राजिम कल्प कुंभ 2026 को लेकर साधु-संतों में नाराजगी, बहिष्कार का एलान

छत्तीसगढ़ के प्रयागराज कहे जाने वाले राजिम में आयोजित होने वाले राजिम कल्प कुंभ 2026 को लेकर विवाद गहरा गया है। रायपुर के साधु-संतों ने प्रदेश सरकार और प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोलते हुए आयोजन के बहिष्कार का ऐलान किया है।
संतों का मुख्य आरोप है कि सरकार द्वारा जारी राजपत्र (गजट) से रायपुर के कई प्रतिष्ठित और प्राचीन मठों के महंतों के नाम हटा दिए गए हैं, जिसे वे पूरे संत समाज का अपमान मान रहे हैं।
विवाद की मुख्य वजहें
राजपत्र से नाम गायब: संतों के अनुसार, शासन द्वारा जारी आधिकारिक सूची में महंत देवदास जी महाराज, महंत वेद प्रकाश, गोंडवाना समाज के संत निराहारी महाराज और किन्नर अखाड़े की महामंडलेश्वर सौम्या मां जैसे प्रमुख नामों को शामिल नहीं किया गया है।
प्रशासनिक लापरवाही या साजिश
रायपुर के श्री सुरेश्वर महादेव पीठ में आयोजित प्रेस वार्ता में संतों ने आरोप लगाया कि बार-बार जानकारी देने के बावजूद सूची में सुधार नहीं किया गया। उन्होंने इस कृत्य को करने वाले अधिकारी को ‘कालनेमि’ की संज्ञा देते हुए उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।
अधिकारियों का अभद्र व्यवहार
संतों ने मेला प्रशासन के एक विशेष अधिकारी पर दुर्व्यवहार का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बातचीत के दौरान संतों के प्रति सम्मानजनक भाषा का प्रयोग नहीं किया गया, जिससे आक्रोश और बढ़ गया है।
संत समाज की कड़ी चेतावनी
संतों ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक इस मामले की जांच कर दोषियों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक रायपुर का संत समाज राजिम कल्प कुंभ में हिस्सा नहीं लेगा।
“पिछले साल भी हमने उपेक्षा के बावजूद सहयोग किया था, लेकिन बार-बार नामों के साथ छेड़छाड़ करना संत समाज को अपमानित करने की कोशिश है। जब तक दोषियों को सामने नहीं लाया जाता, हम आयोजन से दूर रहेंगे।” — संत महासभा के प्रतिनिधि
निष्कर्ष और मांग
संत समाज ने मुख्यमंत्री और संबंधित मंत्रियों से इस मामले में तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि राजिम कुंभ एक विश्वस्तरीय आयोजन है और कुछ अधिकारियों की लापरवाही के कारण इसकी गरिमा और संतों के सम्मान को ठेस पहुंच रही है। प्रेस वार्ता में आचार्य, संत महासभा के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में साधु-संत मौजूद रहे।






