छत्तीसगढ़

PNG गैस का सफर: जमीन से आपके किचन तक कैसे पहुंचती है पाइप गैस…जानें

PNG Process: आज के दौर में पाइप नेचुरल गैस यानी PNG घरेलू ईंधन के रूप में तेजी से लोकप्रिय हो रही है। एलपीजी के मुकाबले यह अधिक सुरक्षित, पर्यावरण के अनुकूल और किफायती विकल्प माना जा रहा है। सबसे बड़ी बात, इसमें सिलेंडर बदलने की परेशानी नहीं होती और गैस सीधे पाइपलाइन के जरिए किचन तक पहुंचती है।

कहां से शुरू होती है PNG की यात्रा

PNG की शुरुआत जमीन के नीचे मौजूद प्राकृतिक गैस के भंडारों से होती है। ड्रिलिंग के माध्यम से गैस को बाहर निकाला जाता है, लेकिन इस अवस्था में यह पूरी तरह उपयोग के लायक नहीं होती। इसके बाद इसे प्रोसेसिंग प्लांट में भेजा जाता है, जहां से कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर जैसे अवांछित तत्वों को हटाकर गैस को शुद्ध किया जाता है। शुद्ध होने के बाद ही इसे उपयोग के लिए तैयार माना जाता है।

पाइपलाइन के जरिए शहरों तक सप्लाई

प्रोसेसिंग के बाद गैस को हाई प्रेशर पाइपलाइनों के माध्यम से अलग अलग शहरों तक पहुंचाया जाता है। ये पाइपलाइन जमीन के नीचे बिछाई जाती हैं, जिससे सप्लाई सुरक्षित बनी रहती है। शहरों में पहुंचने के बाद छोटे नेटवर्क के जरिए इसे मोहल्लों और फिर घरों तक कनेक्ट किया जाता है।

घरों में कैसे पहुंचती है और कैसे बनता है बिल

घरों में PNG कनेक्शन के जरिए गैस सीधे चूल्हे तक आती है। इसमें मीटर लगा होता है, जो उपयोग के अनुसार खपत दर्ज करता है। जितनी गैस इस्तेमाल होती है, उसी के हिसाब से बिल तैयार होता है। यही कारण है कि यह कई बार एलपीजी से सस्ती पड़ती है।

सुरक्षा के मामले में क्यों आगे है PNG

PNG को सुरक्षा के लिहाज से एलपीजी से बेहतर माना जाता है। इसमें एक खास तरह का केमिकल मिलाया जाता है, जिससे गैस लीक होने पर तुरंत गंध के जरिए पता चल जाता है। इसके अलावा आधुनिक सिस्टम में ऑटोमैटिक सेफ्टी फीचर भी लगे होते हैं, जो किसी गड़बड़ी की स्थिति में गैस सप्लाई को तुरंत नियंत्रित कर देते हैं।

क्यों बन रही है लोगों की पहली पसंद

सुविधा, कम खर्च और बेहतर सुरक्षा जैसे कारणों की वजह से PNG आज शहरी और अर्ध शहरी इलाकों में तेजी से अपनी जगह बना रही है। भविष्य में

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Regional Desk

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