छत्तीसगढ़ में बिजली उपभोक्ताओं के लिए 1 अप्रैल से शुरू होगी प्रीपेड व्यवस्था, मोबाइल की तरह करना होगा रिचार्ज, बिजली काटने से पहले मिलेगा ‘अलर्ट’

रायपुर: छत्तीसगढ़ के बिजली विभाग में एक बड़े सुधार की दिशा में कदम बढ़ाते हुए राज्य सरकार ने प्रीपेड मीटरिंग सिस्टम लागू करने का निर्णय लिया है। आज राजधानी रायपुर में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान ऊर्जा सचिव रोहित यादव ने इस नई व्यवस्था का खाका पेश किया। शुरुआती चरण में यह व्यवस्था आम जनता के बजाय सरकारी तंत्र पर लागू की जाएगी, ताकि सिस्टम की प्रभावशीलता को परखा जा सके।
पहले चरण में सरकारी विभाग निशाने पर
ऊर्जा सचिव ने स्पष्ट किया कि विभाग की प्राथमिकता फिलहाल व्यवस्था को व्यवस्थित करना है। इस योजना के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
शुरुआत की तारीख : यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से प्रभावी होगी।
प्रथम चरण: शुरुआत में इसे केवल शासकीय भवनों (Government Buildings) के लिए अनिवार्य बनाया जा रहा है।
रीचार्ज आधारित बिजली: जिस तरह आप मोबाइल फोन रीचार्ज करते हैं, ठीक उसी तरह सरकारी दफ्तरों को भी एडवांस में बिजली का रीचार्ज कराना होगा।
बिजली काटने से पहले मिलेगा ‘अलर्ट’
अक्सर उपभोक्ताओं के मन में यह डर रहता है कि बैलेंस खत्म होते ही अचानक अंधेरा छा जाएगा। इस पर सचिव रोहित यादव ने राहत देते हुए बताया कि:
रिमाइंडर मैसेज: बैलेंस कम होने पर संबंधित अधिकारी या विभाग के पास मोबाइल पर रिमाइंडर मैसेज भेजे जाएंगे।
पर्याप्त समय: बिजली काटने की नौबत आने से पहले विभाग को कई बार सूचना दी जाएगी ताकि वे समय रहते रीचार्ज कर सकें।
क्यों लिया गया यह फैसला?
इस कदम के पीछे मुख्य उद्देश्य सरकारी विभागों पर बकाया बिजली बिलों के बोझ को कम करना और राजस्व वसूली में पारदर्शिता लाना है।
बकाया राशि पर लगाम: अक्सर सरकारी विभागों से बिलों का भुगतान समय पर नहीं होता, जिससे विभाग का घाटा बढ़ता है।
ऊर्जा संरक्षण: प्रीपेड सिस्टम होने से विभागों में बिजली की बर्बादी कम होगी, क्योंकि उपयोग सीधे बजट से जुड़ा होगा।
“हम तकनीक के माध्यम से व्यवस्था को सुगम बना रहे हैं। प्रीपेड सिस्टम से न केवल पारदर्शिता बढ़ेगी, बल्कि उपभोक्ताओं को भी अपने खर्च पर बेहतर नियंत्रण मिलेगा। सरकारी भवनों से इसकी सफल शुरुआत के बाद आगे की योजना तय की जाएगी।” ऊर्जा सचिव रोहित यादव






