छत्तीसगढ़ के इस शहर में चाहे ठेलो गुमटी में बेचो साग भाजी या समान, सभी को ट्रेड लाईंसेंस बनवाना हुआ जरुरी


छत्तीसगढ़ की न्यायधानी बिलासपुर के व्यापारिक गलियारों में अब नियमों की ‘बयार’ चलने वाली है! अगर आप न्यायधानी में अपना बिजनेस चला रहे हैं, तो अब केवल शटर उठाना काफी नहीं होगा—साथ में ट्रेड लाइसेंस का होना भी उतना ही जरूरी है। नगर निगम ने साफ कर दिया है कि अब शहर में व्यापार ‘बिना परमिट’ वाली पटरी पर नहीं दौड़ेगा।
‘गुमाश्ता’ का जमाना गया, अब ट्रेड लाइसेंस है जरूरी
अब तक कई व्यापारी केवल गुमाश्ता लाइसेंस के भरोसे अपनी दुकानदारी चला रहे थे। लेकिन निगम के नए फरमान ने यह साफ कर दिया है कि गुमाश्ता और ट्रेड लाइसेंस एक नहीं हैं। अब छोटे-बड़े हर कारोबारी को निगम के नियमों के दायरे में आना होगा।
सर्वे की ‘राडार’ पर 30 हजार दुकानें
बिलासपुर की व्यापारिक कुंडली कुछ ऐसी है:
कुल दुकानें : लगभग 30,000
लाइसेंस धारी: मात्र 30% (लगभग 9,000)
बिना लाइसेंस वाले : 70%


निगम का कहना है कि इतने बड़े अंतर की वजह से उसे भारी राजस्व (Revenue) का नुकसान हो रहा है। इसलिए अब निगम की टीमें गली-गली जाकर दुकानों का सर्वे करेंगी। सर्वे में पकड़े गए तो फिर ‘सॉरी’ से काम नहीं चलेगा, सीधे लाइसेंस बनवाना पड़ेगा।
ठेले-गुमटी वालों की भी ‘एंट्री’
यह नियम सिर्फ आलीशान मॉल या बड़े होटलों के लिए नहीं है। अब सड़क किनारे सजने वाले ठेले और गुमटी संचालकों को भी वैध लाइसेंस लेना होगा। इसका मकसद सिर्फ टैक्स वसूलना नहीं, बल्कि शहर के अव्यवस्थित बाजार को एक सिस्टम में लाना है।
क्या होगा अगर लाइसेंस नहीं बनवाया?
निगम प्रशासन ने सख्त चेतावनी दी है कि जो व्यापारी इस व्यवस्था को नजरअंदाज करेंगे, उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी। जुर्माना तो लगेगा ही, साथ ही दुकान सील होने की नौबत भी आ सकती है। चाहे चाय का ठेला हो या पांच सितारा होटल, बिलासपुर में बिजनेस करना है तो ‘ट्रेड लाइसेंस’ का टिकट कटाना ही होगा!








