छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट का बड़ा फैसला: ‘पदोन्नति पाना कर्मचारी का मौलिक अधिकार नहीं’


छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने सरकारी सेवाओं में पदोन्नति (Promotion) को लेकर एक बेहद महत्वपूर्ण कानूनी स्थिति स्पष्ट की है। जस्टिस संजय अग्रवाल और जस्टिस अरविंद कुमार वर्मा की डिवीजन बेंच ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा कि किसी भी कर्मचारी के पास पदोन्नति पाने का ‘निहित अधिकार’नहीं होता, बल्कि उसे केवल नियमों के तहत पदोन्नति के लिए ‘विचार किए जाने’का अधिकार प्राप्त है।
क्या था मुख्य विवाद?
यह पूरा मामला मुख्य नगरपालिका अधिकारी (CMO) के पद पर होने वाली पदोन्नति के नियमों से जुड़ा था। पुष्पा खलखो और अन्य अधिकारियों ने याचिका दायर कर राजस्व निरीक्षकों (RI) को CMO पद पर प्रमोट करने के नियमों को चुनौती दी थी। उनका कहना था कि सिविल पदों पर कार्यरत अधिकारी और राजस्व निरीक्षक दो अलग-अलग श्रेणियां हैं। इन्हें एक समान मानकर प्रमोशन देना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 (समानता का अधिकार) का उल्लंघन है।याचिका में 2018 के उस आदेश को भी चुनौती दी गई थी, जिसमें राजस्व निरीक्षकों को अनुभव की अवधि में एक वर्ष की विशेष छूट दी गई थी।
कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
डिवीजन बेंच ने मामले की गहराई से समीक्षा करने के बाद निम्नलिखित प्रमुख बिंदु रखे
सरकार का नीतिगत अधिकार: कोर्ट ने स्पष्ट किया कि पदोन्नति के लिए ‘फीडर कैडर’ (किन पदों से प्रमोशन होगा) तय करना और विभिन्न पदों की समकक्षता निर्धारित करना पूरी तरह से राज्य सरकार और कार्यपालिका के नीतिगत अधिकार क्षेत्र में आता है।
मौलिक अधिकार नहीं: अदालत ने दोहराया कि प्रमोशन मिलना कोई संवैधानिक या मौलिक अधिकार नहीं है। यदि प्रक्रिया नियमों के अनुसार है, तो उसे चुनौती नहीं दी जा सकती।
राजस्व निरीक्षकों को राहत: कोर्ट ने राजस्व निरीक्षकों को CMO पद के लिए पात्र मानने को सही ठहराया। साथ ही, अनुभव की अवधि को 6 वर्ष से घटाकर 5 वर्ष करने के सरकार के फैसले को भी ‘जनहित’ में लिया गया उचित निर्णय माना।
सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर हुई दोबारा सुनवाई
गौरतलब है कि इससे पहले हाईकोर्ट की एक अन्य बेंच ने इन नियमों को अवैध करार दे दिया था। इसके बाद राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। 16 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने पुराने आदेश को रद्द करते हुए बिलासपुर हाईकोर्ट को इस मामले पर नए सिरे से सुनवाई करने के निर्देश दिए थे, जिसके बाद अब यह अंतिम फैसला आया है।
हाईकोर्ट ने सभी याचिकाओं को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। इस फैसले से अब राजस्व निरीक्षकों (RI) के लिए मुख्य नगरपालिका अधिकारी बनने का रास्ता साफ हो गया है और विभाग में लंबे समय से अटकी पदोन्नति प्रक्रिया को गति मिलेगी।








