बिलासपुर संभाग

मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा — प्राचार्य रामेश्वर जायसवाल ने भागवत मंच से की देहदान की घोषणा, भागवत पंडाल भावुक

सोंठी मां मन्नादाई में देवी भक्ति की अद्भुत बयार, 551 तेल व 21 घृत ज्योति कलशों के बीच हजारों श्रद्धालु उमड़े

सीपत (हिमांशु गुप्ता) :– सीपत क्षेत्र के वनांचल ग्राम सोंठी में इन दिनों चैत्र नवरात्रि के अवसर पर भक्ति, आस्था और मानवता का अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। बगलामुखी मां मन्नादाई मंदिर में आयोजित सार्वजनिक श्रीमद् देवी भागवत कथा में जहां एक ओर हजारों श्रद्धालु देवी महिमा में डूबे हुए हैं, वहीं दूसरी ओर एक प्रेरणादायी पहल ने पूरे क्षेत्र को भावुक कर दिया है। राष्ट्रीय कथावाचिका दीदी हेमलता शर्मा के मधुर एवं संगीतमय प्रवचनों से प्रतिदिन श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ रही है। 551 तेल ज्योति एवं 21 घृत ज्योति कलशों की दिव्य आभा के बीच पूरा वातावरण भक्तिमय हो उठा है। इसी पावन अवसर पर कथा के मुख्य यजमान एवं शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जेवरा के प्राचार्य रामेश्वर जायसवाल ने अपने जन्मदिन (23 मार्च) पर एक ऐतिहासिक और भावुक निर्णय लेते हुए मृत्यु के बाद देहदान का संकल्प लिया। जैसे ही उन्होंने मंच से यह घोषणा की, पूरा पंडाल तालियों और जयकारों से गूंज उठा, वहीं अनेक श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गई।

मेरे शरीर का हर अंग किसी के काम आए — रामेश्वर जायसवाल

अपने संकल्प को लेकर श्री जायसवाल ने भावुक शब्दों में कहा कि यह शरीर नश्वर है, लेकिन अगर मेरे जाने के बाद मेरे अंग किसी जरूरतमंद के जीवन को रोशनी दे सकें, तो इससे बड़ा पुण्य कोई नहीं। मैं चाहता हूं कि लोग आगे आएं और देहदान, अंगदान के लिए जागरूक बनें। उन्होंने आगे कहा कि यह केवल व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने का एक प्रयास है। उन्होंने छत्तीसगढ़ आयुर्वेद ज्ञान संस्थान (सिम्स) से फॉर्म मंगाकर विधिवत प्रक्रिया भी पूर्ण की।

भक्ति के साथ समाज सुधार की मिसाल , भावनाओं से भरा भागवत पंडाल

श्री रामेश्वर जायसवाल लंबे समय से सामाजिक और धार्मिक कार्यों में सक्रिय हैं। उनके नेतृत्व में ग्रामवासियों ने चंदा और श्रमदान के जरिए मंदिर परिसर में विशाल ज्योति कक्ष और मंच का निर्माण कराया। मंदिर परिसर को पर्यावरण संरक्षण के अनुरूप विकसित किया गया है, जहां चंपा, गुड़हल, नारियल सहित सैकड़ों औषधीय पौधे लगाए गए हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि लगभग 400 वर्ष पुरानी इस आस्था स्थल पर प्रचलित पशु बलि प्रथा को भी उनके प्रयासों से पूरी तरह बंद कराया गया। साथ ही मंदिर परिसर में नशा और मदिरापान पर पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया है। देहदान की घोषणा के बाद पंडाल में मौजूद हजारों श्रद्धालु भावुक हो उठे। हर ओर रामेश्वर जायसवाल अमर रहें और जय माता दी के जयकारे गूंजने लगे। लोगों ने उनके इस साहसिक और महान निर्णय की मुक्तकंठ से सराहना की। सोंठी की धरती पर इन दिनों भक्ति के साथ मानवता का जो संदेश गूंज रहा है, वह पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा बनता जा रहा है।

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