छत्तीसगढ़ का बहुचर्चित जग्गी हत्याकांड: हाईकोर्ट में दोबारा शुरू हुई सुनवाई


छत्तीसगढ़ की राजनीति को हिला देने वाले रामावतार जग्गी हत्याकांड में एक बड़ा कानूनी मोड़ आया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में यह मामला फिर से ‘रीओपन’ हो गया है। बुधवार को चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की डिवीजन बेंच ने इस पर सुनवाई की, जहाँ मामले की मेरिट पर विस्तार से चर्चा के लिए 1 अप्रैल की तारीख तय की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि: क्या था पूरा विवाद?
हत्या की तारीख: 4 जून 2003
घटना: एनसीपी (NCP) नेता और दिग्गज नेता विद्याचरण शुक्ल के करीबी रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी।
राजनीतिक माहौल: उस वक्त छत्तीसगढ़ में अजीत जोगी की सरकार थी। विद्याचरण शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हो चुके थे और जग्गी को पार्टी का कोषाध्यक्ष बनाया गया था। माना जा रहा था कि NCP के बढ़ते प्रभाव से तत्कालीन सत्ताधारी दल असुरक्षित महसूस कर रहा था।
CBI जांच और अदालती कार्यवाही
शुरुआती पुलिस जांच पर पक्षपात के आरोप लगने के बाद मामला CBI को सौंपा गया था।
आरोपी: CBI ने पूर्व मुख्यमंत्री अजीत जोगी के बेटे अमित जोगी समेत 31 लोगों को आरोपी बनाया था।
निचली अदालत का फैसला (2007): रायपुर की विशेष अदालत ने 28 लोगों को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई, लेकिन अमित जोगी को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया था।
हाईकोर्ट का पिछला रुख: दो साल पहले हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने अन्य दोषियों की सजा बरकरार रखी थी।
सुप्रीम कोर्ट का हस्तक्षेप: CBI और रामावतार के पुत्र सतीश जग्गी की अपील पर सुप्रीम कोर्ट ने मामला वापस हाईकोर्ट भेजा ताकि अमित जोगी की दोषमुक्ति और केस की मेरिट पर दोबारा गहन सुनवाई हो सके।
सतीश जग्गी के गंभीर आरोप
रामावतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी और उनके वकील बीपी शर्मा ने कोर्ट में दलील दी है कि यह हत्याकांड तत्कालीन राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित एक राजनीतिक षड्यंत्र था। जांच के दौरान सरकारी प्रभाव का इस्तेमाल कर अहम सबूतों को नष्ट किया गया।उनका तर्क है कि ऐसे मामलों में केवल प्रत्यक्ष सबूत नहीं, बल्कि साजिश (Conspiracy) का पर्दाफाश करना अनिवार्य है।
सजा पाने वालों में बड़े नाम शामिल
इस केस में अब तक 28 लोगों को उम्रकैद की सजा मिल चुकी है, जिनमें शामिल हैं
पुलिस अधिकारी: दो तत्कालीन CSP और एक थाना प्रभारी।
अन्य: रायपुर मेयर एजाज ढेबर के भाई याहया ढेबर, शूटर चिमन सिंह और कई अन्य सहयोगी।
अमित जोगी की कानूनी स्थिति
चूंकि मामला फिर से खुला है और CBI ने उन्हें मुख्य साजिशकर्ता माना था, इसलिए कानूनी जानकारों के अनुसार अमित जोगी को अब नए सिरे से जमानत (Bail) लेनी होगी। केस के रिओपन होने से जोगी परिवार की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ती नजर आ रही हैं।








