धर्मांतरण विधेयक को लेकर बवाल, लोकभवन के बाहर अमित जोगी ने जलाई की कॉपी


छत्तीसगढ़ में धर्मांतरण विधेयक को लेकर राजनीतिक माहौल गरमा गया है। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने लोकभवन के बाहर विधेयक की प्रति जलाकर विरोध दर्ज कराया। इस दौरान उन्होंने राज्यपाल से मांग की कि इस बिल को मंजूरी न दी जाए। अमित जोगी ने कहा कि सरकार इस पर चर्चा से बचना चाहती है।
सरकार पर हमला
अमित जोगी ने बीजेपी सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा कि यदि सरकार को यह विधेयक लाना ही था। तो इसे विधानसभा सत्र की शुरुआत में पेश करना चाहिए था। उनका कहना है कि एक दिन पहले बिल लाना इस बात का संकेत है कि सरकार खुली और विस्तार से चर्चा से बचना चाहती है। उन्होंने कहा कि संविधान सभी नागरिकों के लिए समान रूप से बना है। लेकिन यह विधेयक मौलिक अधिकारों पर सीधा आघात करता है।
जोगी के मुताबिक यह कानून धर्मांतरण रोकने के बजाय लोगों की आस्था और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर नियंत्रण स्थापित करने का प्रयास है। जोगी ने आरोप लगाया कि विधेयक (Anti-conversion law) में प्रलोभन की परिभाषा को व्यापक बना दिया गया है। जिसमें सेवा, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को भी शामिल कर लिया गया है। उनका कहना है कि इससे धार्मिक प्रचार-प्रसार जैसी सामान्य गतिविधियों को भी अपराध की श्रेणी में लाया जा सकता है।
धर्म के दरवाजे पर कलेक्टर बैठा दिया
अमित जोगी ने कहा कि इस कानून के तहत किसी व्यक्ति को अपनी आस्था से जुड़ा निर्णय लेने के लिए कलेक्टर से अनुमति लेनी पड़ेगी। उन्होंने इसे धार्मिक स्वतंत्रता और निजी अधिकारों में हस्तक्षेप बताया। उन्होंने यह भी दावा किया कि विधेयक में विवाह को शून्य घोषित करने जैसे प्रावधान शामिल हैं, जो अत्यंत गंभीर हैं। जोगी के अनुसार, छत्तीसगढ़ में पहले इस तरह का कानून नहीं लाया गया। और अन्य राज्यों में भी ऐसे कानूनों पर सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए हैं।
चुनाव में जवाब देगी जनता
बीजेपी सरकार पर निशाना साधते हुए जोगी ने कहा कि विधेयक लाने में अनावश्यक जल्दबाजी दिखाई गई है। जिससे विवाद पैदा हो रहा है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर बीजेपी को चुनाव, विधानसभा और अदालत तीनों जगह जवाब देना होगा। साथ ही आगामी राज्यों के चुनाव में भी जनता अपना रुख स्पष्ट करेगी।
क्या है छग धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक 2026?
छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्र्य संशोधन विधेयक 2026 एक प्रस्तावित कानून है। इसका उद्देश्य राज्य में जबरन या अवैध धर्म परिवर्तन पर रोक लगाना है। इस विधेयक को राज्य सरकार ने मंजूरी दी थी और आज इसे विधानसभा में पेश किया गया है। सरकार का कहना है कि यह कानून लोगों की धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा के लिए लाया जा रहा है।
संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध
विधेयक के मुख्य नियम और दंड के तहत अवैध धर्मांतरण को बल, प्रलोभन, दबाव, कपट और डिजिटल माध्यम से परिभाषित किया गया है। विधेयक स्पष्ट करता है कि अपने पैतृक धर्म में वापसी को धर्मांतरण नहीं माना जाएगा। इस प्रकार का अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती होगा, (CG Dharma Swatantrya Amendment Bill 2026) जिसकी सुनवाई विशेष न्यायालय में की जाएगी।
क्या है विधेयक में सजा का प्रावधान?
अवैध धर्मांतरण के लिए सजा और जुर्माने का प्रावधान इस प्रकार है: सामान्य अवैध धर्मांतरण के लिए 7 से 10 वर्ष की जेल और 25 लाख रुपये से अधिक जुर्माने का प्रावधान है।
अनुसूचित वर्ग के खिलाफ अपराध में दंड के प्रावधान
नाबालिग, महिला, SC/ST/OBC के प्रति किए गए अपराध में 10 से 20 वर्ष की जेल और 10 लाख रुपये से अधिक जुर्माना तथा सामूहिक धर्मांतरण के मामले में 10 वर्ष से अधिक आजीवन कारावास और 25 लाख रुपये से अधिक जुर्माना शामिल है।
सूचना संबंधी नियम क्या है?
स्वैच्छिक धर्मांतरण की प्रक्रिया में व्यक्ति द्वारा सूचना देना, (CG Dharma Swatantrya Amendment Bill 2026) जिला मजिस्ट्रेट को पूर्व सूचना देना और 30 दिनों तक सार्वजनिक सूचना देना शामिल है।








