चैतन्य बघेल की जमानत के खिलाफ सरकार की याचिका पर सुनवाई टली, सौम्या मामलें मे दिए यह निर्देश

छत्तीसगढ़ का बहुचर्चित शराब घोटाले मामले में फंसे पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़ सरकार की याचिका पर सुनवाई को अब एक सप्ताह के लिए टाल दिया है। राज्य सरकार ने चैतन्य बघेल को मिली जमानत को रद्द करने के लिए शीर्ष अदालत में अपील की है। छत्तीसगढ़ सरकार का दावा है कि जमानत के बाद अहम गवाह अब बयान देने से काफी डर रहे हैं।
प्रमुख गवाह गायब
छत्तीसगढ़ सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी ने बताया कि चैतन्य बघेल को जमानत मिलने के बाद एक प्रमुख गवाह गायब है। जेठमलानी ने कहा कि यह भी संभव कि वह सामने नहीं आ रहा है। उन्होंने दलील दी कि अभियुक्त की रिहाई से जांच प्रभावित हो रही है। इस मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की पीठ में हुई। पीठ ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद मामले की अगली सुनवाई एक सप्ताह बाद तय की है।
चैतन्य की जमानत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने भी मनी लॉन्ड्रिंग मामले में छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य बघेल की जमानत को अलग से चुनौती दी है। पिछले महीने चैतन्य को जमानत मिली थी।
सौम्या को हाई कोर्ट जाने का निर्देश
न्यायालय ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की उप सचिव रहीं। निलंबित राज्य प्रशासनिक सेवा की अधिकारी सौम्या चौरसिया की याचिका पर भी विचार किया। सौम्या चौरसिया की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने दलील दी। कहा कि उन्हें बार-बार नई प्राथमिकी दर्ज कर गिरफ्तार किया जा रहा है।
उन्होंने इसे छठी गिरफ्तारी बताया। हालांकि, शीर्ष अदालत ने चौरसिया को राहत न देते हुए उन्हें जमानत के लिए छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय का रुख करने को कहा। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि एक सप्ताह के भीतर याचिका दायर की जाती है, तो हाई कोर्ट प्राथमिकी के आधार पर दो सप्ताह में फैसला सुनाए।






