रायपुर DEO ऑफिस अग्निकांड : ‘फाइलों की राख’ पर छिड़ी जंग, भाजपा ने बताया ‘कांग्रेसी साजिश’ तो कांग्रेस ने कहा ‘भ्रष्टाचार पर पर्दा’

रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में लगी आग की लपटें बुझ चुकी हैं, लेकिन इसकी तपिश ने प्रदेश की राजनीति को सुलगा दिया है। जहाँ एक तरफ भाजपा इसे पिछले कार्यकाल के पाप धोने की साजिश बता रही है, वहीं कांग्रेस इसे वर्तमान सरकार की विफलताओं को छिपाने का तरीका करार दे रही है।
“सबूत मिटाने के लिए लगाई गई आग” – पुरंदर मिश्रा
भाजपा विधायक पुरंदर मिश्रा ने इस घटना को सीधे तौर पर कांग्रेस की साजिश बताया है। मिश्रा का दावा है कि पिछले 5 सालों में हुए घोटालों के दस्तावेजों को नष्ट करने के लिए कांग्रेसियों ने जानबूझकर आग लगवाई है। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि मामले की जांच इस एंगल से हो कि आग के पीछे किन कांग्रेसी नेताओं का हाथ है।
विधायक ने स्पष्ट किया कि ननकीराम कंवर की शिकायत पर केंद्र की जांच शुरू होते ही कांग्रेसियों में खलबली मच गई है, लेकिन ‘जीरो टॉलरेंस’ वाली सरकार हर घोटाले की परतें खोलकर रहेगी।
“बिल्डिंग तोड़ना ही सबसे बड़ा सबूत” : दीपक बैज
पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज ने सरकार के एक्शन पर सवाल उठाते हुए इसे षड्यंत्र बताया। बैज के अनुसार, जो फाइलें जली हैं उनमें नियुक्तियों और वित्तीय लेन-देन के संवेदनशील दस्तावेज थे। उन्होंने आरोप लगाया कि जांच पूरी होने से पहले ही जली हुई बिल्डिंग को आनन-फानन में तोड़ दिया गया, जो भ्रष्टाचार को दफनाने की कोशिश है। उन्होंने कहा कि कार्यालय में आग जानबूझकर लगायी गई है. जो दस्तावेज़ जले हैं, उसमें से कई वित्तीय फाइलें, नियुक्ति की फाइलें थी. घटना की जांच से पहले अब बिल्डिंग को तोड़ दिया गया है. यह भ्रष्टाचार को छुपाने की कोशिश है.
रिकवरी का काम शुरू, 2008 के बाद का मिल पाएगा डेटा
रायपुर जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि पहली नजर में आग लगने की वजह शॉर्ट सर्किट ही लग रहा है। जो डेटा जला है, उन्हें रिकवर किया जा रहा है। छात्रवृत्ति, मध्यान्ह भोजन जैसी जानकारी ऑनलाइन उपलब्ध हैं, ये आसानी से रिकवर हो जाएंगी।
हालांकि, पूरा डेटा रिकवर हो पाना संभव नहीं है, क्योंकि साल 2008 के बाद की फाइलों का ही मोटे तौर पर डिजिटलाइजेशन काम शुरू था। DEO का कहना है कि इससे पहले की फाइलें उपयोग में नहीं थी, या बेहद कम ही उपयोग हुआ करती थी। ऐसे में ये कागज अभी के दिनों में बहुत ज्यादा उपयोगी नहीं थे।
23 आलमारियां, कई कम्प्यूटर जले
DEO ने बताया हादसे में छात्रवृत्ति, मध्यान्ह भोजन, अनुकम्पा नियुक्ति, स्थापना, स्कूलों की मान्यता और अनुदान से जुड़े बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज जलकर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं। आग में 23 आलमारियों में रखे करीब 150 बस्ते जलकर राख हो गए।
आगजनी में इंस्पायर अवॉर्ड, विधि कक्ष, वित्त, बजट, अनुदान और मदरसे से जुड़े रिकॉर्ड भी नष्ट हो गए। स्टॉक पंजी जल जाने के कारण यह भी स्पष्ट नहीं हो सका है कि स्टोर रूम में कुल कितना और किस प्रकार का सामान रखा गया था।
शनिवार रात 8.30 बजे भड़की आग
शनिवार रात करीब 8 से 8.30 बजे डीईओ कार्यालय से लगे स्टोर रूम में अचानक आग की लपटें उठती देखी गईं। आग तेजी से फैल गई। सूचना मिलने के करीब 20 मिनट के भीतर फायर ब्रिगेड मौके पर पहुंची, लेकिन देर रात तक आग पर पूरी तरह काबू नहीं पाया जा सका। हालांकि, स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हुई।
फोरेंसिक टीम पहुंची, इलाका सील
कोतवाली पुलिस ने घटनास्थल के महत्वपूर्ण हिस्से को सील कर दिया है। रविवार को अवकाश के बावजूद फोरेंसिक टीम डीईओ कार्यालय पहुंची, लेकिन लगातार धुआं उठने के कारण जांच पूरी नहीं हो सकी। पुलिस और फायर ब्रिगेड अपने-अपने स्तर पर आग लगने के कारणों की जांच कर रही है।
साजिश से भी इनकार नहीं, 3 सदस्यीय जांच समिति गठित
पुलिस ने आगजनी के पीछे साजिश की आशंका से इनकार नहीं किया है। वहीं शासन के निर्देश पर संचालक लोक शिक्षण ने मामले की जांच के लिए संभागीय संयुक्त संचालक संजीव श्रीवास्तव की अध्यक्षता में 3 सदस्यीय समिति गठित की है।
समिति में सहायक संचालक लोक शिक्षण बजरंग प्रजापति और सतीश नायर को सदस्य बनाया गया है। समिति को 5 दिनों के भीतर जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही स्टोर रूम में तैनात जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय जांच के भी संकेत मिले हैं।






