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बिना ISRO के छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद से निपटना था असंभव, गृह मंत्री विजय शर्मा ने भी माना लोहा

छत्तीसगढ़ में नक्सलाद के ताबूत पर आखिरी कील ठोक दी गई है, 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ नक्सलवाद मुक्त होने की बात लगभग पूरी होने वाली है छत्तीसगढ़ से नक्सलवार को खत्म करने को लेकर राज्य के डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा ने बुधवार को जगदलपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस की. इस दौरान उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ से नक्सलवाद खत्म करने को लेकर इसरो(ISRO) ने अहम रोल निभाया है.

’31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ नक्सलवाद मुक्त हो जाएगा’
छत्तीसगढ़ के उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि राज्य सरकार, केंद्रीय सुरक्षा बलों के संयुक्त प्रयासों से बस्तर संभाग का नक्सलवाद 95 प्रतिशत खत्म हो गया है. केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह की डेड लाइन 31 मार्च 2026 तक सशस्त्र नक्सलवाद पूरी तरह मुक्त हो जाएगा. नक्सलवाद के खत्म होने में इसरो, एनटीआरओ, आईटीबीपी और एनएसजी जैसी संस्थाओं का महत्वपूर्ण योगदान है.

क्या रहा ISRO का रोल
छत्तीसगढ़ में नक्सलवाद के उन्मूलन और सुरक्षा बलों के ऑपरेशनों को प्रभावी बनाने में भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) की तकनीक एक “साइलेंट गेम चेंजर” की भूमिका निभा रही है। घने जंगलों और दुर्गम पहाड़ियों वाले बस्तर जैसे क्षेत्रों में इसरो के उपग्रह सुरक्षा बलों की ‘आंख और कान’ बन गए हैं।

नक्सल विरोधी अभियानों में इसरो का मुख्य योगदान निम्नलिखित क्षेत्रों में है:
रीयल-टाइम सर्विलांस और मैपिंग (RISAT और Cartosat)
इसरो के RISAT (Radar Imaging Satellite)श्रृंखला के उपग्रह सबसे महत्वपूर्ण हैं। इनकी विशेषता यह है कि ये घने बादलों, कोहरे और रात के अंधेरे में भी साफ तस्वीरें ले सकते हैं।

सटीक लोकेशन:
बस्तर के अबुझमाड़ जैसे घने जंगलों में छिपे नक्सली कैंपों की पहचान करने में इन उपग्रहों की इमेजरी का उपयोग होता है।

Cartosat: इसरो के कार्टोसैट उपग्रह उच्च-रिज़ॉल्यूशन (High-Resolution) वाली तस्वीरें प्रदान करते हैं, जिससे सुरक्षा बलों को इलाके की भौगोलिक संरचना (Terrain) समझने में मदद मिलती है।

सुरक्षित संचार (Satellite Communication)
नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में अक्सर मोबाइल टावर नहीं होते या उन्हें नक्सलियों द्वारा क्षतिग्रस्त कर दिया जाता है। ऐसे में इसरो के संचार उपग्रह (GSAT Series) सुरक्षा बलों को अटूट संपर्क प्रदान करते हैं।
SATPONE:सुरक्षा बल सैटेलाइट फोन के जरिए मुख्यालय से जुड़े रहते हैं, जिससे ऑपरेशनों के दौरान सूचनाओं का आदान-प्रदान सुरक्षित तरीके से होता है।

जीआईएस (GIS) और ‘भुवन’ पोर्टल
इसरो का भुवन (Bhuvan)पोर्टल छत्तीसगढ़ पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के लिए एक डिजिटल नक्शे की तरह काम करता है।
रणनीतिक योजना : सुरक्षा बल इस डेटा का उपयोग करके यह तय करते हैं कि कैंप कहाँ स्थापित करना है, एम्बुश (Ambush) से कैसे बचना है और किस रास्ते से जाना सुरक्षित होगा।
इन्फ्रास्ट्रक्चर ट्रैकिंग : जंगलों में बन रही नई सड़कों और पुलों की निगरानी भी सैटेलाइट से की जाती है ताकि विकास कार्यों में बाधा डालने वाली गतिविधियों को रोका जा सके।

अर्ली वार्निंग और मूवमेंट ट्रैकिंग
उपग्रहों के जरिए उन रास्तों की निगरानी की जाती है जिनका उपयोग नक्सली सीमा पार करने (ओडिशा, महाराष्ट्र या तेलंगाना) के लिए करते हैं।
बदलाव का पता लगाना (Change Detection): यदि जंगल के किसी हिस्से में अचानक कोई निर्माण या पेड़ों की कटाई दिखती है, तो इसरो की इमेजरी तत्काल इसकी सूचना देती है, जिससे संभावित नए नक्सली ठिकाने का पता चल जाता है।

गगन (GAGAN) नेविगेशन प्रणाली
इसरो और एएआई द्वारा विकसित GAGAN सिस्टम का उपयोग हेलीकॉप्टरों के जरिए घने जंगलों में फंसे घायल जवानों को निकालने (Medevac) के लिए किया जाता है। सटीक नेविगेशन के कारण खराब मौसम में भी हेलीकॉप्टर सही जगह लैंड कर पाते हैं।

इसरो की तकनीक ने नक्सलियों के “होम एडवांटेज” (भौगोलिक लाभ) को कम कर दिया है। अब सुरक्षा बल केवल जमीन पर मौजूद खुफिया जानकारी पर निर्भर नहीं हैं, बल्कि उनके पास अंतरिक्ष से मिलने वाला सटीक डेटा भी है, जो कैजुअल्टी कम करने और ऑपरेशनों को सटीक बनाने में मदद करता है।

‘समाज ने खुले मन से पुनर्वासित लोगों को स्वीकार किया’
विजय शर्मा ने जगदलपुर में कहा कि गृहमंत्री अमित शाह ने साल 2024 में घोषणा की थी कि 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद पूरी तरह से खत्म कर देंगे. उनकी डेडलाइन के तहत ही राज्य सरकार ने नक्सलवाद को खत्म करने की सुनियोजित योजना बनाई थी. पापाराव जैसे नक्सलियों ने मुख्यधारा में वापसी की है. बस्तर का समाज भी नक्सलियों के पुनर्वासित लोगों को स्वीकार कर रहा है.

95 प्रतिशत नक्सलवाद खत्म
विजय शर्मा ने कहा कि बस्तर संभाग ही नहीं कबीरधाम, खैरागढ़-छुईखदान, राजनांदगांव, धमतरी, गरियाबंद और महासमुंद जैसे जिले भी जो नक्सलवाद से बुरी तरह प्रभावित थे, वो अब नक्सलवाद से मुक्त हो चुके हैं. केंद्र और राज्य के सुरक्षा बलों के कारण ये संभव हो सका है. राजनीतिक इच्छा शक्ति और सुरक्षा बलों के अदम्य साहस ने यह काम कर दिखाया.

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news36Desk

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