माननीयों के उपर करोड़ों का बिजली बिल बकाया !… डिप्टी सीएम, मंत्री समेत कई IAS के नाम, कांग्रेस ने की मुख्यमंत्री से वसूली और पारदर्शिता की मांग

छत्तीसगढ़ में बिजली के दामों का मुद्दा ठंड के मौसम में पिछले कई महिनों से राजनीति को गरमाए हुए था ,बिजली के बढ़े हुए दामों और कटौती को लेकर गुस्सा आम लोगों पर निकल रहा था, अब प्रदेश में एक नया बखेड़ा शुरु हो गया है जहां कुछ हज़ार बिल बकाया होने पर बिजली विभाग द्वारा आमलोगो की बिजली काट दी जाती है है वहीं प्रदेश के मंत्रियों सासंदो आईएएस अधिकारियों पर करोड़ो रु की बिजली बिल बकाया है, कांग्रेस का तो यहां तक दावा है कि करीब 6500 करोड़ रुपए का बिजली बिल मंत्रियों, सांसदों, IAS अधिकारियों और सरकारी संस्थानों पर बकाया है।
आइए जानते है किस पर है कितना बकाया
पहले नंबर पर आते है रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल जिनपर 12 लाख 76 हजार 130 रुपए का बकाया की बात निकल कर सामने आ रही है इसी तरह मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल पर 1 लाख 45 हजार 88 रुपए, मंत्री टंकराम वर्मा पर 1 लाख 4 हजार 78 रुपए और डिप्टी सीएम विजय शर्मा पर 1 लाख 76 हजार 154 रुपए का बिल लंबित होने का आरोप है।
IAS अफसर भी नहीं है पीछे
IAS अफसर राजेंद्र कटारा, अविनाश मिश्र, हितेंद्र विश्वकर्मा के साथ ही IAS मेस पर 20 लाख 18 हजार 674 रुपए और विधानसभा सचिवालय पर 22 लाख 74 हजार 173 रुपए तक का बकाया बताया गया है।
कांग्रेस के तीखे सवाल
मामले को लेकर कांग्रेस मुखर है, कांग्रेस ने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय को पत्र लिखकर पूछा है कि क्या सत्ता में बैठे लोगों के लिए बिजली बिल के नियम अलग हैं। पार्टी का कहना है कि बिजली बोर्ड पर कर्ज का हवाला देकर आम उपभोक्ताओं के बिल बढ़ाने की सिफारिश होती है, जबकि असली बकाया सरकार के भीतर ही दबा पड़ा है। कांग्रेस का आरोप है कि आम लोगों से वसूली के लिए कटौती से लेकर कनेक्शन तक काटने की कार्रवाई होती है, लेकिन मंत्री, सांसद और अधिकारी आराम से बकाया पर बैठे हैं। पत्र में लिखा गया है कि जो नेता मंच से ईमानदारी और टैक्स भरने की नसीहत देते हैं, वही अपने बिजली बिल नहीं चुकाते तो जनता का भरोसा कैसे मजबूत रहेगा।

क्या मांग रखी गई
कांग्रेस ने मांग की है कि सभी मंत्रियों, सांसदों, IAS अधिकारियों और सरकारी संस्थानों से बकाया बिजली बिल की तुरंत वसूली कर पूरी सूची सार्वजनिक की जाए। पार्टी ने कहा है कि जब तक सिस्टम के भीतर जवाबदेही तय नहीं होगी, तब तक आम जनता पर महंगी बिजली का बोझ डालना गलत है।







