बिलासपुर संभाग

घायल गोवंश के लिए देवदूत बना ‘सुरभि गौ सेवा समिति’, प्रशासन ने बढ़ाया हाथ — स्थायी गौशाला के लिए मिलेगी जमीन और सुविधाएं

कलेक्टर संजय अग्रवाल बोले – जो गायों से प्रेम करता है, वह इंसानियत की सबसे बड़ी सेवा करता है

सीपत (हिमांशु गुप्ता) :– सड़क हादसों में तड़पते, कटे-फटे और बेसहारा पड़े गोवंश के लिए खम्हरिया स्थित गायत्री मंदिर परिसर में संचालित ‘सुरभि गौ सेवा समिति’ आज संवेदना, सेवा और समर्पण की जीवंत मिसाल बन चुकी है। गुरुवार को कलेक्टर संजय अग्रवाल और जिला पंचायत सीईओ संदीप अग्रवाल जब जेवरा में आयोजित जल रक्षा अभियान में शामिल होने जा रहे थे, तभी समिति के सेवा धाम पहुंचे। यहां घायल गायों की दर्दनाक हालत—कटी पूंछ, टूटे पैर और गहरे जख्म—देखकर दोनों अधिकारी भावुक हो उठे। प्रशासनिक औपचारिकताओं से परे जाकर कलेक्टर और सीईओ ने स्वयं गोवंश को सहलाया, पुचकारा और अपने हाथों से गुड़-चना व हरी सब्जियां खिलाईं। यह दृश्य वहां मौजूद ग्रामीणों के लिए भावनात्मक और प्रेरणादायक बन गया। उस पल प्रशासनिक पद नहीं, बल्कि इंसानियत की संवेदना सबसे आगे दिखाई दी।


कोरोना काल में लिया संकल्प, आज सैकड़ों गोवंश को मिल रही नई जिंदगी


समिति के सक्रिय सदस्य एवं शिक्षक सुधांशु दीवान ने बताया कि कोरोना काल की कठिन परिस्थितियों में सात युवाओं ने संकल्प लिया था कि सड़क पर घायल गोवंश को तड़पता नहीं छोड़ेंगे। तब से लेकर आज तक समिति लगातार घायल मवेशियों का उपचार, देखभाल और पुनर्वास कर रही है। उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में समिति का मासिक खर्च 40 हजार रुपये तक पहुंच जाता है, जबकि सामान्य दिनों में यह 20 हजार रुपये के आसपास रहता है। दवाइयों, चारा और उपचार की पूरी व्यवस्था समाज के सहयोग से की जाती है। हर वर्ष यहां 100 से अधिक घायल गोवंश को नया जीवन मिलता है। हालांकि स्थायी आश्रय के अभाव में स्वस्थ होने के बाद उन्हें पुनः खुले में छोड़ना पड़ता है, जो सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।


प्रशासन का बड़ा फैसला – पांच एकड़ भूमि पर बनेगी स्थायी गौशाला


निरीक्षण के दौरान कलेक्टर संजय अग्रवाल ने ऊनी रोड पर प्रस्तावित पांच एकड़ गौठान भूमि का निरीक्षण किया और पंचायत से प्रस्ताव पारित कर आवेदन प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि प्रशासन द्वारा शेड निर्माण, पेयजल व्यवस्था और फेंसिंग जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी। कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कहा कि गायों की सेवा केवल दूध देने तक सीमित नहीं होनी चाहिए। दूध बंद होने पर उन्हें सड़कों पर छोड़ देना अमानवीय है। जो व्यक्ति गायों से प्रेम करता है, वह इंसानियत की सच्ची सेवा करता है। उन्होंने किसानों से पैरा जलाने के बजाय गौ सेवा के लिए दान करने की अपील भी की। युवाओं की सेवा भावना से प्रभावित होकर कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ ने स्वयं 2-2 हजार रुपये का सहयोग भी प्रदान किया।


एक महिला की संवेदना से शुरू हुआ सेवा का कारवां


समिति की शुरुआत ग्राम खम्हरिया में अध्यक्ष फत्तेलाल राजवाड़े की पत्नी शशि किरण राजवाड़े ने अकेले की थी। एक महिला की करुणा से शुरू हुई यह पहल आज युवाओं के सहयोग से एक सशक्त सामाजिक अभियान बन चुकी है।।समिति के सदस्य मनीष सोनी, सुशील सोनी, तरुण साहू, अमित अग्रवाल, सुधांशु दीवान, हिमांशु शर्मा और जनपद सदस्य देवेश शर्मा निस्वार्थ भाव से सेवा में जुटे हैं। इन युवाओं ने साबित कर दिया है कि बदलाव के लिए संसाधन नहीं, बल्कि संवेदनशील दिल की आवश्यकता होती है।


संवेदना का केंद्र बना खम्हरिया, जल्द मिलेगा स्थायी आश्रय


खम्हरिया का यह गौ सेवा धाम अब केवल उपचार केंद्र नहीं, बल्कि मानवता, करुणा और सामाजिक जिम्मेदारी का प्रतीक बन चुका है। प्रशासनिक सहयोग मिलने के बाद जल्द ही यहां स्थायी गौशाला का निर्माण होगा, जहां हर घायल और बेसहारा गोवंश को इलाज, सुरक्षा और सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर मिलेगा। यह पहल न केवल गोवंश की रक्षा कर रही है, बल्कि समाज को संवेदना और सेवा का सशक्त संदेश भी दे रही है।

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