छत्तीसगढ़ के इस इलाके में 15 दिनो के लिए शराब और मांस-मटन की बिक्री बंद

छत्तीसगढ़ के प्रयागराज कहे जाने वाले राजिम में आज से 15 दिवसीय ‘राजिम कुंभ कल्प 2026’का भव्य शुभारंभ हो गया है। देशभर के साधु-संतों और लाखों श्रद्धालुओं की आमद को देखते हुए राज्य सरकार ने कड़े फैसले लिए हैं, ताकि मेले की पवित्रता बनी रहे।
सात्विकता का पहरा: बंद रहेंगी दुकानें
मेला क्षेत्र की गरिमा और धार्मिक भावनाओं का सम्मान करते हुए प्रशासन ने निम्नलिखित प्रतिबंध लगाए हैं,राजिम कुंभ कल्प से लगे जिलों और आसपास की सभी शराब दुकानें अगले 15 दिनों तक पूरी तरह बंद रहेंगी।मेला क्षेत्र के दायरे में किसी भी तरह के मांस-मटन की बिक्री और वध पर पूर्ण प्रतिबंध लागू कर दिया गया है।
पर्यटन मंत्री ने मुख्यमंत्री साय को दिया न्योता
इस महापर्व की गरिमा को बढ़ाने के लिए पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री राजेश अग्रवाल ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय से मुलाकात कर उन्हें कुंभ में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया। मुख्यमंत्री आवास पर हुई इस चर्चा में मेले की तैयारियों और राज्य की पर्यटन क्षमता पर बात हुई।
राजिम कुंभ कल्प केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक एकता और आर्थिक उन्नति का महापर्व है।”
विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री
मेले की खास तैयारियां और आकर्षण
इस वर्ष का कुंभ कल्प ‘डिजिटल और क्लीन’ थीम पर आधारित नजर आएगा, पारंपरिक शाही स्नान, विशेष धार्मिक अनुष्ठान और छत्तीसगढ़ी लोक कला पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम मुख्य आकर्षण होंगे। गरियाबंद कलेक्टर बी.एस. उईके और रायपुर कमिश्नर महादेव कावरे के नेतृत्व में यातायात, स्वास्थ्य सेवाएं और स्वच्छता के लिए विशेष समितियां बनाई गई हैं।सरकार का लक्ष्य इस आयोजन के जरिए छत्तीसगढ़ को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर एक प्रमुख तीर्थ स्थल के रूप में स्थापित करना है।
राजिम कुंभ कल्प 2026 आस्था, संस्कृति और परंपरा का वह संगम है, जो आने वाले 15 दिनों तक पूरे प्रदेश को भक्तिमय बनाए रखेगा।
| विशेष अवसर | संभावित तिथि | महत्व |
| प्रथम स्नान (शुरुआत) | 1 फरवरी 2026 | माघ पूर्णिमा: इसी दिन से मेले का भव्य शुभारंभ होता है। |
| द्वितीय स्नान | 6 फरवरी 2026 | गणेश चतुर्थी: श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। |
| तृतीय स्नान | 11 फरवरी 2026 | विजया एकादशी: संतों और अखाड़ों का विशेष जमावड़ा। |
| शाही स्नान (समापन) | 16 फरवरी 2026 | महाशिवरात्रि: यह सबसे महत्वपूर्ण दिन है, जब कुंभ का समापन होता है। |
श्रद्धालुओं के लिए विशेष जानकारी:
- त्रिवेणी संगम: महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के इस पवित्र संगम पर स्नान करना मोक्ष दायक माना जाता है।
- भगवान कुलेश्वर महादेव: मुख्य स्नान के बाद श्रद्धालु भगवान कुलेश्वर नाथ के दर्शन करते हैं, जो नदी के बीचों-बीच स्थित प्राचीन मंदिर है।
- लक्ष्मण मंदिर: यहाँ की वास्तुकला देखने के लिए पर्यटक और श्रद्धालु बड़ी संख्या में पहुँचते हैं।
राजिम कुंभ के इस बार के मुख्य आकर्षण
- — हर साल 60 एकड़ में लगता है विशाल मेला
- — सांस्कृतिक और धार्मिक आयोजन होते हैं
- — कई संतों के अखाड़े पहुंचते हैं
- — 2 हजार से अधिक दुकानें लगती हैं
- — इस बार प्रयागराज की तर्ज पर टेंट सिटी बनाई जा रही है
- — इस टेंट सिटी में लोग रात बिता सकेंगे
- — 5 लाख से अधिक लोगों का जमावड़ा होता है,
- — हर साल इसमें 10 से 20 करोड़ खर्च होते हैं।






