भाजपा सरकार का बजट सिर्फ कागज़ी पुलिंदा, जमीनी हकीकत से कोसों दूर : चित्रकांत श्रीवास
किसान, महिला और युवा पूरी तरह उपेक्षित; ‘मोदी की गारंटी’ का बजट में कहीं जिक्र नहीं, उद्योगपतियों के लिए तैयार हो रहा है संसाधनों का रास्ता”


सीपत (हिमांशु गुप्ता) :– राज्य के वित्त मंत्री ओपी चौधरी द्वारा छत्तीसगढ़ विधानसभा में वित्त वर्ष 2026-27 के लिए 1 लाख 72 हजार करोड़ रुपये का बजट पेश किए जाने के बाद सियासी प्रतिक्रियाओं का दौर तेज हो गया है। केश शिल्पी कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष चित्रकान्त श्रीवास ने बजट को “सिर्फ कागज़ी पुलिंदा” करार देते हुए सरकार पर जमकर निशाना साधा है। श्रीवास ने कहा कि यह बजट पूरी तरह शब्दों का जाल है, जिसमें किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए कोई ठोस प्रावधान नजर नहीं आता। उन्होंने आरोप लगाया कि धान खरीदी के मुद्दे पर किसानों के साथ धोखा हुआ है। “किसानों का रकबा बढ़ा, उत्पादन बढ़ा, लेकिन खरीदी कम हुई। बजट में इस विसंगति को दूर करने का कोई स्पष्ट रोडमैप नहीं है,” उन्होंने कहा। उन्होंने आगे कहा कि ओवरब्रिज और रेलवे ट्रैक निर्माण जैसे प्रावधानों के जरिए चुनिंदा उद्योगपतियों को लाभ पहुंचाने और प्रदेश की खनिज संपदा के दोहन के लिए आधार तैयार किया जा रहा है। “यह बजट आम जनता के लिए नहीं, बल्कि उद्योग घरानों के हितों को साधने वाला दस्तावेज प्रतीत होता है,” श्रीवास ने आरोप लगाया। भाजपा सरकार के सुशासन के दावे पर सवाल उठाते हुए श्रीवास ने कहा कि यह सरकार का तीसरा बजट है, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई ठोस बदलाव नजर नहीं आता। “मोदी की गारंटी का डंका पीटकर चुनाव जीता गया, लेकिन बजट में उसकी कोई झलक नहीं दिखती। न किसानों को राहत, न आम जनता को महंगाई से निजात,” उन्होंने कहा। उन्होंने यह भी कहा कि पिछले बजट में किए गए वादों और योजनाओं की प्रगति का कोई स्पष्ट उल्लेख नहीं किया गया है, जिससे सरकार की जवाबदेही पर सवाल खड़े होते हैं। “यह बजट जनता के साथ छलावा है। आंकड़ों की बाजीगरी से सच्चाई नहीं बदलेगी,” श्रीवास ने तीखा प्रहार किया।
अंत में उन्होंने कहा कि प्रदेश की जनता अब वादों और नारों से नहीं, बल्कि ठोस परिणाम चाहती है, और यदि सरकार ने अपनी नीतियों में बदलाव नहीं किया तो आने वाले समय में जनता इसका जवाब देगी।








