छत्तीसगढ़ में ‘प्रतिनिधियों’ की बाढ़ ! विधायक ने लगाया निगरानी का ‘अंबार’, सोशल मीडिया पर मचा घमासान

छत्तीसगढ़ के सक्ति जिला के जैजेपूर विधानसभा क्षेत्र में 56 धान खरीदी केंद्र में निगरानी के लिए 166 विधायक प्रतिनिधियों की नियुक्ति की गई साथ ही साथ अलग अलग इलाके की निगरानी के लिए अलग से 11 विधायक प्रतिनिधियों की नियुक्ति सोशल मीडिया में चर्चा का विषय बना हुआ है, इन नियुक्तियों को पखवाड़े भर से ज्यादा बीत जाने के बाद भी अभी तक इलाके में इस बात की चर्चा आम है, अमूमन हर धान खरीदी केंद्र में औसतन तीन से चार विधायक प्रतिनिधियों की गई है ,जैजेपूर विधायक बालेश्वर साहू द्वारा इतने ज्यादा संख्या में विधायक प्रतिनिधियों की नियुक्ति लोग सोशल मीडिया पर पर कई तरह के सवाल उठा रहे है मसलन छोटे से जिला के छोटे से विधानसभा में इतने ज्यादा विधायक प्रतिनिधियों की आवश्यकता क्यों ?, क्या इन्हें वेतन या भत्ता दिया जाऐगा गर हां तो उसका भुगतान क्या सरकारी खजाने से होगा ऐसे ही तरह तरह से सवाल पूछते हुए लोग सोशल मीडिया में विधायक को घेरने में लगे है
छत्तीसगढ़ के छोटे से जिले सक्ती के छोटे से जैजेपुर विधानसभा क्षेत्र में इन दिनों चर्चा का सबसे गर्म विषय न तो धान बेचने की व्यवस्था है, न ही तौल मशीनों की गति — बल्कि ‘विधायक प्रतिनिधियों’ की गिनती है। जी हाँ! जैजेपुर विधायक बालेश्वर साहू ने धान खरीदी केंद्रों की निगरानी के लिए इतने प्रतिनिधि नियुक्त कर दिए हैं कि लोग उन्हें ‘टीम 166’ कहने लगे हैं।

आंकड़े खुद कहानी बयान करते हैं
क्षेत्र के 56 धान खरीदी केंद्रों की देखरेख के लिए 22 दिसंबर को 166 विधायक प्रतिनिधि नियुक्त हुए हैं। औसतन हर केंद्र पर तीन से चार प्रतिनिधि! इतना ही नहीं, इसके अलावा 11 खास प्रतिनिधियों को अलग-अलग इलाकों की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
अब सोशल मीडिया पर लोगों के पास सवालों की फसल तैयार है — “छोटे से विधानसभा में इतने सारे प्रतिनिधियों की जरूरत क्यों?” “क्या इन्हें वेतन या भत्ता मिलेगा?”, “अगर हां, तो सरकारी खजाने से?” ऐसे ही सवालों के बीच फेसबुक और व्हाट्सऐप ग्रुप्स पर मीम्स की बौछार हो गई है। एक यूजर ने तो टिप्पणी कर दी — ‘धान खरीदी कम, प्रतिनिधि खरीदी ज्यादा लगती है।’
वहीं, विधायक समर्थक इसे “सक्रिय निगरानी” की नई पहल बता रहे हैं। उनका कहना है, “जितने ज्यादा लोग जुड़ेंगे, उतनी बेहतर होगी व्यवस्था।” हालांकि विरोधी पक्ष और आमजन इसे “राजनीतिक ओवरलोड” बता रहे हैं।
जो भी हो, इस बार धान खरीदी सीजन में सिर्फ तुला और तौल ही नहीं, गिनती भी खूब चल रही है — वो भी प्रतिनिधियों की!
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