छत्तीसगढ़ की परीक्षाओं में होने वाली धांधली, पेपर लीक और नकल करने वालो की अब खैर नहीं, विधानसभा में बिल पास


छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र के अंतिम दिन ‘सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों का निवारण) विधेयक’ को पारित कर दिया गया। यह बिल सरकारी परीक्षाओं में होने वाली धांधली, पेपर लीक और नकल रोकने के लिए लाया गया है।
इस नए कानून के प्रमुख प्रावधान निम्नलिखित हैं:
- अभ्यर्थियों (Candidates) के लिए नियम
नकल या अनुचित साधनों का उपयोग करते पकड़े जाने पर परीक्षार्थियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाया जाएगा:
परिणाम: संबंधित परीक्षा का रिजल्ट तत्काल रोक दिया जाएगा।
प्रतिबंध: अभ्यर्थी को 1 से 3 साल के लिए किसी भी आगामी परीक्षा में बैठने से प्रतिबंधित (डीबार) किया जाएगा।
राहत: यह बैन स्थायी नहीं है; सजा की अवधि पूरी होने के बाद उम्मीदवार दोबारा परीक्षा दे सकेंगे।
- दोषियों और माफियाओं के लिए जेल व जुर्माना
पेपर लीक या संगठित अपराध में शामिल बाहरी व्यक्तियों और दोषियों के लिए कठोर दंड तय किया गया है:
सजा: 3 से 10 साल तक का कारावास।
आर्थिक दंड: 10 लाख रुपये तक का जुर्माना।
अन्य उल्लंघन: पेपर लीक, अवैध प्रवेश या रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करने पर 1 से 5 साल की जेल और 5 लाख रुपये तक का जुर्माना लगेगा।
- संस्थाओं और एजेंसियों पर नकेल
परीक्षा आयोजित करने वाली कंपनियों या एजेंसियों की मिलीभगत पाए जाने पर भारी कार्रवाई होगी:
जुर्माना : दोषी एजेंसी पर 1 करोड़ रुपये तक का भारी-भरकम जुर्माना लगाया जाएगा।
ब्लैकलिस्ट : कम से कम 3 साल तक परीक्षा कराने पर रोक।
वसूली : परीक्षा रद्द होने की स्थिति में होने वाले पूरे खर्च की भरपाई भी संबंधित एजेंसी से की जाएगी।
- अधिकारियों की जवाबदेही
सिर्फ बाहरी लोग ही नहीं, विभाग के भीतर बैठे जिम्मेदार लोग भी अब बच नहीं पाएंगे,यदि किसी डायरेक्टर या अधिकारी की लापरवाही या सहमति से गड़बड़ी होती है, तो उन्हें 3 से 10 साल की जेल और 1 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का सामना करना पड़ेगा।








