Chhattisgarh : भाजपा नेता के 2 एकड़ खेत में अफीम की खेती, कीमत करोड़ो में


छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले में फिल्मी अंदाज में चल रहे एक बड़े “ड्रग्स सिंडिकेट” का भंडाफोड़ हुआ है। मक्के की ऊंची आड़ और रसूखदारों के नाम की ओट में यहाँ सालों से अफीम की खेती की जा रही थी। पुलिस की इस दबिश ने न केवल करोड़ों के काले कारोबार को उजागर किया है, बल्कि स्थानीय सियासत में भी उबाल ला दिया है।
मक्के की आड़ में ‘काली कमाई’ का खेल
दुर्ग के जेवरा सिरसा चौकी अंतर्गत समोदा और झेंजरी गांव की सीमा पर स्थित करीब 9 एकड़ के खेत में यह खेल चल रहा था। बाहर से देखने पर लहलहाती मक्के की फसल दिखती थी, लेकिन हकीकत में 4 से 5 एकड़ के बीच अफीम (Opium) के पौधे लदे हुए थे।


ऐसे हुआ खुलासा
एक व्हाट्सएप फोटो और गूगल सर्च के जरिए सरपंच ने पुख्ता किया कि यह अफीम है।6 मार्च को पुलिस और प्रशासन की टीम ने जब रेड मारी, तो करीब डेढ़ से दो एकड़ में अफीम की फसल लहलहाती मिली। शुरुआती अनुमानों के मुताबिक, इस अफीम की कीमत करोड़ों रुपए आंकी जा रही है।


आरोप-प्रत्यारोप: कौन है असली गुनहगार?
इस मामले ने अब राजनीतिक मोड़ ले लिया है। एक तरफ ग्रामीण हैं, तो दूसरी तरफ रसूखदार नेता। समोदा सरपंच अरुण गौतम का सीधा आरोप है कि यह जमीन भाजपा किसान मोर्चा के अध्यक्ष विनायक ताम्रकर और बृजेश ताम्रकर की है। उनका कहना है कि यह जमीन किसी को अधिया (बंटवारे) पर नहीं दी गई थी, बल्कि विनायक खुद ही यहाँ खेती कर रहे थे। जिस पंच ने पुलिस को खबर दी, उसके साथ मारपीट भी की गई।”
भाजपा नेता ने कहा उन्हें जानकारी नहीं
वहीं, भाजपा नेता विनायक ताम्रकर ने खुद को पाक-साफ बताते हुए कहा कि उन्हें इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। उनका तर्क है जमीन मधुमति और प्रीति बाला ताम्रकर के नाम पर है,खेती के लिए जमीन अधिया पर दी गई थी।संभवतः कुछ राजस्थानी लोग चोरी-छिपे मक्के के बीच अफीम उगा रहे थे, सुरक्षा कारणों से वे किसी को खेत में घुसने नहीं देते थे, इसलिए किसी को पता नहीं चला।
जांच की वर्तमान स्थिति
रायपुर से विशेषज्ञों की टीम और मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में जांच की कार्रवाई जारी है, शुक्रवार की शाम अंधेरा होने के कारण कार्रवाई रोक दी गई थी, जो आज (7 मार्च) दोबारा शुरू होगी।तहसीलदार और आरआई खसरा नंबर 310 की वास्तविक मिल्कियत की जांच कर रहे हैं। |
वहीं कलेक्टर अभिजीत सिंह के अनुसार, कुछ संदिग्धों को हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है,पौधों के सैंपल लैब भेजे जा रहे हैं ताकि अफीम की गुणवत्ता और मात्रा स्पष्ट हो सके
पुलिस और प्रशासन का रुख
एएसपी ग्रामीण किया है कि खेत के वास्तविक मालिक और खेती करने वाले के बीच के संबंध की पुष्टि लैंड रिकॉर्ड्स के जरिए की जा रही है। आरोपियों को नोटिस जारी कर दिया गया है।
बड़ा सवाल
क्या वाकई एक रसूखदार जमीन मालिक को अपने ही 9 एकड़ के खेत में करोड़ों की अफीम उगने की भनक नहीं थी, या यह किसी बड़े संगठित अपराध का हिस्सा है?








