कौन है नक्सल कमांडर पापा राव ? कई वर्षों से कर रहा था नरसंहार, मारे जाने की आई खबर

छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले से एक बड़ी सफलता की खबर सामने आ रही है। सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच हुई भीषण मुठभेड़ में खूंखार माओवादी कमांडर पापा राव के मारे जाने की सूचना है। सूत्रों के अनुसार, पापा राव के साथ डीवीसीएम (DVCM) दिलीप बेड़जा भी ढेर हो गया है, जिसका शव बरामद कर लिया गया है। हिड़मा के बाद इन दोनों बड़े नक्सलियों का मारा जाना बस्तर में सुरक्षाबलों के लिए साल 2026 की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक माना जा रहा है।
50 लाख का इनामी ढेर
हालांकि अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि होना शेष है, लेकिन सूत्रों का कहना है कि सुकमा निवासी और 50 लाख रुपये के इनामी नक्सली पापा राव को जवानों ने मार गिराया है। यह ऑपरेशन जवानों के लिए बड़ी कामयाबी है क्योंकि पापा राव लंबे समय से पुलिस की रडार पर था।
कौन था माओवादी कमांडर पापा राव?
पापा राव (असली नाम: सुन्नम पापा राव) को ‘मंगू दादा’ और ‘चंद्रन्ना’ के नाम से भी जाना जाता था। उसकी प्रोफाइल इस प्रकार है:
- संगठनात्मक पद: वह नक्सलियों की सबसे शक्तिशाली इकाई दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (DSZC) का सदस्य था। साथ ही पश्चिम बस्तर डिवीजन कमेटी का इंचार्ज और दक्षिण सब जोनल ब्यूरो का सदस्य भी था।
- सुरक्षा चक्र: वह हमेशा अत्याधुनिक हथियार AK-47 से लैस रहता था और उसके साथ 30 से 40 हथियारबंद लड़ाकों का दस्ता चलता था।
- विशेषज्ञता: बस्तर की भौगोलिक स्थिति (जल-जंगल-जमीन) की गहरी समझ होने के कारण वह हर बार मुठभेड़ के दौरान बच निकलने में माहिर था।
बड़े हमलों का मास्टरमाइंड
पापा राव के खिलाफ पुलिस रिकॉर्ड में 40 से अधिक आपराधिक मामले दर्ज हैं। उसकी मुख्य जिम्मेदारियों में शामिल था:
- हथियारों की तस्करी और रसद (Logistics) की व्यवस्था करना।
- पीएलजीए (PLGA) में नए लड़ाकों की भर्ती करना।
- बीजापुर और सुकमा क्षेत्र में सुरक्षा बलों पर घात लगाकर हमले करना।
हाल ही में एक मुठभेड़ में उसकी पत्नी उर्मिला (एरिया कमेटी सचिव) मारी गई थी, लेकिन तब पापा राव भागने में सफल रहा था।
ऑपरेशन ‘जिंदा या मुर्दा’
वर्ष 2026 की शुरुआत में ही सुरक्षाबलों ने पापा राव को अपना मुख्य लक्ष्य बनाया था। DRG (डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड) की विशेष टीम को 31 जनवरी 2026 तक उसे पकड़ने या ढेर करने की जिम्मेदारी दी गई थी। एक सरेंडर नक्सली ने खुलासा किया था कि पापा राव सरेंडर करने के पक्ष में नहीं था और भारी सुरक्षा के बीच जंगलों में घूम रहा था।
डीवीसीएम दिलीप बेड़जा का अंत
मुठभेड़ में मारे गए दूसरे नक्सली दिलीप बेड़जा का शव बरामद होना इस बात की पुष्टि करता है कि नक्सली संगठन के नेतृत्व को इस बार भारी चोट पहुँची है।






