टोनहीनारा, भंगी बस्ती, चुड़ैलझरिया जैसे छत्तीसगढ़ के दर्जनभर गांवो का बदलेगा नाम

रायपुर: क्या किसी गांव का नाम किसी की मानसिक पीड़ा का कारण हो सकता है? छत्तीसगढ़ सरकार और राष्ट्रीय आयोगों की नजर में इसका जवाब ‘हाँ’ है। प्रदेश के 12 गांवों की पहचान अब बदलने वाली है। बरसों से सामाजिक दंश और अपमान झेल रहे इन गांवों को अब एक नई और गरिमामय पहचान दी जा रही है।
क्यों पड़ी नाम बदलने की जरूरत?
कई दशकों से छत्तीसगढ़ के कुछ गांवों और टोलों के नाम नकटी, भंगी बस्ती, चमारपारा, और टोनहीनारा जैसे शब्दों से जुड़े थे। ये शब्द न केवल जातिसूचक हैं, बल्कि अपमानजनक और अंधविश्वास को बढ़ावा देने वाले भी माने जाते हैं।
- मानसिक आघात: इन नामों के कारण वहां रहने वाले लोगों को दूसरे इलाकों में अपनी पहचान बताने में शर्मिंदगी और सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ता था।
- आयोग की पहल: राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग के कड़े निर्देशों के बाद राज्य सरकार ने इन ‘कलंक’ जैसे नामों को मिटाने की प्रक्रिया शुरू की है।
इन जिलों में बदलेगी गांवों की ‘किस्मत’
विभिन्न जिलों से ऐसे नामों की सूची तैयार की गई है जिन्हें जल्द ही राजपत्र (Gazette) में बदलकर प्रकाशित किया जाएगा:
| क्षेत्र/जिले | वर्तमान अपमानजनक नाम (जो बदले जाएंगे) |
| रायपुर, दुर्ग, बिलासपुर | नकटी, सुवरतला, कोलिहा |
| महासमुंद, जांजगीर-चांपा | भंगी बस्ती, प्रेतनडीह |
| बालोद, कवर्धा | चंडालपुर, डौकीडीह, बोक्करखार |
| रायगढ़ | टोनहीनारा |
| बस्तर, कांकेर | चूहड़ा टोला |
| सरगुजा, जशपुर | डोमपारा, डोम टोला, चुड़ैलझरिया |
प्रशासन का पक्ष: सम्मान ही प्राथमिकता
अनुसूचित जनजाति आयोग के सचिव इफ्तखार अली के अनुसार, ये नाम केवल शब्द नहीं बल्कि एक वर्ग विशेष के प्रति सामाजिक भेदभाव का प्रतीक बन गए थे। जिला स्तर पर नए और गौरवशाली नामों के प्रस्ताव तैयार किए जा रहे हैं।
नया नाम, नया सवेरा: > यह बदलाव केवल कागजों पर नहीं होगा, बल्कि उन हजारों लोगों के आत्मविश्वास को बढ़ाएगा जो अपनी जड़ों के नाम की वजह से खुद को छोटा महसूस करते थे। अब टोनहीनारा और डोमटोला जैसे शब्द इतिहास का हिस्सा बन जाएंगे।






