Bilaspur High Court: SECL को झटका, आश्रित को मासिक सहायता देने का आदेश


बिलासपुर हाई कोर्ट ने एक अहम फैसले में स्पष्ट किया है कि खदान दुर्घटना या अन्य कारणों से कर्मचारी की मृत्यु होने पर उसके आश्रित को आर्थिक सहायता देना अनिवार्य है।
Sanjay K. Agrawal की एकल पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि ऐसी स्थिति में आश्रित महिला को हर महीने 6000 रुपए की सहायता राशि दी जानी चाहिए।
SECL प्रबंधन को कोर्ट का सख्त निर्देश
अदालत ने South Eastern Coalfields Limited को निर्देश दिया कि राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते के प्रावधानों के तहत याचिकाकर्ता को आवेदन की तारीख से ही मासिक सहायता राशि दी जाए।
कोर्ट ने यह भी साफ किया कि सहायता देने में देरी या इनकार करना नियमों के खिलाफ है।
क्या था पूरा मामला
याचिकाकर्ता अमरेश राजवाड़े के पिता रामप्रसाद एसईसीएल विश्रामपुर में कार्यरत थे और वर्ष 2012 में ड्यूटी के दौरान उनकी मृत्यु हो गई।
इसके बाद:
उनकी पत्नी ने आर्थिक सहायता और रोजगार के लिए आवेदन किया
2014 में उनकी भी मृत्यु हो गई
बाद में पुत्र अमरेश ने स्वरोजगार के लिए आवेदन किया
लेकिन एसईसीएल प्रबंधन ने इस आवेदन को खारिज कर दिया।
हाई कोर्ट में दी चुनौती
प्रबंधन के फैसले के खिलाफ याचिकाकर्ता ने अदालत का दरवाजा खटखटाया।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि:
परिवार को न तो आश्रित रोजगार मिला
न ही किसी प्रकार की आर्थिक सहायता दी गई
कोर्ट ने क्या कहा
अदालत ने अपने फैसले में कहा कि याचिकाकर्ता का मामला राष्ट्रीय कोयला वेतन समझौते के दायरे में आता है।
स्वरोजगार के लिए पात्रता नहीं मानी गई
लेकिन मासिक आर्थिक सहायता का अधिकार मान्य किया गया
कोर्ट ने यह भी कहा कि सहायता देने की मांग को ठुकराना पूरी तरह अनुचित था।
परिवार को मिलेगा आर्थिक सहारा
इस फैसले के बाद अब याचिकाकर्ता को आवेदन की तारीख से मासिक सहायता राशि मिलने का रास्ता साफ हो गया है।








