छत्तीसगढ़: अब ग्राम पंचायतें बनाएंगी ‘महतारी सदन’, सरकार ने बदला निर्माण का फैसला

छत्तीसगढ़ में ग्रामीण विकास और महिला सशक्तिकरण की दिशा में राज्य सरकार ने एक महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिया है। जनप्रतिनिधियों की लगातार मांग के बाद अब प्रदेश में ‘महतारी सदन’ के निर्माण की जिम्मेदारी सीधे ग्राम पंचायतों को सौंप दी गई है।
रायपुर। छत्तीसगढ़ की ग्राम पंचायतों के लिए राज्य सरकार ने खुशहाली की नई राह खोल दी है। अब प्रदेश में प्रस्तावित ‘महतारी सदन’ का निर्माण कार्य ग्रामीण यांत्रिकी सेवा (RES) के बजाय सीधे ग्राम पंचायतों के माध्यम से कराया जाएगा। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पंचायत प्रतिनिधियों की मांग को ध्यान में रखते हुए शासन ने यह बड़ा बदलाव किया है।
RES की जगह अब पंचायतें होंगी निर्माण एजेंसी
पूर्व के निर्णय के अनुसार, महतारी सदनों के निर्माण की जिम्मेदारी ‘ग्रामीण यांत्रिकी सेवा’ विभाग को दी गई थी। लेकिन प्रदेशभर के जनप्रतिनिधियों ने तर्क दिया कि ग्राम पंचायतों के पास निर्माण एजेंसी की जिम्मेदारी होने से कार्य में पारदर्शिता आएगी, स्थानीय मजदूरों को रोजगार मिलेगा और निर्माण की गुणवत्ता पर ग्राम स्तर पर निगरानी रखी जा सकेगी। सरकार ने इस मांग को जायज मानते हुए आदेश जारी कर दिए हैं।
100 करोड़ का बजट और 30 लाख की लागत
राज्य सरकार ने महिलाओं के लिए समर्पित इन विशेष भवनों के लिए बजट का बड़ा प्रावधान किया है, प्रदेश में 368 महतारी सदनों के निर्माण के लिए 100 करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है।एक महतारी सदन के निर्माण के लिए 30 लाख रुपए की राशि निर्धारित की गई है।इन सदनों को महिलाओं की सुविधा और ग्राम स्तर पर उनकी बैठकों व गतिविधियों के लिए आधुनिक स्वरूप में तैयार किया जाएगा।
क्या है ‘महतारी सदन’ का उद्देश्य?
महतारी सदन का निर्माण मुख्य रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को एक सुरक्षित और व्यवस्थित स्थान प्रदान करने के लिए किया जा रहा है। यहाँ महिलाएं अपनी ग्राम स्तरीय समितियों की बैठकें कर सकेंगी।महिला स्व-सहायता समूहों की गतिविधियों का संचालन होगा।विभिन्न सरकारी योजनाओं और कौशल विकास का लाभ एक ही छत के नीचे मिल सकेगा।






