छत्तीसगढ़ में अब शिक्षक बनने देने होगे 2 नहीं…3 नहीं ….इतने साल…बीएड पाठ्यक्रम में बदलाव

छत्तीसगढ़ में बीएड कोर्स 2 साल से बढ़कर 4 साल का इंटीग्रेटेड प्रोग्राम बनने जा रहा है। NEP 2020 के तहत उच्च शिक्षा विभाग नई शिक्षक शिक्षा पॉलिसी लागू करने की तैयारी में है।
छत्तीसगढ़ में शिक्षक शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव प्रस्तावित है, जिसके तहत बीएड यानी बैचलर ऑफ एजुकेशन को दो वर्षीय पीजी कोर्स से बदलकर चार वर्षीय इंटीग्रेटेड डिग्री प्रोग्राम में बदला जाएगा। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सिफारिशों को लागू करने और शिक्षक प्रशिक्षण को अधिक व्यावहारिक व मल्टी‑डिसिप्लिनरी बनाने के उद्देश्य से उठाया जा रहा है।
नया मॉडल: 12वीं के बाद सीधी एंट्री
नई व्यवस्था में भविष्य के अभ्यर्थियों को स्नातक के बाद अलग से दो साल बीएड करने की बजाय 12वीं के तुरंत बाद चार वर्षीय एकीकृत बीएड कोर्स में प्रवेश मिलेगा।
अभी छत्तीसगढ़ में बीएड दो वर्षीय पोस्ट‑ग्रेजुएट कोर्स के रूप में संचालित है, जिसमें पहले ग्रेजुएशन, फिर बीएड करना पड़ता है; प्रस्तावित मॉडल इस दोहरी पढ़ाई को एकीकृत कर देगा।
उच्च शिक्षा विभाग की रणनीति
उच्च शिक्षा विभाग ने संकेत दिया है कि 4 वर्षीय बीएड को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा और पहले चरण में चयनित शासकीय व अनुदान प्राप्त कॉलेजों में पायलट आधार पर शुरू किया जाएगा।
इसके लिए पाठ्यक्रम डिज़ाइन, फैकल्टी उपलब्धता, प्रशिक्षण व्यवस्था और इंफ्रास्ट्रक्चर का आकलन किया जा रहा है, साथ ही विश्वविद्यालयों और NCTE दिशानिर्देशों के अनुसार सिलेबस को अंतिम रूप दिया जाएगा।
NEP 2020 का फोकस
राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में स्पष्ट सिफारिश है कि 2030 तक स्कूल स्तर पर नियुक्त होने वाले शिक्षकों के लिए 4 वर्षीय इंटीग्रेटेड बीएड न्यूनतम योग्यता मानी जाए।
केंद्र सरकार और यूजीसी पहले ही राज्यों को इस दिशा में कदम बढ़ाने के लिए कह चुके हैं और कुछ राज्यों में चुनिंदा संस्थानों में यह मॉडल शुरू भी हो चुका है; अब छत्तीसगढ़ भी उसी दिशा में आगे बढ़ रहा है।
छात्रों को मिलने वाले फायदे
4 वर्षीय बीएड से छात्रों का समय और लागत दोनों बचेंगे, क्योंकि स्नातक और बीएड को अलग‑अलग करने की बजाय एक ही स्ट्रक्चर में पूरा किया जा सकेगा।
लंबा और इंटीग्रेटेड पाठ्यक्रम होने से उन्हें क्लासरूम टीचिंग, स्कूल‑आधारित इंटर्नशिप, प्रैक्टिकल ट्रेनिंग और नई शिक्षण तकनीकों का ज्यादा गहरा अनुभव मिलेगा।
गुणवत्ता और टीचर कमी पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, शुरुआत से ही स्कूलों से जुड़ा प्रशिक्षण मिलने से भावी शिक्षकों की प्रैक्टिकल समझ बढ़ेगी और सिर्फ “डिग्री फॉर्मेलिटी” वाली पुरानी धारणा में बदलाव आएगा।
उच्च शिक्षा सचिव एस भारतीदासन ने संकेत दिया है कि विभाग इस सत्र से ही नई व्यवस्था लागू करने की तैयारी में है, जिससे विषय‑विशेष के प्रशिक्षित शिक्षकों की कमी दूर होने की उम्मीद है।






