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बिलासपुर से निकल कर गांवो तक पहुंचा बर्ड फ्लू का प्रकोप,बिल्हा, बेलतरा के इन गांवों में सैकड़ों मुर्गियों की मौत से हड़कंप

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में कोनी प्रक्षेत्र के बाद अब ग्रामीण इलाकों में मुर्गियों की अचानक हो रही मौतों ने हड़कंप मचा दिया है। बिल्हा और बेलतरा क्षेत्र के गांवों में पक्षियों के मरने का सिलसिला थम नहीं रहा है, जिससे न केवल संक्रमण का खतरा बढ़ गया है, बल्कि प्रशासन की सक्रियता पर भी गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।

इन गांवों में मचा कोहराम
ग्रामीण क्षेत्रों से मिल रही खबरों के मुताबिक, बिल्हा के बसिया और बेलतरा के खैरा व अकलतरी गांवों में स्थिति चिंताजनक है।यहां चित्रलेखा धुरी नामक महिला की लगभग 400 मुर्गियां महज 15 दिनों के भीतर दम तोड़ चुकी हैं, खैरा और अकलतरी में गांवों में भी बड़े पैमाने पर पक्षियों की मौत की ख़बर है

कुक्कुट पालन का व्यवसाय पर असर
इस आपदा की सबसे ज्यादा मार स्व-सहायता समूह की महिलाओं पर पड़ी है। इन महिलाओं ने अपनी गाढ़ी कमाई और मेहनत से कुक्कुट पालन का व्यवसाय शुरू किया था। मुर्गियों की सामूहिक मौत ने उनकी आर्थिक कमर तोड़ दी है। हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद पशु चिकित्सा विभाग ने अब तक प्रभावित क्षेत्रों से सैंपलिंग तक नहीं की है।

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ठप पड़ा 30 लाख का पोल्ट्री कारोबार
बर्ड फ्लू की पुष्टि और बढ़ते प्रतिबंधों ने जिले के पोल्ट्री व्यवसाय को हाशिए पर धकेल दिया है,जिले में कुल 87 पोल्ट्री फार्म हैं। रोजाना होने वाली 10 हजार मुर्गियों की बिक्री पूरी तरह बंद है। व्यापारियों के अनुसार, हर दिन करीब 30 लाख रुपये का नुकसान हो रहा है।

प्रशासन की अब तक की कार्रवाई
कोनी प्रक्षेत्र में संक्रमण मिलने के बाद प्रशासन ने प्रभावित क्षेत्रों के 145 घरों का सर्वे पूरा किया है,संक्रमण रोकने के लिए मुर्गियों को जब्त कर उन्हें वैज्ञानिक पद्धति से मारा (Culling) गया है। प्रभावित पालकों को शासन द्वारा निर्धारित दरों पर मुआवजा देने का आश्वासन दिया गया है। वायरस के प्रसार को रोकने के लिए विभाग द्वारा दिन में दो से तीन बार रसायनों का छिड़काव किया जा रहा है।

मुर्गियों के अंडों को भी किया नष्ट
बिलासपुर में संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए प्रतिक्रिया दल ने संक्रमित और संदिग्ध क्षेत्र में मौजूद शेष बचे कुल 22,808 मुर्गियों, 25,896 अंडों और लगभग 79 क्विंटल दाने को वैज्ञानिक विधि से नष्ट कर दिया है। यह कार्रवाई शासन के निर्धारित प्रोटोकॉल के तहत सावधानीपूर्वक की गई। उन्होंने बताया कि जिला प्रशासन द्वारा स्थिति की सतत निगरानी के लिए जिलाधिकारी परिसर में बर्ड फ्लू नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है, जो 24 घंटे सक्रिय रहेगा। आम लोगों से अपील की गई है कि बर्ड फ्लू से संबंधित किसी भी प्रकार की सूचना, संदेह या मृत पक्षियों की जानकारी तत्काल नियंत्रण कक्ष के लैंडलाइन नंबर पर दें।

पोल्ट्री फार्म की निगरानी बढ़ाई गई
पशु चिकित्सा विभाग ने जिले में अलर्ट जारी कर दिया है और पशुपालकों को विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए गए हैं।पोल्ट्री फार्म की निगरानी बढ़ा दी गई है और संक्रमण प्रभावित क्षेत्र में आवाजाही पर भी नियंत्रण रखा जा रहा है। कोनी जिला स्थित पोल्ट्री फार्म में 4400 मुर्गियों को मारे जाने के बाद भोपाल और पुणे की प्रयोगशालाओं में संक्रमित मुर्गियां के नमूने भेजे गए थे जिनमें बर्ड फ्लू की पुष्टि हुई थी। जिले में बर्ड फ्लू की पुष्टि के बाद जिला प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से व्यापक नियंत्रण एवं रोकथाम के निर्देश जारी किए हैं।

पोल्ट्री फार्मों में मुर्गियों की हो रही जांच
बर्ड फ्लू के डर और प्रशासनिक सख्ती के कारण शहर में नॉनवेज बाजार सूना पड़ा है और लोगों को पसंदीदा चिकन व्यंजन के लिए इंतजार करना पड़ रहा है। इधर कोनी के कुक्कुट पालन में संक्रमण के बाद 5000 से अधिक मुर्गियों को गड्ढा खोदकर दफनाया गया है, वहीं पोल्ट्री फार्मों में मुर्गियों की जांच भी की जा रही है।

बिलासपुर में 2 करोड़ रोज का कारोबार ठप, नॉनवेज बाजार बंद
चिकन-अंडे के कारोबार से जुड़े व्यापारियों के अनुसार, बिलासपुर में मुर्गी और अंडों का रोजाना करीब 2 करोड़ रुपए से अधिक का कारोबार होता है। अचानक लगे प्रतिबंध के कारण यह पूरा कारोबार थम गया है। शहर में करीब 300 से अधिक छोटे-बड़े चिकन दुकानों पर रोजाना बड़ी मात्रा में बिक्री होती थी, इसके अलावा 500 से अधिक बिरयानी व नॉनवेज सेंटरों में ग्राहकों की भीड़ रहती थी। लेकिन अब दुकानों के शटर बंद हैं और कारोबारी भारी नुकसान झेल रहे हैं।

कोविड काल जैसे दोहरी मार से व्यापारी परेशान
पोल्ट्री कारोबारियों का कहना है कि स्थिति उनके लिए “दोहरी मार” जैसी हो गई है। एक तरफ बिक्री बंद है, वहीं दूसरी ओर मुर्गियों के रख-रखाव और दाने-पानी का खर्च लगातार बढ़ रहा है। कई दुकानदारों ने इसे कोविड काल जैसी स्थिति बताया है, जहां आय पूरी तरह रुक गई थी। संक्रमण के डर से लोग अब न तो मुर्गी खरीद रहे हैं न ही अंडा लेने के लिए आ रहे हैं।

व्यापारी पहुंचे विधायक निवास
चिकन और अंडों की बिक्री पर लगे प्रतिबंध से नाराज कारोबारियों ने विधायक अमर अग्रवाल से मुलाकात कर राहत देने और प्रतिबंध हटाने की गुहार लगाई है।

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news36Desk

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