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धान बेचने के लिए सभी प्रकार का टोकन कटना हुआ बंद !…भूपेश बघेल बोले ‘साय सरकार धान खरीदना ही नहीं चाहती’

छत्तीसगढ़ के धान खरीदी केंद्रों (समितियों) में इन दिनों सन्नाटा और आक्रोश एक साथ देखने को मिल रहा है। सरकारी कैलेंडर के अनुसार धान खरीदी के लिए अभी समय शेष है अंतिम तारीख 31 जनवरी रखी गई है, लेकिन तकनीकी और प्रशासनिक अड़चनों ने किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं।

टोकन व्यवस्था हुई ठप. ऑनलाइन ऑफलाइन टोकन बंद
रायपुर समेत कई जिलों में 31 जनवरी तक के स्लॉट पहले ही फुल दिखाए जा रहे हैं, जिससे पोर्टल ने हाथ खड़े कर दिए हैं। समितियों ने अब ऑफलाइन टोकन बांटना भी बंद कर दिया है। समिति प्रभारियों का कहना है कि जब तक नोडल अधिकारी ‘भौतिक सत्यापन’ (Physical Verification) नहीं कर लेते, तब तक नया टोकन जारी नहीं होगा। राजधानी से लगे सिलयारी, धरसीवा और सारागांव जैसी दर्जनों समितियों में खरीदी की लिमिट खत्म हो चुकी है। मार्कफेड को पत्र तो लिखे गए हैं, लेकिन जवाब नदारद है।

आंदोलन की आहट : “समाधान नहीं तो तालाबंदी”
रायपुर जिले की सिलयारी और सारागांव समितियों में किसानों का धैर्य अब जवाब दे रहा है। शुक्रवार को बड़ी संख्या में किसानों ने नायब तहसीलदार और शाखा प्रबंधकों को ज्ञापन सौंपा।किसानों का कहना है कि यदि सोमवार तक टोकन और खरीदी की प्रक्रिया सुचारू नहीं हुई, तो वे समितियों में तालाबंदी कर उग्र प्रदर्शन करेंगे। इस विरोध प्रदर्शन में राजनीतिक गर्माहट भी जुड़ गई है, जहां पूर्व कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष उधोराम वर्मा जैसे नेता किसानों के साथ लामबंद हो रहे हैं। सिलयारी समिति का आंकड़ा डराने वाला है, जहाँ अभी भी लगभग 20% किसान अपनी उपज बेचने की कतार में खड़े हैं।

राजधानी इलाके में प्रमुख प्रभावित समितियां

रायपुर ग्रामीण
कुकेरा, सिलयारी, सारागांव, धरसीवा, सांकरा

अन्य केंद्र
कुथरेल, पथरी, निलजा, मढ़ी, बरतोरी, रायखेड़ा, निनवा

सियासत की ‘डबल इंजन’ पर वार
धान के इस मुद्दे ने अब राजनीतिक रंग पूरी तरह अख्तियार कर लिया है। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने रायगढ़ पटवारी संघ के एक पत्र का हवाला देते हुए सरकार को घेरा है। भूपेश बघेल ने कहा कि प्रशासन किसानों पर अपना बोया गया रकबा (Area) कम करने या समर्पण करने का दबाव बना रहा है। बघेल ने कहा कि “डबल इंजन” की भाजपा सरकार असल में किसानों का पूरा धान खरीदना ही नहीं चाहती और जानबूझकर बाधाएं खड़ी कर रही है।

उन्होंने कहा कि राजस्व पटवारी संघ रायगढ़ द्वारा सौंपे गए ज्ञापन के बिंदु धान खरीदी को लेकर सरकार की मंशा को स्पष्ट करते हैं। पटवारियों ने आरोप लगाया है कि राज्य सरकार के उच्चाधिकारियों की ओर से किसानों पर रकबा समर्पण के लिए अनावश्यक दबाव बनाया जा रहा है। यह आरोप सरकार के किसान विरोधी चेहरे को उजागर करता है। उन्होंने शासन-प्रशासन से ऐसे आदेशों को तुरंत रोकने और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।

देख भूपेश बघेल की X पोस्ट

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news36Desk

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