधुनिक रोजगार से जोड़ने की कोशिश हैं।
यहाँ सबसे बड़ा सवाल शिक्षकों की भर्ती का है। विपक्ष का आरोप है कि 35,000 पदों की घोषणा तो हुई लेकिन बजट में उनके वेतन और नियुक्ति की स्पष्ट समयसीमा गायब है। बिना शिक्षकों के शानदार बिल्डिंग्स ‘उत्कृष्ट शाला’ कैसे बनेंगी, यह एक बड़ी चुनौती है।
अधोसंरचना: कनेक्टिविटी का नया जाल
अधोसंरचना के मामले में इस बजट ने ‘इतिहास’ रचने की कोशिश की है, खासकर रेल और सड़क के मोर्चे पर।
रेलवे का ‘महा-प्रोजेक्ट’ (₹47,000 करोड़): छत्तीसगढ़ जैसे खनिज प्रधान राज्य के लिए रेल नेटवर्क का विस्तार गेम-चेंजर साबित हो सकता है। यह केवल यात्री सुविधा नहीं, बल्कि लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक माल ढुलाई को तेज कर राज्य की जीडीपी (GSDP) बढ़ाने का जरिया है।
मुख्यमंत्री द्रुतगामी सड़क योजना (₹200 करोड़): शहरों और उद्योगों के बीच की दूरी कम करने के लिए ‘एक्सप्रेस-वे’ कल्चर को बढ़ावा दिया जा रहा है।
राजधानी पैकेज (₹100 करोड़): रायपुर के ट्रैफिक को सुधारने के लिए अलग से बजट का प्रावधान शहरी मतदाताओं और व्यापारियों को साधने की कोशिश है।
बस्तर-सरगुजा का संतुलित विकास: दूरस्थ क्षेत्रों में अधोसंरचना के लिए ₹4000 करोड़ का प्रावधान यह सुनिश्चित करने के लिए है कि विकास केवल रायपुर या दुर्ग तक सीमित न रहे।
सियासी रणभेरी: पक्ष का ‘विकास’ बनाम विपक्ष का ‘विनाश
सत्तापक्ष इस बजट को ‘रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म’ का मंत्र मान रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का विपक्ष पर ‘बुद्धि भ्रष्ट’ होने का प्रहार बताता है कि सरकार अपने रोडमैप को लेकर कितनी आश्वस्त है। बस्तर और सरगुजा जैसे दूरस्थ अंचलों के लिए 4000 करोड़ का ग्रामीण अधोसंरचना बजट निश्चित रूप से समावेशी विकास की गूंज है।
दूसरी ओर, विपक्ष (कांग्रेस) के तेवर तल्ख हैं। दीपक बैज का इसे “झूठ का पुलिंदा” कहना स्वाभाविक राजनीतिक प्रतिक्रिया हो सकती है, लेकिन उनके द्वारा उठाए गए सवाल—जैसे 35 हजार शिक्षकों की रुकी हुई भर्ती और संविदा कर्मचारियों की अनदेखी—सीधे तौर पर प्रदेश के युवाओं के आक्रोश को हवा देते हैं। ‘गति’ और ‘ज्ञान’ बजट के पिछले अनुभवों को आधार बनाकर विपक्ष जनता के बीच सरकार की विश्वसनीयता पर चोट कर रहा है।
विपक्ष का पेंच: यहाँ सबसे बड़ा सवाल शिक्षकों की भर्ती का है। विपक्ष का आरोप है कि 35,000 पदों की घोषणा तो हुई लेकिन बजट में उनके वेतन और नियुक्ति की स्पष्ट समयसीमा गायब है। बिना शिक्षकों के शानदार बिल्डिंग्स ‘उत्कृष्ट शाला’ कैसे बनेंगी, यह एक बड़ी चुनौती है।
सरकार का ‘संकल्प’ – धरातल की ‘चुनौती’
शिक्षा -स्कूलों का आधुनिकीकरण और AI पर जोर। | रिक्त पदों को भरना और संविदा कर्मियों का समाधान।
अधोसंरचना – ₹47,000 करोड़ के रेल प्रोजेक्ट्स। | भूमि अधिग्रहण की जटिलताएं और वन क्षेत्रों में क्लीयरेंस।
शहरी विकास -‘आदर्श शहर’ और राजधानी पैकेज। | पुराने बुनियादी ढांचे का बोझ और बढ़ता प्रदूषण।
यह बजट “कैपिटल एक्सपेंडिचर” (पूंजीगत व्यय) पर केंद्रित है। यानी सरकार पैसा वहाँ लगा रही है जहाँ से भविष्य में रिटर्न मिले (जैसे सड़कें, रेल, और शिक्षा)।
लेकिन, इसमें एक ‘कैच है। इतने बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए फंड का प्रबंधन (Financial Management) कैसे होगा? क्या राज्य पर कर्ज का बोझ बढ़ेगा? विपक्ष इसी ‘वित्तीय गणित’ पर सवाल उठा रहा है। यदि ये प्रोजेक्ट्स समय पर पूरे होते हैं, तो छत्तीसगढ़ वास्तव में ‘विकसित भारत’ की दौड़ में अग्रणी होगा, वरना ये केवल कागजी संकल्प बनकर रह जाएंगे।
बजट में AI मिशन, पर्यटन मिशन और स्टार्टअप मिशन के लिए 100-100 करोड़ के आवंटन आधुनिक छत्तीसगढ़ की तस्वीर तो पेश करते हैं, लेकिन क्या छत्तीसगढ़ का ग्रामीण ढांचा इन हाई-टेक योजनाओं के लिए तैयार है? 23 नए उद्योगों और एयरपोर्ट्स पर शोरूम की बात सुनने में आकर्षक है, पर इनके क्रियान्वयन की गति ही तय करेगी कि यह बजट ‘आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़’ बनाएगा या कर्ज के बोझ को और बढ़ाएगा।








