राजिम कुंभ में ‘इवेंट कंपनी’ की मनमानी: कलाकारों को नहीं मिला खाना, भड़के विधायक ने खुद ले जाकर खिलाया भोजन; जनप्रतिनिधि धरने पर

राजिम। आस्था और संस्कृति के महापर्व ‘राजिम कुंभ कल्प’ में इस बार भक्ति की बयार के साथ-साथ व्यवस्थाओं को लेकर भारी आक्रोश भी देखने को मिल रहा है। मेले के आयोजन का जिम्मा संभाल रही इवेंट कंपनी की लगातार बढ़ती मनमानी और जिला प्रशासन की ढिलाई अब सरकार की छवि पर भारी पड़ने लगी है।
आधी रात का हंगामा: भूखी रहीं आरु साहू और उनकी टीम
रविवार की रात राजिम कुंभ के मुख्य मंच पर छत्तीसगढ़ की प्रसिद्ध कलाकार आरु साहू और उनके साथी कलाकारों ने शानदार प्रस्तुति दी। लेकिन, विडंबना देखिए कि मंच पर तालियां बटोरने वाले इन कलाकारों को कार्यक्रम के बाद डेढ़ घंटे तक भोजन के लिए इंतज़ार कराया गया। इवेंट कंपनी की घोर लापरवाही के चलते जब कलाकारों को खाना नसीब नहीं हुआ, तो इसकी खबर राजिम विधायक रोहित साहू तक पहुँची।
विधायक का ‘एक्शन अवतार’: अधिकारियों को लगाई फटकार
सूचना मिलते ही विधायक रोहित साहू मौके पर पहुँचे और जिला प्रशासन व इवेंट कंपनी के प्रतिनिधियों की क्लास लगा दी। संतोषजनक जवाब न मिलने पर उन्होंने सख्त चेतावनी देते हुए कहा: “राजिम कुंभ हमारी आस्था और प्रदेश की पहचान है। अगर कोई भी अधिकारी या इवेंट कंपनी सरकार की छवि धूमिल करने की कोशिश करेगी, तो उसे किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।”
विधायक ने मानवीय संवेदनशीलता दिखाते हुए सभी भूखे कलाकारों को खुद साथ लिया और एक निजी रेस्टोरेंट ले जाकर उन्हें सम्मानपूर्वक भोजन कराया।

पुराने मेला स्थल पर ‘रणसंग्राम’: जनप्रतिनिधि धरने पर
इवेंट कंपनी की बदइंतजामी यहीं नहीं रुकी। सोमवार दोपहर से पुराने मेला स्थल पर स्थानीय जनप्रतिनिधि और नगरवासी धरने पर बैठ गए हैं। यह इस सीजन में दूसरी बार है जब स्थानीय लोगों को विरोध के लिए सड़क पर उतरना पड़ा है।
धरना दे रहे लोगों की मुख्य शिकायतें
अस्वच्छता और बदबू: शौचालय और सफाई व्यवस्था का बुरा हाल,श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की उचित व्यवस्था न होना। पत्रकारों और आम नागरिकों के साथ इवेंट कंपनी के कर्मचारियों का अभद्र व्यवहार।
भुगतान पर रोक की मांग
प्रदर्शनकारियों की मांग है कि जब तक इवेंट कंपनी के कार्यों का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) न हो जाए, तब तक उन्हें एक रुपए का भी भुगतान न किया जाए।
आस्था के केंद्र में अव्यवस्था के सवाल
राजिम कुंभ 2026 में आ रहे साधु-संतों और श्रद्धालुओं को हो रही असुविधा ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। एक तरफ विधायक रोहित साहू का संवेदनशील रुख लोगों की तारीफ बटोर रहा है, तो दूसरी तरफ इवेंट कंपनी की ‘साहबगिरी’ ने मेले के आनंद को फीका कर दिया है।






