सरकार रसोइये को मानदेय में 25 % बढ़ोतरी को तैयार, रसोइये 50% पर अड़े

छत्तीसगढ़ के सरकारी स्कूलों के रसोइये 50 % मानदेय की बढ़ोतरी को लेकर आंदोलन कर रहे हैं। इसी बीच दो रसोइयों की मौत हो गई है। इसको लेकर बुधवार को सीएम विष्णुदेव साय ने कहा कि, सरकार 25% देने के लिए तैयार है।
सीएम साय ने कहा कि, मुझे जो जानकारी मिली है कि, वे जरूर रसोईया थे। उनका आंदोलन चल रहा था, लेकिन मौत का इससे कोई संबंध नहीं है। पूरे प्रदेश में 88 हजार से अधिक रसोईया हैं। उनसे शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने संपर्क किया है। उनके मानदेय में 50 % की बढ़ोतरी की मांग है। सरकार अभी 25 % देने तैयार है उनसे चर्चा हुई है।
दो महिलाओं की मौत
रसोइया संघ के प्रदेश अध्यक्ष राजराम कश्यप ने बताया कि धरना स्थल तूता नया रायपुर मे बैठे प्रदर्शनकारियों में से दो महिलाओं की मौत हो गई है. इसमें दुलारी यादव शासकीय प्राथमिक शाला सलधा की रसोइया है. 25 जनवरी को अचानक तबीयत बिगड़ने पर उन्हें मेकाहारा अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां आज 27 जनवरी दोपहर करीब तीन बजे उनकी मौत हो गई. वहीं ग्राम कुसुम कसाव, जिला बालोद की रसोइया रुक्मणी सिन्हा की भी मौत हो चुकी है। दोनों की मौत का कारण इन्फेक्शन, सर्दी-खांसी, सिर दर्द जैसी बीमारियां बताई जा रही हैं, जो धरना स्थल पर व्याप्त असुविधाओं से जुड़ी है.
धरना स्थल पर हालात
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि धरना स्थल पर बुनियादी सुविधाएं नहीं है. पीने के लिए साफ पानी नहीं, टैंकर के गंदे पानी पर निर्भरता.नहाने-धोने या दिनचर्या के लिए कोई व्यवस्था नहीं है. पर्याप्त शौचालय नहीं जो हैं, वे गंदे, टूटे-फूटे और इस्तेमाल लायक नहीं है.ठंड और गर्मी से बचाव के लिए उचित छत, तंबू कंबल आदि की कमी है. इससे पहले कई प्रदर्शनकारियों को डायरिया, पीलिया जैसी बीमारियां हो चुकी हैं. इन अव्यवस्थाओं के कारण बीमारियां फैलने का खतरा बढ़ गया था और लल्लूराम डॉट कॉम ने पहले ही प्रशासन को चेतावनी दी थी, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई. नतीजा दो मौतें और एक महिला की जिंदगी खतरे में है.
हड़ताल की वजह
रसोइयाएं मुख्य रूप से दैनिक मजदूरी बढ़ाने की मांग पर अड़े हैं. वर्तमान में उन्हें सिर्फ 66 प्रतिदिन मिलते हैं जो कलेक्टर दर की मजदूरी से भी कम है.
ये है मांग
बहुत कम मानदेय मिलता है इसलिए हम कलेक्टर दर की मांग कर रहे हैं. यह हड़ताल 29 दिसंबर 2025 से शुरू हुई, जिससे राज्य के हजारों स्कूलों में मिड-डे मील सेवा प्रभावित हैं.





