छत्तीसगढ़ में एक करोड़ में बनाए जाते थे डिप्टी कलेक्टर !..भूपेश सरकार के कार्यकाल की परीक्षा, CBI की रडार पर कई चौकानेवाले बड़े नाम

छत्तीसगढ़ की सबसे प्रतिष्ठित राज्य सेवा परीक्षा (CGPSC) पर अब तक का सबसे बड़ा दाग लगा है, जहां आरोप है कि मेरिट नहीं, 1 करोड़ रुपये तक की बोली लगा कर डिप्टी कलेक्टर बनाया जा रहा था। CBI की अंतिम चार्जशीट में खुलासा हुआ है कि रायपुर से करीब 125 किलोमीटर दूर बारनवापारा के घने जंगलों में स्थित एक निजी रिसॉर्ट को इस कथित भर्ती खेल का गुप्त अड्डा बनाया गया।
जंगल के रिसॉर्ट में ‘सेलेक्शन पैकेज’
CBI के अनुसार, तत्कालीन अध्यक्ष टामन सोनवानी और कोचिंग संचालक उत्कर्ष चंद्राकर ने मिलकर 35 चुनिंदा अभ्यर्थियों को रिसॉर्ट में बुलाया, जहां उन्हें ‘पर्यटक’ बताकर 11 से 24 मई 2022 के बीच ठहराया गया।
आरोप है कि यहीं पर न सिर्फ खास तैयारी करवाई गई, बल्कि असली प्रश्नपत्र उपलब्ध कराकर कमरों में ही हल करवाए गए और फिर मनचाही चयन सूची तैयार की गई।
1 करोड़ में डिप्टी कलेक्टर?
चार्जशीट में दावा है कि पद के हिसाब से ‘रेट’ फिक्स थे और डिप्टी कलेक्टर जैसी ऊंची पोस्ट के लिए 1 करोड़ रुपये तक की डील की गई।
जांच में विकास और उत्कर्ष चंद्राकर द्वारा मेंस परीक्षा का प्रश्नपत्र साल्वर के पास पहुंचाने की बात भी दर्ज है, जिससे पूरे चयन प्रोसेस की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े हो गए।
रसूखदारों के बेटों–बेटियों की खास मेहमाननवाजी
रिसॉर्ट में ठहराए गए अधिकांश उम्मीदवार व्यापारियों, नेताओं और प्रभावशाली परिवारों से जुड़े बताए गए हैं, जिनकी बुकिंग राहुल हरपाल के माध्यम से कराई गई थी।
आरोप है कि इन्हें आम उम्मीदवारों से अलग, वीवीआईपी की तरह ट्रीटमेंट मिला और परीक्षा से पहले ही ‘सुरक्षित भविष्य’ की स्क्रिप्ट लिख दी गई।
भूपेश सरकार के कार्यकाल की परीक्षा, अब CBI की रडार पर बड़े नाम
CGPSC 2021 की मुख्य परीक्षा 26 से 29 जुलाई 2022 के बीच तत्कालीन भूपेश बघेल सरकार के कार्यकाल में आयोजित हुई थी, जिसके बाद लगातार गड़बड़ियों के आरोप उठते रहे।
CBI का मानना है कि इस घोटाले में कई उच्च पदस्थ अधिकारी, नेता और प्रभावशाली लोग अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े हो सकते हैं, जिनकी भूमिका की जांच अभी जारी है।






