छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती की आई बहार, अब इस जिले में फिर पकड़ में आया लहलहाती फसल


छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में इन दिनों ‘लाल फूलों’ की खेती पुलिस की नींद उड़ाए हुए है। ऐसा लग रहा है जैसे जिले में टमाटर या ककड़ी नहीं, बल्कि अफीम उगाने की होड़ मची है। लैलूंगा में पकड़े गए ताजा मामले ने अब सियासी गलियारों में भी ‘नशे की गर्माहट’ पैदा कर दी है।
लैलूंगा में ‘नशीला स्टार्टअप’: जब खेती बनी अपराध
रायगढ़ के लैलूंगा थाना क्षेत्र में 50 डिसमिल जमीन पर अफीम की लहलहाती फसल देखकर पुलिस भी दंग रह गई। यहाँ ‘नशे की खेती’ का बिजनेस मॉडल कुछ इस तरह चल रहा था


10 डिसमिल खेत में एक किसान ने अफीम के पौधे लगाए
प्रथम दृष्टिया अफीम के पौधों की पुष्टि कर ली गई है। बताया जा रहा है कि, गांव के साधुराम नागवंशी ने 10 डिसमिल खेत में अफीम के पौधे उगाए थे। जांच के लिए ले गई पुलिस की टीम को दो अन्य किसानों के खेत में भी अफीम के पौधे होने की जानकारी मिली।
इन दो किसानों की भी उसी खेत थे पौधे
इसके बाद जांच में गांव के ही दो अन्य किसान जगतराम की 2 डिसमिल और अभिमन्यु नाग की 15 डिसमिल जमीन में अफीम की खेती पाई गई है। फिलहाल, प्रशासनिक टीम मामले की जांच में जुटी हुई है।
रायगढ़ जिले के तमनार क्षेत्र में लहलहा रही फसल
वहीं दुर्ग और बलरामपुर के बाद अब शुक्रवार को रायगढ़ जिले में भी अवैध अफीम की खेती का मामला सामने आया था। तमनार क्षेत्र के आमाघाट इलाके में करीब 70 डिसमिल जमीन पर अफीम की फसल पाई गई है। गांव से दूर जंगल और नदी किनारे की इस जमीन पर गुपचुप तरीके से अफीम की खेती की जा रही थी। ग्रामीणों ने जंगल में पौधे और गुलाबी फूल देखकर शक जताया जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई।
प्रशासन की टीम मौके पर पहुंची
सूचना मिलते ही तमनार पुलिस देर रात मौके पर पहुंची और प्रारंभिक जांच में अफीम की खेती की पुष्टि की गई। इसी दौरान गांव से एक युवक मार्शल सांगा को गिरफ्तार किया गया है। सुबह जिला प्रशासन की टीम भी मौके पर पहुंची और जांच के बाद आधिकारिक पुष्टि की गई। जहां खेती की जा रही थी वह इलाका पूरी तरह सुनसान जंगल के बीच और नदी तट से लगा हुआ है। करीब 70 डिसमिल जमीन को दो हिस्सों में बांटकर खेती की गई थी। एक हिस्से में फसल तैयार होने की स्थिति में थी, जबकि दूसरे में पौधों पर गुलाबी फूल खिले हुए थे।
‘सुशासन’ बनाम ‘अफीम स्टार्टअप’: छिड़ा सियासी युद्ध
जैसे ही अफीम की फसल कटी, सोशल मीडिया पर तंज की फसल भी लहलहा उठी। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने फेसबुक पर चुटकी लेते हुए इसे ‘सुशासन का अफीम स्टार्टअप’ करार दिया। उन्होंने तंज कसा कि लैलूंगा में इस स्टार्टअप की नई ‘ब्रांच’ खुल गई है। अब पुलिस की कार्रवाई के साथ-साथ इस पर राजनीति भी पूरी तेजी से ‘हाइ’ है।
भाजपा का पलटवार, कांग्रेस के समय बना नशे का नेशनल हाई-वे
विपक्ष के आरोपों पर पलटवार करते हुए भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता केएस चौहान ने इसे सुशासन बनाम कुशासन की लड़ाई करार दिया है। भाजपा का दावा है कि कांग्रेस शासनकाल में छत्तीसगढ़ नशे का नेशनल हाई-वे बन गया था और तब शराब से लेकर अन्य नशीले पदार्थों के तस्करों को खुला संरक्षण प्राप्त था।
इसके पहले विधानसभा में भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने तो यहां तक कह दिया कि अफीम की खेती की जड़ें पिछली सरकार के समय से ही जम चुकी थीं।
आंकड़ों की जुबानी : 17 दिन, 5 कांड
छत्तीसगढ़ में अफीम की खेती के मामले अब ‘सिंगल डिजिट’ से निकलकर लंबी लिस्ट बनते जा रहे हैं। पिछले 17 दिनों का रिपोर्ट कार्ड देखें:
| तारीख | स्थान | जिला |
| 07 मार्च | दुर्ग | दुर्ग |
| 10 मार्च | कुसमी | बलरामपुर |
| 12 मार्च | कोरंधा | बलरामपुर |
| 21 मार्च | तमनार | रायगढ़ |
| 23 मार्च | लैलूंगा | रायगढ़|
रायगढ़ जिला अब अफीम तस्करों का नया ‘हॉटस्पॉट’ बनता दिख रहा है। पुलिस के लिए चुनौती यह है कि ये फसलें कोई रातों-रात नहीं उगी हैं, बल्कि सिस्टम की नाक के नीचे सालों से फल-फूल रही थीं








