गाँधी जी की पुण्यतिथि पर पहली बार छत्तीसगढ़ में खुली रही शराब दुकानें, कांग्रेस बोली तानाशाही सरकार

रायपुर: छत्तीसगढ़ के इतिहास में संभवतः यह पहली बार हुआ है जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की पुण्यतिथि (30 जनवरी) पर प्रदेश में शराब की दुकानें खुली रहीं। अब तक के वर्षों में गांधी जयंती और उनकी पुण्यतिथि पर पूरे देश के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में भी ‘ड्राय डे’ घोषित रहता था। इस बदलाव ने प्रदेश की सियासत में भूचाल ला दिया है, जहाँ कांग्रेस ने इसे बापू का अपमान और भाजपा सरकार की ‘तानाशाही’ करार दिया है।
परंपरा टूटने पर बवाल
आमतौर पर 30 जनवरी को गांधी जी के सम्मान में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध रहता है। लेकिन इस वर्ष आबकारी विभाग द्वारा ऐसा कोई आदेश जारी नहीं होने के कारण शराब प्रेमियों की भीड़ दुकानों पर नजर आई। इस कदम ने विपक्षी दल कांग्रेस को सरकार को घेरने का बड़ा मौका दे दिया है। कांग्रेस ने इस मामले पर कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। पीसीसी (प्रदेश कांग्रेस कमेटी) के नेताओं का कहना है कि कांग्रेस ने सरकार पर आरोप लगाया कि वह राजस्व के लालच में नैतिक मूल्यों को भूल गई है। विपक्ष का दावा है कि भाजपा सरकार जानबूझकर उन परंपराओं को खत्म कर रही है जो गांधी जी के आदर्शों से जुड़ी हैं।
महात्मा गाँधी जी की पुण्यतिथि पर भी तानाशाही सरकार द्वारा शराब दुकानें बंद न करने का निर्णय दुर्भाग्यपूर्ण है।
— INC Chhattisgarh (@INCChhattisgarh) January 30, 2026
इसी के विरोध में आज जिला मुख्यालय स्थित शराब भट्टी को बंद करवाने की मांग को लेकर बालोद में युवा कांग्रेस के सैकड़ों साथी धरने पर बैठे हैं। pic.twitter.com/tklIzdpath
छत्तीसगढ़ की संस्कृति पर चोट
नेताओं ने कहा कि छत्तीसगढ़ की धरती हमेशा से गांधीवादी विचारधारा की समर्थक रही है, ऐसे में यह निर्णय राज्य की छवि धूमिल करने वाला है। हालांकि सत्तापक्ष की ओर से अभी इस पर कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं आया है, लेकिन प्रशासनिक सूत्रों का कहना है कि कैलेंडर और राजपत्रित छुट्टियों की सूची के अनुसार ही दुकानों के संचालन का निर्णय लिया गया। वहीं भाजपा समर्थकों का तर्क है कि कांग्रेस केवल मुद्दों के अभाव में राजनीति कर रही है।






